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किसानों ने सोशल मीडिया के जरिये शुरू किया आंदोलन : दूध, फल-सब्जियों की आपूर्ति रोकी

किसानों के विरोध प्रदर्शन से इंदौर की देवी अहिल्याबाई फल-सब्जी मंडी और संयोगितागंज अनाज मंडी समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश की प्रमुख मंडियों में कारोबार पर बुरा असर पड़ा।

Author June 1, 2017 19:37 pm
महाराष्ट्र के नासिक, सतारा और पुणे सहित कुछ हिस्सों में छिटपुट हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। (ANI/PTI)

अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलने पर नाराज किसानों ने पश्चिमी मध्य प्रदेश में गुरुवार (1 जून) से अपनी तरह के पहले आंदोलन की शुरूआत करते हुए अनाज, दूध और फल-सब्जियों की आपूर्ति रोक दी। इससे आम उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया के जरिये शुरू हुआ किसानों का आंदोलन 10 दिन तक चलेगा। प्रदर्शनकारी किसानों ने इंदौर और उज्जैन समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में दूध ले जा रहे वाहनों को रोका और दूध के कनस्तर सड़कों पर उलट दिये। उन्होंने अनाज, फल और सब्जियों की आपूर्ति कर रहे वाहनों को भी रोक लिया और इनमें लदा माल सड़क पर बिखेर दिया।

किसानों के विरोध प्रदर्शन से इंदौर की देवी अहिल्याबाई फल-सब्जी मंडी और संयोगितागंज अनाज मंडी समेत पश्चिमी मध्य प्रदेश की प्रमुख मंडियों में कारोबार पर बुरा असर पड़ा। किसानों ने मंडियों के भीतर कारोबारी प्रतिष्ठानों के सामने हंगामा भी किया।

किसानों के आंदोलन की अगुवाई कर रहे संगठनों में शामिल मध्यप्रदेश किसान सेना के सचिव जगदीश रावलिया ने से कहा, ‘‘हमने सोशल मीडिया पर इस आंदोलन का आह्वान किया था और इससे किसान अपने आप जुड़ते चले गये। प्रदेश की मंडियों में भाव इस तरह गिर गये हैं कि सोयाबीन, तुअर (अरहर) और प्याज उगाने वाले किसान अपनी खेती का लागत मूल्य भी नहीं निकाल पा रहे हैं।’’

उन्होंने दावा किया कि अब तक इस आंदोलन को इंदौर, उज्जैन, देवास, झाबुआ, नीमच और मंदसौर जिलों के किसानों का समर्थन मिल चुका है। किसान नेता ने कहा, ‘‘हम अपने आंदोलन के जरिये उस सरकार को संदेश देते हुए जमीनी हकीकत से रू-ब-रू कराना चाहते हैं, जो किसानों की आय दोगुनी करने के वादे करती है।’’

रावलिया ने कहा कि प्रदेश की मंडियों में सोयाबीन और तुअर सरकार के तय न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी कम में बिक रही है, लेकिन बाजार की ताकतों पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है। नतीजतन किसानों के लिये खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। उन्होंने मांग की कि सरकार को किसानों के हित में उचित कानून बनाकर इस बात का प्रावधान करना चाहिये कि कृषि जिंसें किसी भी हालत में एमएसपी से नीचे न बिकें।

महाराष्ट्र में भी किसानों का अनिश्चितकालीन हड़ताल
यही हाल महाराष्ट्र में भी देखने को मिला। यहां किसान अपनी मांगों को लेकर गुरुवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। किसान लंबे समय से अटके कर्जमाफी पैकेज सहित विभिन्न मांगों के लिए हड़ताल पर हैं। स्वाभिमानी सेतकरी संगठन के नेता और सांसद राजू शेट्टी ने कहा कि यदि यह हड़ताल कुछ दिनों तक रही तो मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, पुणे, नासिक, नागपुर और अन्य शहरों में दूध, ताजी सब्जियों, खाद्यान्नों और दैनिक इस्तेमाल की चीजों की कमी हो जाएगी।

हड़ताल कर रहे किसानों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की जाती वे कृषि संबंधी गतिविधियों से दूर रहेंगे। इस दौरान महाराष्ट्र के नासिक, सतारा और पुणे सहित कुछ हिस्सों में छिटपुट हिंसा की घटनाएं सामने आई हैं। गुस्साए किसानों ने दूध और सब्जियों की आपूर्ति ठपकर दी है। साथ ही दूध के दो टैंकरों का कई टन दूध बर्बाद कर दिया और सब्जियों, टमाटर, प्याज आदि की सप्लाई भी रोक दी।

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