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गाड़ी चोरी की 48 घंटे में नहीं दी सूचना तो भी इंश्योरेंस कंपनी को देना होगा क्लेम

शैलेंद्र ने इस मामले में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने कहा कि वाहन चोरी की सूचना देने में देरी करने पर उपभोक्ता को दोषी नहीं माना जा सकता है। एसडी अग्रवाल और डॉ. मोनिका की बेंच ने इंश्योरेंस कंपनी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतिकात्मक तौर पर।

वाहन चोरी का क्लेम करने में अगर आपको देर भी हो जाए तो भी बीमा कंपनियों को अब क्लेम देना होगा। उपभोक्ता प्रतितोषण आयोग ने इस संबंध में उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। आयोग की बेंच ने अपनी विशेष टिप्पणी में कहा है कि वाहन चोरी के मामले में उपभोक्ता अपना वाहन ढूंढने में लगा रहता है। इसलिए कई बार 48 घंटे तक उसके वाहन की ना तो एफआईआर हो पाती है और ना ही वह बीमा कंपनी को लिखित सूचना दे पाता है। ऐसे में उसके द्वारा बीमा कंपनियों से किया गया क्लेम खारिज नहीं हो सकता।

इस मामले में सुनाया फैसला: दरअसल मध्य प्रदेश के सागर जिले के रहने वाले शैलन्द्र यादव ने 17 सितंबर 2010 को एक महिंद्रा बोलेरो वाहन खरीदा था। ओरिएंटल इश्योरेंस कंपनी से वाहन का एक साल तक के लिए इंश्योरेंस भी कराया गया था। लेकिन 10 अक्टूबर की रात शैलेंद्र की गाड़ी चोरी हो गई। जिसके बाद शैलेंद्र ने थाने में एफआईआर दर्ज कराया। थाने में रिपोर्ट लिखवाने के बाद उन्होंने इंश्योरेंस कंपनी के पास क्लेम राशि के लिए आवेदन दिया। लेकिन उनके दावे को इंश्योरेंस कंपनी ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इंश्योरेंस नियम के अनुसार आवेदक को वाहन चोरी होने की सूचना 48 घंटे के अंदर देनी होती है लेकिन इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया है।

जिसके बाद शैलेंद्र ने इस मामले में उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने कहा कि वाहन चोरी की सूचना देने में देरी करने पर उपभोक्ता को दोषी नहीं माना जा सकता है। एसडी अग्रवाल और डॉ. मोनिका की बेंच ने इंश्योरेंस कंपनी की सभी दलीलों को खारिज कर दिया।

इतना ही नहीं बेंच बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह अपीलार्थी को बीमा राशि 59,5745 रुपये क्लेम फाइलिंग की तारीख से छह प्रतिशत ब्याज के साथ अदा करे। रकम अदा करने के लिए इंश्योरेंस कंपनी को आयोग ने दो महीने का वक्त दिया है। यहां आपको बता दें कि शैलेंद्र ने इससे पहले जिला अपभोक्ता फोरम दमोह में भी आवेदन दिया था, लेकिन फोरम ने बीमा कंपनी के तर्कों को मानते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी। अब उपभोक्ता आयोग ने फोरम के फैसले को भी पलट दिया है।

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