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पत्‍नी, बेटी और 100 करोड़ की संपत्ति छोड़कर जैन भिक्षु बन गया शख्‍स

सुमित के कजिन संदीप राठौर, जिन्होंने उनके इस कदम का विरोध किया था, ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि स्थानीय सरकारी अधिकारियों ने समुदाय के नेताओं और अन्य से शुक्रवार रात बातचीत की थी।
मध्य प्रदेश के निवासी सुमित राठौर ने अपनी पत्नी, बेटी और 100 करोड़ की संपत्ति छोड़कर जैन भिक्षु बनने का ऐलान किया है। (Photo: Facebook)

मध्य प्रदेश में 100 करोड़ रुपये की संपत्ति छोड़कर जैन भिक्षु बनने जा रहे दंपत्ति के मामले में सस्पेंस शनिवार को भी बना रहा। यहां हुए एक समारोह में केवल पति ही भिक्षु बना, जबकि उसकी पत्नी का समारोह रद्द कर दिया गया। यह सेरीमनी गुजरात के सूरत के वृंदावन पार्क में जैन भिक्षु आचार्य रामलाल जी महाराज के सानिध्य में हुई, जिन्होंने 35 साल के सुमित राठौर को सुमित मुनि का नाम दिया। रामलाल ने कहा कि 34 वर्षीय अनामिका की दीक्षा कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद होगी। उन्होंने इसके लिए कोई तारीख नहीं दी है। अखिल भारतीय साधुर्गी जैन श्रवण संघ नीमच के जिला प्रभारी संदीप खाबिया, जो सूरत में हुए दीक्षा समारोह में मौजूद भी थे, ने कहा कि जैन समुदाय के हजारों लोगों की मौजूदगी में सुबह 7.30 बजे यह कार्यक्रम हुआ था। सुमित का सिर मुंडवा दिया गया और उन्होंने भिक्षुओं वाले सफेद कपड़े पहन लिए। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि अनामिका की दीक्षा स्थगित क्यों कर दी गई।

जाने-माने डॉक्टर और समुदाय के नेता आरके भंडारी ने कहा कि यह फैसला महिला के लिए सबसे अच्छा था। हालांकि कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दंपत्ति के इस फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत भी की है। उनका तर्क है कि दंपत्ति के इस कदम से उनकी बेटी इब्ह्या के मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा। शुक्रवार तक स्थिति साफ नहीं थी, क्योंकि इस दंपत्ति ने एक एफिडेविट साइन कर अपनी बेटी की जिम्मेदारी अनामिका के पिता अशोक चंदलिया को सौंप दी, जिससे हर किसी को यह यकीन हो गया कि सुमित और अनामिका जैन भिक्षु बनने जा रहे हैं।

सुमित के कजिन संदीप राठौर, जिन्होंने उनके इस कदम का विरोध किया था, ने हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि स्थानीय सरकारी अधिकारियों ने समुदाय के नेताओं और अन्य से शुक्रवार रात बातचीत की थी। उन्होंने कहा, मैं खुद अनामिका का समारोह स्थगित होने से संतुष्ट हूं। आरटीआई एक्टिविस्ट कपिल शुक्ला ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि उन्हें जैन समुदाय की निजी गतिविधियों के बारे में जानकारी नहीं है। लेकिन अनामिका की दीक्षा स्थगित होने का मतलब है कि यह कई वर्षों के लिए स्थगित हो गई है, शायद उनकी बेटी के बड़ी होने तक।

गुजरात राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (जीएससीपीसीआर) अध्यक्ष जागृति पंड्या ने कहा कि दम्पति की पुत्री के भविष्य की चिंता को लेकर एक व्यक्ति ने हाल में आयोग में एक आरटीआई अर्जी दायर की है। जागृति पंड्या ने कहा, ‘‘आरटीआई अर्जी के जरिए व्यक्ति ने हमसे जानना चाहा है कि यदि दम्पति भिक्षु बन जाते हैं तो बच्ची का क्या होगा।’’ चूंकि कार्यक्रम सूरत में हो रहा है, सूरत पुलिस आयुक्त एवं कलेक्टर से यह पता लगाने के लिए कहा गया है कि दम्पति ने अपनी पुत्री के भविष्य के लिए क्या कदम उठाए हैं। उनसे कहा गया कि वे आगे की कार्रवाई के लिए अपनी रिपोर्ट जीएससीपीसीआर में दें।

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