मध्य प्रदेश में सरकारी चावल जो एथनॉल प्लांट में जानी थी वह बीच रास्ते से ही कहीं और भेज दी गई। इस मामले को लेकर अब पुलिस जांच में जुट गई है। एथनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने और आयातित फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एथनॉल बनाने वाली कंपनियों को अतिरिक्त अनाज सप्लाई करने की मंजूरी दी है।
राज्य सरकार यह जांच कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के खेप से जुड़ी है। जांच कर रहे अधिकारियों ने कहा कि यह चावल छिंदवाड़ा में उसे एथनॉल प्लांट तक कभी नहीं पहुंचा जहां इसे भेजा जाना था।
कहां पहुंचा सरकारी चावल?
इसके बजाय, अधिकारियों को यह चावल वारासिवनी की एक प्राइवेट राइल मिल में मिला। वहां आरोपी 2025-26 कस्टम मिलिंग प्रोग्राम के तहत चावल को रीसायकल करने और उसी स्कीम के तहत उसे दोबारा जमा करने के फिराक में थे।
पुलिस के मुताबिक, आरोप है कि एवीजे एग्रीको प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत प्रतिनिधि राहुल प्रताप की मंशा एफसीआई से मिले चावल को एक प्राइवेट राइस मिल में भेज जाने और छिंदवाड़ा एथनॉल प्लांट में एथनॉल बनाने के लिए सस्ता चावल खरीदने की थी, जिससे सरकार को सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान पहुंचा है।
पुलिस ने राहुल प्रताप के अलावा ट्रक ड्राइवर दुर्गेश शेंद्रे और संचेती राइस मिल के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। एग्रीको प्राइवेट लिमिटेड और संचेती राइल मिल ने इस मामले पर टिप्पणी के लिए किए गए कॉल और मैसेज का कोई जवाब नहीं दिया।
पिछले महीने दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया कि सरकारी चावल ले जा रहे ट्रक को मिल परिसर में इसलिए लाया गया था ताकि उसे कस्टम मिलिंग के तहत रीसायकल करके सीएमआर प्रोग्राम के तहत फिर से जमा किया जा सके।
कौन खरीद सकता है यह चावल?
ओपेन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत, सिर्फ वही एथनॉल डिस्टिलरी एफसीआई से चावल खरीद सकते हैं जो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के साथ रजिस्टर्ड हैं और जिनके पास एथनॉल सप्लाई का कॉन्ट्रैक्ट है। एथनॉल प्रोडक्शन के लिए सप्लाई किए जाने वाले चावल की मौजूदा रिजर्व कीमत 2330 रुपये प्रति क्विंटल हैं। यह कीमत चावल की खरीद, मिलिंग, ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज की सरकारी अनुमानित लागत से कम है, जो करीब 4100 रुपये प्रति क्विंटल है।
जांच अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं क्या कुछ एथनॉल ऑपरेटरों ने सब्सिडी (छूट) वाले सरकारी चावल को एथनॉल में बदलने के बजाय, उसे कथित तौर पर चावल मिल मालिकों को अधिक कीमतों पर बेच दिया। साथ ही वे यह जांच कर रहे कि क्या इसकी जगह सस्ते टूटे हुए चावल का इस्तेमाल किया गया, जो आम तौर पर एथनॉल बनाने में काम आता है और खुले बाजार में करीब 2100 रुपये प्रति क्विंटल के भाव मिल जाता है।
बालाघाट के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमने इस मामले की जांच के लिए एक एसआईटी टीम बनाई है। आरोपों की जांच की जा रही है।” जांच के तहत मिलिंग के लिए सप्लाई किए गए धान, स्टॉक के सत्यापन, राइस मिलों में बिजली की खपत, मजदूरों की तैनाती और कामकाज से जुड़े दूसरे पैमानों के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
