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मंदिर से बच्ची चुराती महिला चढ़ी लोगों के हाथों, देह व्यापार के लिए चुराती थी बच्चियां

पुलिस को इनसे पूछताछ के बाद बेची गई सात बच्चियां मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलग अलग ठिकानों से बरामद हुई हैं।

Author January 3, 2017 7:15 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

मासूम बच्चियों को चुराने और फिर देह व्यापार के मकसद से उन्हें बेच देने वाला गैंग करीब चार साल तक ग्वालियर में काम करता रहा और पुलिस को भनक तक नहीं लगी। पिछली 29 दिसंबर को जब गैंग की मुखिया लक्ष्मी साईं बाबा मंदिर से बच्ची को चुराते हुए रंगे हाथ पकड़ी गई तब इस रैकट का खुलासा हुआ। बच्चियों को चुराने वाला ये गैंग ढाई से तीन साल की मासूम बच्चियों को चुराता था। फिर उन्हें खिला पिलाकर बड़ा करता था और मोटी रकम मिलने पर देह व्यापार के लिए बेच देता था। पुलिस ने गैंग के 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि 7 ऐसी बच्चियां बरामद हुई हैं, जिन्हें चुराने के बाद बेच दिया गया….।

ग्वालियर पुलिस की गिरफ्त में आई महिला की उम्र 50 साल के करीब है। गैंग में बाकी साथियों में खुद इसके दो बेटे हैं जबकि बाकी दो बिचौलिये भी इनके साथ मिलकर काम करते थे। गिरोह में सबसे अहम काम लक्ष्मी का था। लक्ष्मी पहले शहर के बस स्टैंड, स्टेशन या गरीब बस्तियों में जाकर उन बच्चियों को टारगेट करती थी। जिनके माता पिता या तो घर से बाहर रहते थे या किसी वजह से बच्ची घर या मोहल्ले में अकेली खेलती थी। एक बार बच्ची टारगेट पर आ जाने के बाद लक्ष्मी उनसे चॉकलेट या फल खिलाने के जरिए पहचान बनाती और फिर मौका लगते ही उन्हें चुरा लेती। एक बार बच्चा चोरी होने के बाद राजू और राजेश का काम शुरु होता था। राजू और राजेश लक्ष्मी के ही बेटे हैं। ये दोनों बच्चियों की परवरिश करते थे और तब तक खिलाते पिलाते थे जब तक की कोई ग्राहक इन्हें नहीं मिल जाता। मकसद यही होता था कि बच्चियों को इतना बडा कर लिया जाए कि देह व्यापार के लिहाज से मोटी रकम मिले…।

इसके बाद शुरु होता था राम मिलन और रामनाथ बघेल का काम। ये दोनों लक्ष्मी से बच्चियों को लेते थे और फिर उन्हें बेच देते थे। बच्चियों की कीमत लगाई जाती थी 30 से 40 हजार रुपए तक। पुलिस को इनसे पूछताछ के बाद बेची गई सात बच्चियां मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलग अलग ठिकानों से बरामद हुई हैं। पुलिस के मुताबिक ये गैंग शहर में करीब चार साल से काम कर रहा था और हैरानी की बात ये है कि कुछ बच्चियां तो इतनी कम उम्र में चुराई गईं कि वो आरोपियों को ही अपना रिश्तेदार समझती हैं। फिलहाल ग्वालियर पुलिस ने इस गैंग को 5 दिन के रिमांड पर लिया है। ताकि इनकी और काली करतूतों का पता लगाया जा सके।

एक मंदिर जहाँ पुलिस वाले होते हैं पुजारी

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