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मध्य प्रदेश: महापंचायत का फरमान, समुदाय से बाहर शादी करने वाली लड़कियां होंगी बेदखल, लगेगा 1.5 लाख का जुर्माना

महापंचायत के महासचिव गंगाराम ने कहा, 'सहरिया समुदाय की लड़कियों के गैर आदिवासी पुरुषों के साथ भाग जाने की घटनाएं बढ़ गई हैं। ऐसी घटनाएं उन गांवों में ज्यादा हुई हैं, जो शहरों के नजदीक हैं।'

पंचायत में अन्तरजातीय शादी करने पर डेढ़ लाख रुपए का जुर्माना भी लगाने का फैसला किया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मध्य प्रदेश का सुदूर श्योपुर जिला आदिवासी बहुल इलाका माना जाता है। यहां सहरिया आदिवासी समुदाय का दबदबा माना जाता है। यहां की 84 गांवों की महापंचायत ने फरमान जारी किया है कि समुदाय की महिलाएं जाति के बाहर शादी नहीं कर सकेंगी। जो भी इस कानून का उल्लंघन करेगा, उस पर 1.5 लाख रुपये का जुर्माना किया जाएगा। महापंचायत के मुताबिक, ऐसी महिलाओं को समाज से बहिष्कृत कर दिया जाएगा और उनके बच्चों को आदिवासी समुदाय में नहीं गिना जाएगा। दिलचस्प बात यह है कि मध्य प्रदेश अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना के तहत राज्य में जाति के बाहर शादी करने वालों को 2.5 लाख रुपये देने का भी प्रावधान है।

एक अंग्रेजी अखबार ने सहरिया आदिवासी समुदाय के सूत्रों के हवाले से यह खबर दी है। इसके मुताबिक, एक महिला पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया। इसके अलावा, जिस गांव में अंतरजातीय विवाह की घटना हुई, वहां के पंचायत को भी फटकार लगाई गई। महापंचायत के अध्यक्ष ने कहा कि यह फैसला समुदाय के लोगों की संपत्ति की हिफाजत के लिए लिया गया।

टीओआई में प्रकाशित खबर के मुताबिक, महापंचायत के अध्यक्ष टुंडाराम ने कहा, ‘बहुत सारे गैर आदिवासी लोग आदिवासी महिलाओं से शादी करते हैं और उनकी जमीन और बाकी संपत्ति हड़प लेते हैं।’ बता दें कि इस महापंचायत का आयोजन रविवार शाम सालापुरा गांव में हुआ था। महापंचायत के महासचिव गंगाराम ने कहा, ‘सहरिया समुदाय की लड़कियों के गैर आदिवासी पुरुषों के साथ भाग जाने की घटनाएं बढ़ गई हैं। ऐसी घटनाएं उन गांवों में ज्यादा हुई हैं, जो शहरों के नजदीक हैं।’ अंतरजातीय विवाह को लेकर कार्रवाई करते हुए गंगाराम ने सालापुरा के सहरिया पंचायत पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाने की सिफारिश की। उन्होंने बताया, ‘अंतरजातीय विवाह की बात सामने आने के बाद गांव की पंचायत ने महिला के परिवार से समझौते की कोशिशें कीं।’

उधर, इस मामले पर सूबे के आदिवासी कल्याण मंत्री ओमकार मरकम ने कहा, ‘यह एक सामाजिक तौर पर लिया गया निर्णय हो सकता है। लोग अपने धर्म और संस्कृति का पालन करने के लिए आजाद हैं।’ वहीं, जिला प्रशासन ने महापंचायत द्वारा ऐसा फैसला लिए जाने की जानकारी न होने की बात कही है।

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