जांच करने वालों को यह अंदेशा है कि सरकारी चावल खरीदने वाले राइस मिलर कथित तौर पर उसे नए बोरों में दोबारा पैक करते थे और अपने मिलिंग कॉन्ट्रैक्ट के तहत बने नए कस्टम मिल्स राइस (CMR) के तौर पर सरकारी गोदामों में वापस जमा कर देते थे।
अधिकारी राइस मिल में निरीक्षण करने पहुंचे
पुलिस के मुताबिक, जांच तब शुरू हुई जब अधिकारियों को जानकारी मिली कि एथनॉल प्लांट के लिए भेजा गया सरकारी चावल कथित तौर पर दूसरी जगह भेज दिया गया था। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और जूनियर सप्लाई अफसर ने वारासिवनी में संचेती राइस मिल का औचक निरीक्षण किया।
490 बोरे सरकारी चावल मिले
मिल के परिसर के अंदर, अधिकारियों को एक ट्रक मिला जिसमें 490 बोरों में 242.55 क्विंटल सरकारी चावल लदा हुआ था। जांच करने वाले अधिकारियों ने गौर किया कि गाड़ी परिसर में काफी अंदर खड़ी थी, जबकि मिल के सामने काफी खुली जगह और शेड मौजूद थे। इससे खेप की आवाजाही को लेकर शक पैदा हुआ।
निरीक्षण के दौरान, ट्रक ड्राइवर ने अधिकारियों को बताया कि चावल बालाघाट के नवेगांव में एफसीआई डिपो से लोड किया गया था और इसे छिंदवाड़ा के बारेगांव में एक एथनॉल प्लांट में ले जाया जाना था। उसके बयान के मुताबिक, डिपो से निकलते समय उसे गाड़ी या चावल की खेप से जुड़ा कोई भी दस्तावेज नहीं दिया गया था। चूंकि उसका घर पास ही था, इसलिए उसने जांच अधिकारी को बताया कि उसने रात भर रुकने और अगली सुबह सफर जारी रखने का फैसला किया था।
हालांकि, राइस मिल के मालिक ने बताया कि ट्रक का मालिक उन्हें जानता था और उसने बारिश की वजह से ट्रक को मिल के अंदर खड़ा किया था, ताकि उसे टिन शेड के नीचे रखा जा सके।
ड्राइवर और राइस मिल के मालिकों के बयानों में अंतर
एफआईआर में कहा गया, “ड्राइवर और राइस मिल के मालिकों के बयानों में अंतर हैं। ड्राइवर ने कहा कि वह घर चला गया था, जबकि मालिक ने कहा कि बारिश की वजह से ट्रक को खड़ा किया गया था।” इसमें यह भी बताया गया है कि ट्रक को पहले ही तिरपाल से ढका जा चुका था और यह उसी एथनॉल प्लांट के लिए एक साथ भेजे गए तीन कंसाइनमेंट में से एक था।
इसके बाद अधिकारियों ने ट्रक और उसमें लदे सामान को जब्त कर लिया और उन्हें वारासिवनी पुलिस को सौंप दिया।
जांच में नवेगांव के FCI डिपो मैनेजर के बयान को भी शामिल किया गया। जांचकर्ताओं के अनुसार, डिपो मैनेजर ने बताया कि चावल को सरकार की इथेनॉल योजना के तहत आधिकारिक तौर पर जारी किया गया था और इथेनॉल कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि को सौंप दिया गया था। FIR में डिपो मैनेजर के बयान का हवाला देते हुए कहा गया, “FCI डिपो से चावल निकलने के बाद, इसे इथेनॉल प्लांट तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी FCI की नहीं होती है।”
जांच में नवेगांव के एफसीआई डिपो मैनेजर के बयान को भी शामिल किया गया। जांचकर्ताओं के मुताबिक, डिपो मैनेजर ने कहा, “चावल को सरकार की एथनॉल योजना के तहत आधिकारिक तौर पर जारी किया गया था और एथनॉल कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि को सौंप दिया गया था। एफआईआर में डिपो मैनेजर के बयान का हवाला देते हुए कहा गया, एफसीआई डिपो से चावल निकलने के बाद, इसे एथनॉल प्लांट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एफसीआई की नहीं होती है।”
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