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RSS नेता इंद्रेश कुमार बोले- भीख मांगना भी 20 करोड़ लोगों का रोजगार

आरएसएस नेता ने कहा कि पकौड़े तलना देश के 15 करोड़ से ज्यादा लोगों का व्यवसाय है, और इसे हीन काम नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पकौड़े बेचने को भी लोग हीन काम समझते हैं तो ये बेहद दुखद है।
इंद्रेश कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता हैं। (तस्वीर-पीटीआई)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने रोजगार पर एक बयान देकर विवाद को जन्म दे दिया है। इंद्रेश कुमार ने कहा कि भीख मांगना भी एक तरह का रोजगार है। पत्रिका अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक इंदौर में कलाम का भारत विषय पर आयोजित एक बैठक के दौरान आरएसएस के वरिष्ठ नेता इंद्रेश कुमार ने कहा, ‘भीख मांगना भी देश के 20 करोड़ लोगों का रोजगार है, जिन्हें किसी ने रोजगार नहीं दिया उनलोगों को धर्म में रोजगार मिलता है, जिस परिवार में पांच पैसे की कमाई भी न हो उस परिवार का दिव्यांग और दूसरे सदस्य धार्मिक स्थलों में भीख मांगकर परिवार का गुजारा करता है, ये छोटा काम नहीं है।” इंद्रेश कुमार 13 फरवरी को एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार ने पीएम के बहुचर्चित पकौड़ा वाले बयान पर भी अपनी राय रखी। आरएसएस नेता ने कहा कि पकौड़े तलना देश के 15 करोड़ से ज्यादा लोगों का व्यवसाय है, और इसे हीन काम नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पकौड़े बेचने को भी लोग हीन काम समझते हैं तो ये बेहद दुखद है।

इंद्रेश कुमार ने कहा कि आप अपने परिवार के साथ निकलते हैं और बाजार में पकौड़े के ठेले पर पकौड़ा खाकर खुश होते हैं, अगर इस काम को भी हीन समझा गया तो हिन्दुस्तान को का कुछ नहीं हो सकता है।बता दें कि पीएम मोदी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर कोई शख्स पकौड़ा बेचकर भी अपनी जिंदगी चलाता है तो यह भी एक किस्म का रोजगार है। कांग्रेस ने पीएम मोदी के इस बयान की पुरजोर आलोचना की थी।

इंद्रेश कुमार ने इस कार्यक्रम में कहा कि खेती भी एक बड़ा रोजगार है। इंद्रेश ने कहा कि आप कितने भी बड़े हो जाएं, खेती आप नहीं छोड़ सकते हैं, उन्होंने कहा कि यूनानी, रोमन और ग्रीक सभ्याताओं को खेती की हीन भावना की दृष्टि से देखने की कीमत चुकानी पड़ी। यहां के लोगों के सामने ऐसी स्थिति आ गई थी कि इन्हें जानवर खाना पड़ा। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने रोजगार के मोर्चे पर देश से किया गया वादा पूरा किया है और सत्ता में आने के बाद 2.17 करोड़ लोगों को रोजगार दिये हैं।

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