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मध्य प्रदेश: 11 दिन से आमरण अनशन कर रहीं मेधा पाटकर को पुलिस ने जबरी हटाया

मेधा पाटकर नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास की मांग को लेकर 27 जुलाई से आमरण अनशन पर हैं।
Author August 7, 2017 21:05 pm

सोमवार (सात अगस्त) को मध्य प्रदेश के धार जिले के चिखाल्दा गांव में 11 दिनों से आमरण अनशन कर रही सामाजिक कार्यकर्ता को पुलिस ने धरनास्थल से जबरन हटा दिया है। नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर पिछले कई दिनों से सेहत खराब होते जाने के बावजूद मेडिकल चेकअप नहीं करा रही थीं। गांव के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है। जिला प्रशासन ने मेधा पाटकर को अनशन स्थल से हटाने से पहले ही मौके पर भारी पुलिस बंदोबस्त कर लिया था। कुछ मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने अनशनकारियों पर लाठीचार्ज भी किया है।

मेधा पाटकर नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के कारण विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास की मांग को लेकर 27 जुलाई से आमरण अनशन पर हैं। दो दिन पहले राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मेधा पाटकर से अनशन समाप्त करने की अपील की थी। केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने भी पाटकर से अनशन समाप्त करने की अपील की थी।

मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आंदोलन (एनबीए) का प्रमुख चेहरा रही हैं। एनबीए सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई बढ़ाने और प्रभावितों के पुनर्वास को लेकर दशकों तक आंदोलनरत रहा लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं मानी थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं के विरोध के बावजूद सरदार सरोवर की ऊंचाई बढ़ा दी गई थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि सरदार सरोवर बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले ग्रामीणों का अभी तक पूरी तरह पुनर्वास नहीं हुआ है।

राज्य सरकार ने शनिवार (पांच अगस्त) को एक प्रतिनिधि मंडल प्रदर्शनकारियों से मिलने के लिए भेजा था। दोनों पक्षों के बीच करीब पांच घंटे तक बातचीत हुई लेकिन आपसी सहमति नहीं बन सकी। मेधा पाटकर और उनके साथी चाहते हैं कि बांधा का गेट खुला रखा जाए जबकि सरकार ने इसमें असमर्थता जाहिर की है। जदयू नेता और राज्य सभा सांसद शरद यादव ने मेधा पाटकर से अनशन समाप्त करने की अपील की है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभी तक मेधा पाटकर और उनके साथियों की मांगों पर सीधे कोई बयान नहीं दिया है।

मध्य प्रदेश सरकार कुछ महीने पहले तब भी आलोचनाओं से घिर गई थी जब न्यूनतम समर्थन मूल्य और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों पर पुलिस ने गोली चला दी थी जिसमें कई किसान मारे गए थे। पुलिस की गोलीबारी के बाद किसान उग्र हो गए और हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था। बाद में शिवराज सरकार ने किसानों की कई मांगें मानी उसके बाद ही आंदोलन शांत हुआ।

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