ताज़ा खबर
 

भोपाल गैस कांड: वॉरेन एंडरसन को देश से फरार कराने के मामले में सुनवाई पर लगी रोक

भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने से दो और तीन दिसंबर 1984 के बीच की रात को जहरीली गैस रिसने से कई हजारों लोगों की मौत हो गयी थी और लाखों लोग प्रभावित हुए थे।

Author भोपाल | February 28, 2017 7:21 PM
भोपाल गैस कांड की 32वीं बरसी के मौके पर गैस पीड़ितों ने यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, शिवराज सिंह चौहान और यूनियन कार्बाइड के पुतले जलाए। (PTI Photo/3 Dec, 2016)

विशेष अपर सत्र न्यायाधीश डीके पालीवाल की अदालत ने भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन अध्यक्ष वॉरेन एंडरसन को देश से कथित रूप से भगाने में मदद करने के मामले में भोपाल के तत्कालीन कलेक्टर मोती सिंह एवं पुलिस अधीक्षक स्वराज पुरी के खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में सुनवाई पर 24 अप्रैल तक रोक लगा दी है। न्यायाधीश पालीवाल की अदालत ने यह आदेश सोमवार (27 फरवरी) को मोती सिंह एवं स्वराज पुरी की ओर से उनके अधिवक्ताओं द्वारा मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी भूभास्कर यादव के फैसले के खिलाफ दायर की गई पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के बाद दिया।

अदालत ने कहा कि इस मामले में पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई चल रही है और इस पुनरीक्षण याचिका पर फैसला लेने की अंतिम तिथि 24 अप्रैल है। इसलिए मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में इस मामले में 24 अप्रैल तक सुनवाई नहीं हो सकती है। भोपाल गैस पीड़ितों के लिए काम कर रहे कार्यकर्ता अब्दुल जब्बार एवं अन्यों संगठनों ने एंडरसन को भोपाल से भगाने के मामले में मोती सिंह एवं स्वराज पुरी के खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में याचिका दायर की है। वर्ष 2013 में अमेरिका में एंडरसन की मौत हो गई थी। इन दोनों अधिकारियों के वकीलों ने पालीवाल की अदालत से मांग की थी कि पुनरीक्षण याचिका पर अंतिम फैसला आने तक मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में सुनवाई पर रोक लगाई जाये, जिसे अदालत ने मान लिया।

भोपाल गैसकांड त्रासदी: तत्कालीन कलेक्टर-एसपी के ख़िलाफ़ ज़मानती वारंट, वारेन एंडरसन को भगाने का आरोप

भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड कॉरपोरेशन के चैयरमेन वारेन एंडरसन को भोपाल से फरार कराने के आरोप में तत्कालीन भोपाल कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के खिलाफ सोमवार (6 फरवरी) को एक स्थानीय अदालत ने जमानती वारंट जारी किया। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) भू भास्कर ने तत्कालीन भोपाल कलेक्टर मोती सिंह और पुलिस अधीक्षक स्वराजपुरी को इस मामले में कई समन के बावजूद अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण आज (सोमवार, 6 फरवरी) दोनों के खिलाफ जमानती वारंट जारी किये गये। सीजेएम ने निर्देश दिया कि दोनों को जमानती वारंट भोपाल एसपी के जरिये तामिल कराया जाये। मामले में 13 जनवरी को पिछली सुनवाई के दौरान भी कई समन के बावजूद दोनों आरोपी अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे।

वर्तमान में बंद पड़ी भोपाल यूनियन कार्बाइड फैक्टरी से दो-तीन दिसंबर 1984 की मध्य रात्रि में जहरीली गैस निकलने के चार दिन बाद एंडरसन अमेरिका से मुंबई होते हुए मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल आया था, लेकिन कुछ घंटों के लिए गिरफ्तार किए जाने के बाद उसे कथित रूप से रिहा कर दिया गया था। इसके बाद इस मामले में मुख्य आरोपी एंडरसन कभी भोपाल की अदालत में पेश नहीं हुआ और बाद में अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया। एंडरसन की वर्ष 2013 में अमेरिका में मौत हो गयी।

मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) भूभास्कर यादव ने 19 नवंबर 2016 को अपने आदेश में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मोती सिंह एवं सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी स्वराज पुरी के खिलाफ भादंवि की धारा 212, 217 एवं 221 के तहत मामला दर्ज करने के निर्देश दिये थे। भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन के अब्दुल जब्बार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत सिंह एवं पुरी दोनों को अदालत में हाजिर होने के लिए कई नोटिस जारी कर चुकी है। मालूम हो कि भोपाल के यूनियन कार्बाइड कारखाने से दो और तीन दिसंबर 1984 के बीच की रात को जहरीली गैस रिसने से कई हजारों लोगों की मौत हो गयी थी और लाखों लोग प्रभावित हुए थे।

यौन शोषण की शिकायत के चलते उबर ने टॉप एग्जीक्यूटिव अमित सिंघल को नौकरी से निकाला

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App