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कमलनाथ ने रोकी मीसाबंदियों की पेंशन, मंत्री बोले- कांग्रेसी भी जेल गए थे, उन्हें भी दे दें क्या?

मीसाबंदी पेंशन योजना के तहत 25 हजार रुपए महीना दिया जाता है। यह योजना साल 2008 में शिवराज सरकार ने शुरू की। शुरुआत में इस योजना के तहत 3 हजार रुपए महीना दिया जाता था।

Misabandi Pensionमध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ (फोटो सोर्स : Indian Express)

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने राज्य की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के एक और फैसले पर रोक लगा दी है। कमलनाथ सरकार ने मीसाबंदियों (आपातकाल में जेल गए) को दी जानी वाली पेंशन रोक दी है। सरकार ने इसे फिजूलखर्जी बताते हुए बंद कर दिया। इस मामले पर सरकार में कानून मंत्री पी सी शर्मा ने कहा कि कांग्रेसी भी जेल गए थे, उन्हें भी दे दें क्या? हालाकिं कमलनाथ के इस फैसले के बाद विवाद छिड़ गया है।

बीते दिनों शिवराज सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के वंदे मातरम गाने के नियम पर भी मुख्यमंत्री कमलनाथ ने रोक लगा दी थी। अब बीजेपी सरकार द्वारा 2008 में शुरू की गई मीसाबंदियों को पेंशन पर सीएम कलनाथ ने तत्काल रोक लगा दी है। सरकार द्वारा इस योजना पर रोक लगाने के फैसले के बाद कांग्रेस ने कहा था कि, ‘बीती सरकार में कुछ खास लोगों के लिए यह पेंशन योजना शुरू की गई थी। इस पर करोड़ों रुपयों की फिजूलखर्ची की गई। इस योजना का ऑडिट कराने की जरूरत है’।

अब इसी मसले पर राज्य के कानून मंत्री पीसी शर्मा का बयान आया है। शर्मा ने कहा, ‘मीसाबंदी जेल गए थे तो पेंशन मिल रही है, हम भी तो जेल गए थे। कांग्रेसियों को भी जेल जाने के लिए पेशन मिलनी चाहिए, दे दें क्या ‘? हालांकि कमलनाथ सरकार के इस फैसले पर विवाद भी छिड़ा विवाद बढ़ता ही जा रहा है। सरकार ने इस योजना की छानबीन के जांच के आदेश भी दे दिए हैं।

फैसले पर केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट किया था कि, ‘इंदिरा गांधी के ‘तीसरे बेटे’ ने उनकी पेंशन रोक दी, जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए आपातकाल के दौरान भारत के सबसे काले दिनों में की लड़ाई लड़ी।’ वहीं, लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने भी कमलनाथ सरकार के इस फैसले का विरोध किया।

शरद यादव ने कहा कि, राज्य में पूर्व की बीजेपी सरकार द्वारा दी जा रही मीसा पेंशन को बंद नहीं करनी चाहिए। हालांकि उन्होंने कहा कि, सरकार द्वारा लाभार्थियों की छानबीन करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि, वह खुद आपातकाल के दौरान 4 साल जेल में बंद रहे, लेकिन पेंशन का दावा नहीं किया।

बता दें कि, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में लगाए गए आपातकाल के दौरान मीसा कानून के तहत जेल भेजे गए आरएसएस के पदाधिकारियों व स्वयंसेवकों के लिए यह योजना शुरू की गई थी। मीसाबंदी पेंशन योजना के तहत 25 हजार रुपए महीना दिया जाता है। यह योजना साल 2008 में शिवराज सरकार द्वारा शुरू की गई थी। शुरुआत में इस योजना के तहत 3 हजार रुपए महीना दिया जाता था। लेकिन बढ़ते समय के साथ इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दिया गया।

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