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मध्य प्रदेशः श्‍मशान में जगह नहीं, सड़क पर हुआ महिला का अंतिम संस्‍कार

श्मशान घाट की जमीन पर अव्यवस्थाओं के अंबार क्यों लगा है? यह सवाल गांव की सरपंच कल्याणी बाई से जब किया गया, तो उन्होंने बताया, "यहां बनवारी और हरिलाल धाकड़ का कब्जा था।"

तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फाइल फोटो)

मध्य प्रदेश के गुना में अव्यवस्था के चलते एक महिला का अंतिम संस्कार लोगों को सड़क पर ही करना पड़ा। यहीं उसकी चिता बनाई गई और फिर मुखाग्नि दे दी गई। इतना ही नहीं, इसी जगह तीसरे दिन (अंतिम संस्कार के बाद) उसका उठावना होगा। यह सब सड़क पर इसलिए हुआ यहां के श्मशान घाट में जरूरी जगह नहीं है। चारों ओर कीचड़, मैला पानी और गंदगी भरी पड़ी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला यहां के जैतपुरा गांव का है। गुलाब बाई नाम की महिला का यहां निधन हुआ था। बताया जाता है कि श्मशान घाट में आधा-अधूरा चबूतरा बना है, जबकि यहां टिनशेड का बंदोबस्त नहीं है। मृतका के परिजन ने उसका अंतिम संस्कार श्मशान घाट पर करने के बजाय सड़क पर करने का फैसला ले लिया।

लोगों ने मिलकर सड़क पर पहले गुलाब बाई की चिता बनाई, जिसके बाद पूरे विधि-विधान से उनका अंतिम संस्कार किया गया। परिजन के अलावा उस दौरान गांव के अन्य लोग भी उपस्थित रहे थे।

श्मशान घाट की जमीन पर अव्यवस्थाओं के अंबार क्यों लगा है? यह सवाल गांव की सरपंच कल्याणी बाई से किया गया। उन्होंने ‘दैनिक भास्कर’ को बताया, “श्मशान की जमीन पर बनवारी और हरिलाल धाकड़ का कब्जा था। श्मशान की जमीन इसी वजह से बदहाली की स्थिति से जूझ रही है। कब्जा हटाने के बाद जरूरी व्यवस्थाएं नहीं हो पाई हैं। ऐसे में लोगों को मुसीबत उठानी पड़ती है। मैं यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में लाऊंगी।”

हाल ही में ओडिशा के रेंगाली इलाके में बीजू जनता दल (बीजद) के एक विधायक ने मानवता की नजीर पेश की थी। उन्होंने न केवल भिखारी महिला के शव को न सिर्फ कंधा दिया, बल्कि पूरे विधि-विधान से उसका अंतिम संस्कार कराया था। महिला की मौत के बाद कोई भी उसका अंतिम संस्कार करने को राजी न था, जिसके बाद विधायक को इस बारे में सूचना मिली। विधायक उस घटना के बाद बोले थे, “मैंने यह काम मानवता और लोगों की सेवा की दृष्टि से किया।”

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