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मध्य प्रदेश: बछड़े की मौत पर प्रायश्चित के लिए पंचायत ने सुनाई सजा- गंगा नहाओ, भोज करो, बेटी की शादी कराओ; खामोश रही सरकार

तीन साल पहले जगदीश बंजारा ने अपने खेत में चर रहे बछड़े को पत्थर मारा था और बछड़े की मौत हो गई थी। घटना के बाद गांववालों ने जगदीश और उसके पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया।
Author भोपाल | April 29, 2017 16:03 pm
बछड़े की मौत पर प्रायश्चित के लिए पंचायत ने सुनाई सजा। (Representative Image)

मध्य प्रदेश के गुना जिले के तहरपुर गांव में रहने वाले एक शख्स को पंचायत के तुगलकी फरमान का सामना करना पड़ रहा है। यहां एक शख्स को बछड़े की मौत पर सजा सुनाई गई। पंचायत की ओर से जगदीश बंजारा (35) नाम के शख्स को बछड़ा मारने की वजह से गंगा नहाने, भोज कराने और अपनी 5 साल की बेटी की शादी करवाने का फरमाने सुनाया है ताकि वह बछड़े को मारने के ‘पाप’ का प्रायश्चित कर सके। पीड़ित और उसकी पत्नी गीताबाई ने सभी शर्तों को पूरा करने के साथ ही कुछ महीने पहले बेटी की शादी भी तय कर दी। बच्ची को शादी रोकने के लिए उसे अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

पंचायत के फैसले के बाद पीड़ित की बेटी की शादी शनिवार को अक्षय तृतीया के दिन आयोजित की गई थी। हैरानी वाली बात यह है जिला प्रशासन द्वारा इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। पंचायत के इस आदेश के बाद बच्ची की मां गीताबाई ने पुलिस से संपर्क किया तो जगदीश (पति) से 20,000 रुपये के बांड पर हस्ताक्षर कराया गया और शर्ती रखी गई कि इसके उल्लंघन पर उन्हें जेल जाना होगा।

महिला सशक्तिकरण अधिकारी अतिराज सिंह सेंगर ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा, “बच्ची के परिवार और गांव पर नजर रखी जा रहा है। गांववालों ने परिवार पर दबाव डालकर शादी के लिए मजबूर किया।” जिसके बाद हम उन्हें वहां से ले आए और बच्ची को चैकअप के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। तीनों को रेस्ट हाउस में रखा जाएगा और कुछ दिन बाद वापस गांव ले जाया जाएगा। पीड़ित परिवार से अक्सर मिलने वाली आगंनबाड़ी कार्यकत्री भागबाई ने बताया कि गीताबाई के पुलिस में जाने के बाद पूरे गांव ने उनका बहिष्कार कर दिया। स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने जगदीश पर बेटी की शादी के लिए कोई दबाव नहीं डाला है बल्कि परिवार में किसी भी महिला सदस्य का विवाह पर्याप्त होगा।

क्या है मामला?
तीन साल पहले जगदीश बंजारा ने अपने खेत में चर रहे बछड़े को पत्थर मारा था और बछड़े की मौत हो गई थी। घटना के बाद गांववालों ने जगदीश और उसके पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। साथ ही, पंचायत को लगने लगा कि बछड़े की मौत की वजह से गांव में कुछ भी शुभ नहीं हो रहा है। गांव में सब शुभ होने लगे, इसलिए पंचायत ने पहले जगदीश को गंगा नहाने और खाना बांटने को कहा। इसके बाद पंचायत ने सजा के नाम पर जगदीश को अपनी 5 साल की बच्ची की शादी का फरमान सुनाया।

 

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