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मोदी आज अमरकंटक में थे, यहां जो भी गया आने के बाद अपनी कुर्सी नहीं बचा पाया

अमरकंटक के बारे में मिथक है कि नर्मदा के उद्गम स्थल के आठ किमी के दायरे में जो भी हेलिकॉप्टर से आया, उसने सत्ता गंवाई है।

नमामि देवी नर्वदे सेवा यात्रा के समापन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक गए थे। (Photo: PTI)

नमामि देवी नर्वदे सेवा यात्रा के समापन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार (15 मई) को मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक पहुंचे। कहा जाता ही कि इस स्थान से जुड़ी अपनी कुछ कहानियां हैं। कहते हैं जो भी नेता यहां गया उसको अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। वहीं अमरकंटक के बारे में मिथक है कि नर्मदा के उद्गम स्थल के आठ किमी के दायरे में जो भी हेलिकॉप्टर से आया, उसने सत्ता गंवाई। इलाके में चर्चा है कि इसी मिथक के चलते पीएम मोदी के लिए डिंडोरी जिले में अमरकंटक से आठ किलोमीटर की दूरी पर हेलिपैड बनाया गया।

इन्हें गंवानी पड़ी सत्ता
1. पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी 1982 में अमरकंटक गई थीं। उसके बाद 1984 में उनकी हत्या कर दी गई।
2. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सुंदरलाल पटवा बाबरी मस्जिद विध्वंस से पहले अमरकंटक गए थे, लेकिन उसके बाद उन्हें भी कुर्सी गंवानी पड़ी।
3. एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री रहते हुए अमरकंटक गए थे, लेकिन उसके बाद उन्हें कांग्रेस पार्टी से अलग होकर नई पार्टी बनानी पड़ी।
4. मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती सीएम रहते हुए 2004 में अमरकंटक गई थीं। उसके बाद इन्हें भी कुर्सी गंवानी पड़ी। इसके बाद उमा भारती हमेशा सड़क मार्ग से अमरकंटक जाती हैं।
5. पूर्व उप राष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत राष्ट्रपति चुनाव से पहले अमरकंटक गए थे, लेकिन उसके बाद उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी।

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जो भी नेता आज तक हेलिकॉप्टर से अमरकंटक गए लगभग सभी को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी है। यह उदाहरण सामने आने के बाद नेताओं ने हेलिकॉप्टर से यात्रा करने से परहेज़ किया। राजनैतिक हलकों की चर्चा की मानें तो केवल अमरकंटक ही अकेला ऐसा स्थान नहीं है जहां जाने के बाद नेताओं को कुर्सी गंवानी पड़ी है। यूपी के नोएडा का हाल भी कुछ ऐसा ही है। यूपी के कई मख्यमंत्री नोएडा की यात्रा के तुरंत बाद अपनी कुर्सी खो चुके हैं। इनमें वीर बहादुर सिंह, नारायण दत्त तिवारी, कल्याण सिंह और मायावती शामिल हैं। जो नोएडा की यात्रा के तुरंत बाद अपनी कुर्सियां ​​खो चुके हैं।

1988 में पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह को नोएडा यात्रा के कुछ दिन बाद ही कुर्सी गंवानी पड़ी थी। इसके बाद 1989 में एनडी तिवारी को भी कुर्सी गंवानी पड़ी। 1995 में नोएडा आने के बाद मुलायम सिंह को भी सत्ता से हाथ धोना पड़ा था। 1997 में मायावती को नोएडा यात्रा के बाद अपनी कुर्सी से हाथ धोना पड़ा था। 1999 में कल्याण सिंह के साथ भी ऐसा ही हुआ। 2012 के यूपी विधानसभा चुनाव में भी मायावती को सत्ता गंवानी पड़ी थी। वह दलित प्रेरणा स्थल के उद्घाटन के लिए 2011 में नोएडा आई थीं।

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