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इंदौर: सिमी कार्यकर्ता ने कोर्ट में ही गवाह को दी ‘काट डालने की’ धमकी

इन सिमी कार्यकर्ताओं को इंदौर से 26 और 27 मार्च 2008 की दरम्यानी रात पिस्तौलों, कारतूसों और कथित भड़काऊ साहित्य के साथ गिरफ्तार किया गया था।

Author इंदौर | September 2, 2016 20:28 pm
(चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है)

देशद्रोह के मुकदमे की सुनवाई के दौरान शुक्रवार (2 अगस्त) को यहां विशेष अदालत में एक सिमी कार्यकर्ता ने अभियोजन पक्ष के गवाह को कथित तौर पर हाथ से इशारा कर जान से मार डालने की धमकी दी। सरकारी वकील विमल कुमार मिश्रा ने संवाददाताओं को बताया कि सिमी कार्यकर्ता अहमद बेग ने विशेष अपर सत्र न्यायाधीश बीके पालोदा की अदालत में गवाही देने वाले अतुल पाठक को हाथ से इशारा किया और कथित तौर पर ‘काट डालने की’ धमकी दी। मिश्रा ने कहा कि आठ अन्य सिमी कार्यकर्ताओं के साथ अदालत में मौजूद बेग ने यह कथित धमकी तब दी, जब पाठक अपना बयान दर्ज कराने के बाद न्यायालय कक्ष में बैठे थे। जब पाठक की मौखिक शिकायत पर अदालत ने सिमी कार्यकर्ता से जवाब तलब किया, तो वह कहने लगा कि अभियोजन का गवाह झूठ बोल रहा है।

सरकारी वकील ने बताया कि पाठक और अभियोजन के एक अन्य गवाह आशुतोष शर्मा ने अदालत में सिमी सरगना सफदर हुसैन नागौरी और प्रतिबंधित संगठन के दो प्रमुख कार्यकर्ताओं..कमरूद्दीन और आमिल परवेज की पहचान की। इन गवाहों ने अदालत को बताया कि दो अप्रैल 2008 को पुलिस की पूछताछ के दौरान तीनों ने उनके सामने बयान दिया था कि इंदौर जिले के मशहूर पर्यटन स्थल चोरल के पास एक फार्म हाउस में सिमी गुर्गों को बम बनाने, तैराकी, निशानेबाजी और घुड़सवारी का प्रशिक्षण दिया गया था और इस फार्महाउस में विस्फोटक पदार्थ व भड़काऊ पर्चे छिपा कर रखे गए हैं।

मिश्रा ने बताया कि तीनों सिमी कार्यकर्ताओं की निशानदेही पर पुलिस ने दो अप्रैल 2008 को ही इस फॉर्म हाउस से विस्फोटक पदार्थ और भड़काऊ पर्चे बरामद किए थे। देशद्रोह के मुकदमे की दिन भर चली सुनवाई के दौरान अहमद बेग, सफदर हुसैन नागौरी, आमिल परवेज और कमरूद्दीन के साथ शाहदुली, कामरान, अंसार और यासीन को भी अदालत में पेश किया गया था। मामले में जमानत पर छूटा सिमी कार्यकर्ता मुनरोज भी अदालत में हाजिर हुआ था।

सिमी कार्यकर्ताओं की पेशी के मद्देनजर दौरान जिला न्यायालय परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी। मुकदमे की सुनवाई के वक्त मीडिया कर्मियों को अदालत कक्ष में प्रवेश की मनाही थी। इन सिमी कार्यकर्ताओं को इंदौर से 26 और 27 मार्च 2008 की दरम्यानी रात पिस्तौलों, कारतूसों और कथित भड़काऊ साहित्य के साथ गिरफ्तार किया गया था। इनके खिलाफ विस्फोटक अधिनियम और गैर कानूनी गतिविधियां निरोधक अधिनियम की संबद्ध धाराओं के साथ भारतीय दंड विधान की धारा 122 (देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश), धारा 124-क (देशद्रोह) और धारा 153-ख (राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन और भाषण) के तहत मुकदमा चलाया जा रहा है।

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