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कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पर्सनल बॉन्ड पर रिहा, मंदसौर जाते समय किए गए थे अरेस्ट

MP farmers agitation: इस दौरान कांग्रेस नेता ने कहा, "धारा 144 लगा है तो मैंने पुलिस को कहा है कि अकेला जाऊंगा। कौन रोक सकता है अगर एक इंसान अकेले जाना चाहता है?"

हिरासत में लिए गए सिंधिया। (ANI PHOTO)

मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में किसान आंदोलन में पिछले हफ्ते 6 किसान पुलिस फायरिंग में मारे गए थे। मंगलवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री और गुना से कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मंदसौर पीड़ित परिवार से मिलने आ रहे थे। उस समय पुलिस ने उन्हेें गिरफ्तार कर लिया था। शाम को पर्सनल बॉन्ड पर उन्हें रिहा कर दिया गया है। मंदसौर आते वक्त पुलिस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को गिऱफ्तार कर लिया था। सिंधिया के खिलाफ धारा 151 में कार्रवाई की गई थी। सिंधिया को समर्थकों के साथ मंदसौर में प्रवेश करने से पहले ढोढर में पुलिस ने रोका था। इस दौरान कांग्रेस नेता ने कहा, “धारा 144 लगा है तो मैंने पुलिस को कहा है कि अकेला जाऊंगा। कौन रोक सकता है अगर एक इंसान अकेले जाना चाहता है?” सिंधिया से पहले पुलिस ने हार्दिक पटेल को हिरासत में लिया था।

बता दें कि मध्य प्रदेश में किसान आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में मंदसौर में 5 किसान मारे गए थे। जिसके बाद किसान उग्र हो गए थे। किसानों ने विरोध में 100 से ज्यादा गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था। यही नहीं एक पुलिस थाने को भी फूंक दिया था। बाद में एक और घायल किसान की मौत हो गई थी। जिसके बाद राजनीतिक दलों के आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया था। सिंधिया के अलावा गुजरात के पाटीदार आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल भी पीड़ित परिवार से मिलने मंगलवार को मंदसौर जा रहे थे। हालांकि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया।

शिवराज बुधवार को मंदसौर जाएंगे
किसान आंदोलन के दौरान पुलिस गोलीबारी में मारे गए किसानों के परिजनों से मुलाकात करने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बुधवार को मंदसौर जाएंगे। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री बुधवार को मंदसौर जाएंगे। वह इस दौरान पीड़ित परिवारों और किसान नेताओं से मिल सकते हैं। राज्य में 10 दिन तक चले किसान आंदोलन में हुई हिंसा के दौरान मंदसौर में पुलिस की गोलीबारी से छह किसानों की मौत हो गई थी। इस हिंसा से व्यथित होकर मुख्यमंत्री चौहान भेल दशहरा मैदान में अनिश्चितकालीन उपवास पर भी बैठे थे लेकिन किसानों और पार्टी नेताओं के आग्रह पर उन्होने उपवास तोड़ दिया था।

 

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