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मध्य प्रदेश में ई कॉमर्स कंपनियों पर प्रवेश कर लगाने की तैयारी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पांच जुलाई को मंत्रिपरिषद की बैठक में मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर संशोधन विधेयक 2016 को मंजूरी दी गई थी।

Author इंदौर | July 18, 2016 03:30 am
भारत ऑनलाइन कारोबार (इकॉमर्स) कंपनी Flipkart

आॅनलाइन खरीदारी से राजस्व के नुकसान की भरपाई के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने ई कॉमर्स कंपनियों को प्रवेश कर के दायरे में लाने के लिए कानून में संशोधन की तैयारी कर ली है। इस कदम से हालांकि प्रदेश सरकार का खजाना तो भरेगा। लेकिन उपभोक्ताओं के लिए आॅनलाइन खरीदारी महंगी हो जाएगी। प्रदेश के वित्त और वाणिज्य कर मंत्री जयंत मलैया ने रविवार को बताया कि विधानसभा के 18 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में संशोधन विधेयक पारित कर ई कॉमर्स कंपनियों को छह फीसद के प्रवेश कर के दायरे में लाया जाएगा।

ई कॉमर्स कंपनियों से खरीदे सामान पर प्रवेश कर लगाने से मौजूदा वित्तीय वर्ष में कम से कम 300 करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व हासिल होने की उम्मीद है। मलैया ने बताया, ‘ई कॉमर्स कंपनियों का कामकाज दिनोंदिन तेजी से बढ़ता जा रहा है। लेकिन इससे उन हजारों दुकानदारों का कारोबार घट रहा है, जो हमें दूसरे करों के साथ प्रवेश कर भी चुकाते हैं। लिहाजा हमने उपभोक्ता वस्तुओं के आॅनलाइन कारोबार को भी प्रवेश कर के दायरे में लाने का फैसला किया है, ताकि परंपरागत दुकानों और ई कॉमर्स कंपनियों से समान कर वसूली हो।’

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में पांच जुलाई को मंत्रिपरिषद की बैठक में मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर संशोधन विधेयक 2016 को मंजूरी दी गई थी। इस विधेयक में ई कॉमर्स के तहत खरीदी गई वस्तुओं पर छह फीसद की दर से प्रवेश कर लगाने का प्रावधान है। बहरहाल, ऐसे वक्त में जब ई कॉमर्स क्षेत्र में रोजाना नई कंपनियां उतर रही हैं, प्रदेश सरकार के लिए इस क्षेत्र की सभी फर्मों के कारोबार पर नजर रखना आसान नहीं होगा। इस सिलसिले में पूछे जाने पर मलैया ने जवाब दिया, ‘ई..कॉमर्स क्षेत्र की कंपनियों के कारोबार पर नजर रखने के लिए हमारे पास पर्याप्त सूचना तंत्र हंै। हम सूबे के ट्रांसपोर्टरों, कूरियर कंपनियों और संबंधित निजी गोदामों पर निगरानी रखेंगे।’ कांग्रेस आरोप लगाती रहती है कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल के दौरान सरकारी खजाने पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है।

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