Father Gave party to his son after failing to get good marks in high school exams - बेटे के 10वीं परीक्षा मेें फेल होने पर पिता ने दी भव्‍य पार्टी - Jansatta
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मध्य प्रदेश: 10वीं में फेल हुआ बेटा तो मनोबल बढ़ाने के ल‍िए प‍िता ने दी शानदार पार्टी

मध्‍य प्रदेश में एक सिविल कॉन्ट्रैक्टर का बेटा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में फेल हो गया था। इस मौके पर जश्न के हर तरीके का इंतजाम था। पटाखे फोड़े गए, मिठाईयां बांटी गईं और शामियाना लगाकर भोज का आयोजन भी करवाया गया।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

मध्‍य प्रदेश के सागर जिले मेें लोग उस वक्त दंग रह गए, जब एक सिविल कॉन्ट्रैक्टर ने बीते सोमवार (14 मई) को धूमधाम से पार्टी दी। पार्टी देना बड़ी बात नहीं है लेकिन पार्टी का मकसद जरूर रिवाज तोड़ने वाला था। दरअसल सिविल कॉन्ट्रैक्टर का बेटा 10वीं की बोर्ड परीक्षा में फेल हो गया था। इस मौके पर जश्न के हर तरीके का इंतजाम था। पटाखे फोड़े गए, मिठाईयां बांटी गईं और शामियाना लगाकर भोज का आयोजन भी करवाया गया।

सागर के शिवाजी वार्ड के निवासी सुरेन्द्र कुमार व्यास ने कहा,’इस तरीके से मैं अपने बेटे का उत्साह बढ़ाना चाहता हूं। वह परीक्षा में फेल हो गया है। कुछ बच्चे तनाव में आ जाते हैं जबकि कुछ अपनी जिन्दगी को ही खत्म करने की कोशिश करते हैं। मैं उन बच्चों को बताना चाहता हूं कि बोर्ड की परीक्षा आपकी जिन्दगी की आखिरी परीक्षा नहीं है। जिन्दगी में और भी बहुत कुछ आना बाकी है। मेरा बेटा अगले साल फिर से परीक्षा देगा।’ जबकि इस मौके पर सुरेन्द्र कुमार के बेटे आशु ने कहा,’मैं अपने पिता की तारीफ करता हूं। मैंने उनसे इस साल परीक्षा में मन लगाकर पढ़ने और बढ़िया नंबरों के साथ पास होकर दिखाने का वादा किया है।’ इस मौके पर आशु के दोस्त और पड़ोसी बड़ी संख्या में पार्टी में शामिल हुए।

मध्य प्रदेश में मध्य प्रदेश उच्चतर माध्यमिक बोर्ड के द्वारा 10वीं और 12वीं की परीक्षा के नतीजे बीते सोमवार (7 मई) को जारी किए गए थे। रिजल्ट जारी होने के कुछ ही देर बाद 7 बच्चों ने आत्महत्या कर ली थी। चार अन्य विद्यार्थियों ने भी परीक्षा में खराब अंक आने पर आत्महत्या की कोशिश की थी। भोपाल में एक लड़के और लड़की ने, सीहोर जिले में दो लड़कियों ने जबकि उज्जैन के एक लड़के ने आत्महत्या कर ली थी। ग्वालियर और दमोह जिलो से भी आत्महत्या की कोशिश की खबरें आईं थीं। देश में हर साल पढ़ाई के तनाव या फिर परीक्षा में खराब अंक आने के भय से बच्चे कई बार गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसे मौकों पर माता—पिता को बच्चों के साथ नरमी से पेश आना चाहिए और उनके आत्मविश्वास को टूटने से बचाने की कोशिश करनी चाहिए।

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