MP: बाढ़ ने मचाई तबाही, सीएम शिवराज सिंह चौहान बोले- 70 सालों में नहीं देखी ऐसी स्थिति

चौहान ने सुबह पीएम मोदी से बात कर उन्हें बाढ़ की ताजा स्थिति और बचाव एवं राहत कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने उनको बुनियादी ढांचे, फसलों, बिजली और दूरसंचार नेटवर्क को हुए बड़े नुकसान और बुनियादी जरूरतों के बारे में बताया।

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बाढ़ग्रस्त इलाके से गुजरता बाइक सवार। (Photo- PTI)

मध्य प्रदेश में बाढ़ की वजह से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश में बाढ़ से हुई भयानक तबाही पर कहा कि पिछले 70 साल में ऐसी स्थिति नहीं देखी गई। ग्वालियर-चंबल इलाके में भारी बारिश और बाढ़ से दो लोगों की मौत हो गई और पुलों व अन्य बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है। राज्य सरकार के अनुसार बारिश के कारण शिवपुरी और श्योपुर जिलों में एक-एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है।

चौहान ने सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात कर उन्हें बाढ़ की ताजा स्थिति और बचाव एवं राहत कार्यों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बुनियादी ढांचे, फसलों, बिजली और दूरसंचार नेटवर्क को हुए बड़े नुकसान और बुनियादी जरुरतों के बारे में बताया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने स्थिति से निपटने के लिए राज्य को हर संभव मदद का भरोसा दिया है। चौहान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी राज्य में बाढ़ की स्थिति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने संकट के दौरान केंद्र की मध्यप्रदेश को लगातार मदद और समर्थन देने के लिए मोदी और शाह को धन्यवाद दिया। शाह ने मुख्यमंत्री से कहा कि राज्य में हुए नुकसान का आकलन करने के लिए केंद्र एक दल भेजेगा।

प्रदेश के राजस्व सचिव ज्ञानेश्वर बी पाटिल ने गुरुवार को पीटीआई-भाषा को बताया कि सात लोग घायल हुए हैं। इनमें गुना में चार, शिवपुरी में दो और मुरैना में एक व्यक्ति घायल हुआ है। उन्होंने कहा कि वे जिला कलेक्टरों की पुष्टि के बाद ही मौत के आंकड़े साझा करते हैं। मुख्यमंत्री चौहान ने बताया कि ग्वालियर-चंबल इलाके में भारी बारिश से रतनगढ़ मंदिर (दतिया) और संकुआ के पास पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इससे कई लोग वहां फंस गए हैं।

भोपाल में राज्य प्रशासन ने बताया कि मुख्यमंत्री ने सुबह ग्वालियर-चंबल संभागों (ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, अशोक नगर, दतिया, श्योपुर, मुरैना और भिंड जिलों) के आयुक्तों और पुलिस महानिरीक्षकों से बात कर बाढ़ की स्थिति और बचाव कार्यों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि बाढ़ प्रभावित भिंड जिले और शिवपुरी जिले के करैरा में लोगों को बचाने के लिए हवाई अभियान शुरू किया गया है।

एक अधिकारी ने चौहान के हवाले से कहा, “ग्वालियर-चंबल इलाके में भारी बारिश से तबाही हुई है। प्रदेश में पिछले 70 वर्षो में इतनी तबाही नहीं देखी है। रतनगढ़ माता मंदिर और संकुआ के पास के पुल क्षतिग्रस्त हो गए है और कई लोग इन क्षेत्रों में फंस गए हैं।” अधिकारियों ने बताया कि बुधवार रात को शिवपुरी जिले के काली पहाड़ी से 57 लोगों को बचाया गया तथा 35 और फंसे हुए लोगों को निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा शिवपुरी के टीला इलाके से 13 लोगों को बचाया गया। अधिकारी ने बताया कि कुछ बाढ़ प्रभावित इलाकों में खाने के पैकेट गिराने का काम भी शुरू किया गया है। श्योपुर में भोजन के पैकेट गिराने के लिए 13 जगहों की पहचान की गई है।

मुख्यमंत्री ने बाढ़ की स्थिति की समीक्षा के लिए आज यहां अपने आवास पर सुबह एक बैठक की। बैठक में प्रभावित इलाकों के अधिकारी वर्चुअल तौर पर शामिल हुए। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के भोपाल केंद्र के वरिष्ठ मौसम विज्ञानी पी के साहा ने कहा कि पिछले 24 घंटों में ग्वालियर-चंबल इलाके में बारिश की गतिविधि कम हुई है। गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे समाप्त हुए 24 घंटों में शिवपुरी और श्योपुर में क्रमश: 37 और 11 मिमी बारिश हुई।

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