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मध्यप्रदश: राज्यपाल का काफिला गुजरने के दौरान RTI कार्यकर्ता ने की आत्मदाह की कोशिश

पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) अंशुमान सिंह ने बताया कि मनोज का इलाज कर रहे डाक्टर के अनुसार वह पांच फीसदी झुलस गया है।
Author भोपाल | September 8, 2016 04:26 am
मनोज ने राजभवन के मुख्य द्वार के नजदीक अपने ऊपर केरोसिन डाल कर आत्मदाह करने की कोशिश की।

बहुचर्चित व्यापमं घोटाले में शामिल होने के आरोप के चलते मध्य प्रदेश के राज्यपाल रामनरेश यादव की गिरफ्तारी की मांग करते हुए आरटीआइ कार्यकर्ता ने बुधवार शाम यहां राजभवन के निकट आत्मदाह का प्रयास किया। मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद पर यादव ने पांच साल का कार्यकाल बुधवार को पूरा कर लिया है। इस बीच, गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली बुधवार शाम को यहां राजभवन पहुंच गए हैं। वह गुरुवार को यहां मध्य प्रदेश के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार लेंगे।

भोपाल के पुलिस महानिरीक्षक योगेश चौधरी ने बताया, ‘आरटीआइ कार्यकर्ता मनोज त्रिपाठी ने शाम को राजभवन के निकट स्वयं पर केरोसिन डाल कर आत्मदाह का प्रयास किया, लेकिन वहां तैनात हमारे जवानों ने उसे बचा लिया। त्रिपाठी मामूली तौर पर झुलस गया है।’ उन्होंने बताया, ‘मुझे मनोज के घायल होने या झुलसने के बारे में अधिक जानकारी नहीं है। इस मामले को एसपी (दक्षिण) अशुंमान सिंह व्यक्तिगत तौर पर देख रहे हैं।’ आइजी ने इसका खंडन किया कि मनोज ने यादव (89) के राजभवन से लखनऊ के लिए हवाई अड्डे जाते वक्त उनके काफिले के सामने आत्मदाह का प्रयास किया। मनोज को चिकित्सीय परीक्षण के लिए भेजा गया है।

पुलिस अधीक्षक (दक्षिण) अंशुमान सिंह ने बताया कि मनोज का इलाज कर रहे डाक्टर के अनुसार वह पांच फीसदी झुलस गया है। मनोज को गिरफ्तार कर लिया गया है और उसके खिलाफ आइपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि मनोज ने राजभवन के मुख्य द्वार के नजदीक अपने ऊपर केरोसिन डाल कर आत्मदाह करने की कोशिश की जब राज्यपाल रामनरेश यादव का काफिला राजभवन से हवाई अड्डे के लिए निकला ही था। उन्हें लखनऊ के लिए विमान पकड़ना था।
केंद्र की यूपीए सरकार द्वारा मध्य प्रदेश में राज्यपाल नियुक्त किए गए रामनरेश यादव पर वर्ष 2015 में बहुचर्चित व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) द्वारा आयोजित वनरक्षक भर्ती घोटाले में मिलीभगत के आरोप लगे थे। व्यापमं घोटाले की जांच कर रही मप्र विशेष कार्य बल ने राज्यपाल के खिलाफ भादंवि की धाराओं में धोखेबाजी की प्राथमिकी दर्ज की थी। यादव द्वारा इस प्राथमिकी को चुनौती देने पर मप्र हाई कोर्ट ने मई 2015 में इसे खारिज कर दिया था। मप्र हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति रोहित आर्य की युगलपीठ ने राज्यपाल को संवैधानिक अधिकारों के तहत प्राप्त छूट व विशेषाधिकार के कारण प्राथमिकी खारिज करने के आदेश दिए थे।

 

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