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मध्य प्रदेश: कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्‍त पद्मा शुक्‍ला का इस्‍तीफा, भाजपा की प्राथमिक सदस्‍यता भी छोड़ी

सोमवार (24 सितंबर) सुबह उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी। स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह आज कांग्रेस में शामिल होंगीं।

पद्मा शुक्ला, प्रदेश के समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष थीं। (फोटोः ANI)

मध्य प्रदेश में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त पद्मा शुक्ला ने एमपी समाज कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। सोमवार (24 सितंबर) सुबह उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्राथमिक सदस्यता भी छोड़ दी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो वह आज कांग्रेस पार्टी में शामिल होंगीं। वह इसी संबंध में एमपी कांग्रेस के मुखिया कमलनाथ से छिंदवाड़ा में मुलाकात करेंगी।

पद्मा का इस्तीफा तब आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रदेश के दौरे पर आने वाले हैं। उनके इस फैसले से बीजेपी में खलबली मच गई है। पार्टी के शीर्ष नेता उनके इस कदम पर मौन धारण किए हैं। उनके त्याग पत्र से कुछ हद तक इस्तीफे का कारण स्पष्ट है। उन्होंने लिखा है, “मैं साल 1980 से बीजेपी की प्राथमिक सदस्य रही हूं। वर्ष 2014 के उपचुनाव के बाद उपेक्षा और प्रताड़ना से क्षुब्ध होकर मैं इस्तीफा दे रही हूं।”

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मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि बीजेपी से खफा पद्मा लगातार कांग्रेस के नेताओं के संपर्क में हैं। हालांकि, खुद उन्होंने इस मसले पर अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। लेकिन अटकलें उनके कांग्रेस में शामिल होने की ही लगाई जा रही हैं।

पद्मा, वर्ष 2013 के चुनाव में विजयराघवगढ़ विस से बीजेपी उम्मीदवार थीं।यह भी कहा जा रहा है कि कटनी में संजय पाठक के विरोध के चलते उनका इस्तीफा आया है। कांग्रेस की ओर से पिछली बार पाठक ही चुनावी मैदान में उनके सामने थे, जिनसे वह 935 मतों से हार गई थीं।

वहीं, पाठक साल 2008 और 2013 विस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार थे। 2013 के चुनाव में हासिल हुई जीत के बाद वह बीजेपी में शामिल हो गए थे। मौजूदा समय में वह सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के राज्य मंत्री हैं।

आपको बता दें कि इस साल के अंत तक चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। मध्य प्रदेश भी उन्हीं राज्यों में से एक है। ऐसे में 15 सालों से यहां पर काबिज बीजेपी के लिए चुनाव से कुछ महीनों पहले कबीना मंत्री दर्जे की महिला नेत्री का इस्तीफा किसी झटके से कम नहीं है।

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