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मध्य प्रदेश: वार्डन को पैसा देने के लिए अपना खून बेच रही थीं नाबालिग आदिवासी लड़कियां

मध्य प्रदेश में दो नाबालिग आदिवासी लड़कियों द्वारा पैसों के लिए अपना खून बेचने की कोशिश का मामला सामने आया है।

चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।

मध्य प्रदेश में दो नाबालिग आदिवासी लड़कियों द्वारा पैसों के लिए अपना खून बेचने की कोशिश का मामला सामने आया है। वेबसाइट डेक्कन क्रॉनिकल की खबर के मुताबिक मध्य प्रदेश जिले में बीते मगंलवार (28 फरवरी) को दो आदिवासी नाबालिग लडकियों ने वार्डन को पैसे देने के लिए अपना खून बेचने की कोशिश की। खबर के मुताबिक दोनों लड़कियां जबलपुर जिले के आदिवादी रेजिडेंशियल स्कूल में रहती हैं जहां के वार्डन बेदी ठाकुर ने उनसे कथित रूप से पैसों की मांग की। इस मामले का संज्ञान मिलते है आरोपी वार्डन को पद से हटा दिया गया है। वहीं इस मामले को लेकर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आयोगा(मध्य प्रदेश) के एसिस्टेंट कमिश्नर एस पी जैन ने खुद मामले का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

गौरतलब है कि राज्य में पहले भी कई बार आदिवासियों के साथ भेदभाव या हिंसा-बलात्कार जैसे कई मामले सामने आ चुके हैं। बीते साल दिसंबर महीने में एक आदिवासी महिला को 6 घंटे तक बंधक बनाकर गैंगरेप का मामला सामने आया था। इसके अलावा फरवरी 2017 में जिले के एक आदिवासी नेता ने मध्यप्रदेश सरकार पर ‘मुख्यमंत्री कन्यादान योजना’ के तहत आदिवासी रीति के बजाए हिन्दू रीति रिवाजों के साथ सामूहिक विवाह कार्यक्रम कराए जाने की बात कही थी और विरोध किया था। पेशे से डॉक्टर और आदिवासी नेता धनेश्वर नाग ने कहा था कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत सामुहिक विवाह कार्यक्रम हिन्दू रीति रिवाजों के अनुसार किया जा रहा है, जबकि आदिवासी समुदाय के रीति रिवाज अलग होते हैं।

नवंबर 2016 में ही नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स की 2015 की रिपोर्ट सामने आई थी। रिपोर्ट के मुताबिक देशभर की जेल में बंद कैदियों में से 55 प्रतिशत अंडरट्रायल कैदी मुस्लिम, दलित या फिर आदिवासी हैं। दलित, मुस्लिम और आदिवासी की जनसंख्या कुल मिलाकर देश की 39 प्रतिशत होती है। 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक, देश की 8.6 प्रतिशत आबादी आदिवासी (एसटी) लोगों की है। वहीं तीनों समुदायों के कैदियों में अंडरट्रायल कैदी ज्यादा हैं और दोषी पाए गए कम। तीनों का कुल मिलाकर सारे कैदियों का 50.4 प्रतिशत होता है। एसटी में 12.4 प्रतिशत लोग दोषी करार हो चुके हैं जबकि अंडरट्रायल में उनका प्रतिशत सिर्फ 13.7 है।

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