ताज़ा खबर
 

एक चौकीदार की 12 वर्षीय बेटी को बचाते हुए हो गई इस फुटबॉलर की मौत, देखें वीडियो

घटना मध्यप्रदेश के सतना जिले की है, जहां खिलाड़ी ने अपनी जान देकर एक बच्ची को मौत के मुंह से बाहर निकाला।

वह क्रिकेट और फुटबॉल के राज्य स्तरीय खिलाड़ी थे, इसके अलावा वह बच्चों को ट्रेनिंग भी दिया करते थे। (Photo Source: Youtube)

ऐसा नहीं है कि खिलाड़ी सिर्फ मेडल जीतकर ही देश की सेवा करता है, कई खिलाड़ी तो अपनी जान पर खेल जाते हैं। मध्य प्रदेश में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जब एक स्टेट लेवल के क्रिकेट और फुटबॉल प्लेयर ने एक बच्ची की जान बचाने के लिए खुद की जान गंवा दी। 42 साल के इस खिलाड़ी की मौत 12 वर्षीय बच्ची को इमारत के मलवे से बचाने के दौरान हुई। बताया जा रहा है जिस बच्ची को बचाया गया वह एक स्थानीय चौकीदार की बेटी थी।

जानकारी के मुताबिक यह दर्दनाक घटना मध्य प्रदेश में सतना जिले के मैहर इलाके की है। यहां बबलू मार्टिन नाम के इस खिलाड़ी ने अपनी जान देकर एक बच्ची को मौत के मुंह से बाहर निकाला। शनिवार को यहां हाउसिंग बोर्ड की तीन मंजिला इमारत धराशायी हो गई। इससे पहले की इमारत की चपेट में एक चौकीदार की 12 साल की बेटी प्रभा आती, मदद के लिए बबलू दौड़ पड़े। मैहर के स्टार प्लेयर बबलू मार्टिन की सतर्कता से लड़की की जान तो बच गई, मगर वह खुद मलबे की चपेट में आ गए।

इमारत के मलवे में फंसे फुटबॉलर बबलू गर्दन तक पानी, कीचड़ और मलबे में धंसे हुए थे। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि बबलू घंटो तक इस मलवे में फंसे रहे और लोगों को ताकते रहे। स्थानीय लोगों ने आसपास का मलबा हटाया और उन्हें निकालने की कोशिश की। सुबह करीब 10:30 बजे मलबे में फंसे बबलू को करीब एक घंटे बाद निकाल जा सका। हालांकि उन्हें तुंरत अस्पताल ले जाया गया जहां उनकी मृत्यु हो गई। बबलू क्रिकेट और फुटबॉल के राज्य स्तरीय खिलाड़ी थे, इसके अलावा वह बच्चों को ट्रेनिंग भी दिया करते थे।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 मध्‍य प्रदेश के पूर्व सीएम और भाजपा के वरिष्‍ठ नेता बाबूलाल गौर ने थामा कांग्रेस का झंडा
2 भोपाल: उर्दू अखबार बेचने पर बुकसेलर गिरफ्तार, एक लेख में छपी थी बजरंग दल के नेता की फोटो
3 8वीं के छात्र ने लिखी पीएम को चिट्ठी, पूछा- मोदी अंकल! मेरी पढ़ाई से ज्यादा जरूरी है आपकी रैली?