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14 साल की लड़की ने क‍िया अंगदान, मर कर भी तीन लोगों को दे गई जीवनदान

सड़क हादसे में मर कर भी 14 साल की अंजलि अमर हो गई। अब उसके लिवर और दो किडनियों से तीन लोगों को नई जिंदगी मिल गई। यह सब संभव हुआ है अंगदान से। अंजलि को देश की दूसरी सबसे कम उम्र की डोनर बताया जा रहा है।

Author नई दिल्ली | August 13, 2018 5:48 PM
इंदौर की 14 वर्षीय अंजलि तलरेजा की सड़क हादसे में मौत हो गई, मगर अपने अंगों से तीन लोगों को जीवनदान भी दे गईं।

सड़क हादसे में मर कर भी 14 साल की अंजलि अमर हो गई। अब उसके लिवर और दो किडनियों से तीन लोगों को नई जिंदगी मिल गई। यह सब संभव हुआ है अंगदान से। अंजलि को देश की दूसरी सबसे कम उम्र की डोनर बताया जा रहा है।दरअसल नौ अगस्त को इंदौर निवासी संतोष की बेटी अंजलि को हरदा में  गाड़ी ने ठोकर मार दी थी। इससे सिर में गंभीर चोटें आईं। पहले लोग स्थानीय अस्पताल और बाद में शैलबी हास्पिटल इलाज के लिए लेकर गए। शनिवार की रात डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया।

चिकित्सकों के मुताबिक अंजलि का रविवार(12 जुलाई) की रात 3.15 पर ही ब्रेन डेड हो गया। उधर खबर लगने पर अंगदान दान से जुड़े कुछ गैर सरकारी संगठनों के लोग अंजलि के माता-पिता से मिले और उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित किया। मुस्कान ग्रुप के वालंटियर जीतू बगानी ने कहा-आखिरकार परिवार के लोग बच्ची के अंगदान से तीन लोगों को जीवनदान के लिए सहर्ष तैयार हो गए। जिसके बाद अंजलि के लिवर को कोथराम हास्पिटल में वहीं इंदौर के सीएचएल और शैलबी हास्पिटल के दो अन्य मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट की गई। वहीं अंजलि की आंखें एमके इंटरनेशनल आई बैंक को दान कर दी गईं।

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लिवर-किडनी समय से पहुंचाने के लिए बना ग्रीन कॉरिडोरः इंदौर एक भी अंगदान के लिए ग्रीन कॉरिडोर का गवाह बना। शहर में 34 वीं बार ग्रीन कॉरिडोर बना। अंग खराब न हो और समय से मरीज तक पहुंचे, इसके लिए शैल्बी हास्पिटल से दो कॉरिडोर बनाए गए। लिवर के लिए सीएचएल हास्पिटल और किडनी के लिए चोइथराम अस्पताल तक ग्रीन कोरिडोर बनाया गया। जिससे एंबुलेस बिना जाम में फंसे संबंधित हास्पिटल तक अंग लेकर पहुंची और चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया।

भारत का सबसे कम उम्र का डोनर कौन? देश में सबसे कम उम्र में अंगदान करने का रिकॉर्ड पाकिस्तानी बच्चे रयान के नाम है। उसने आठ महीने की उम्र में ही अपनी दो साल चार महीने की बहन जीनिया को बोन मैरो दान कर यह रिकॉर्ड अपने नाम कायम किया। चिकित्सकों के मुताबिक जांच मे जीनिया का बोन मैरो केवल उसके भाई से ही मैच कर करा था। मगर अनोखे ट्रांसप्लांट के बाद भाई का बोन मैरो बहन को दान कर दिया गया।

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