मध्य प्रदेश के कई जिलों में तेज बारिश के कारण सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कई सरकारी स्कूलों का सड़क से संपर्क भी टूट गया है। ऐसे ही स्थिति भिंड में देखी गई। हालांकि यहां के दो सरकारी स्कूलों के शिक्षक चर्चा में हैं। दोनों बारिश के पानी से भरी नदी में ट्यूबों पर तैरते, चप्पू चलाते और ऊपर-नीचे होते हुए एक ई-अटेंडेंस ऐप को मात देने की कोशिश कर रहे हैं।
6 पुरुष शिक्षक उफनती बैसाली नदी को पार करते हुए इस मौसमी चुनौती भरे रास्ते से गुजरते हैं ताकि भिंड के बाबेड़ी क्षेत्र के नाद्रौली और सुमेर सिंह का पुरा गांवों में स्थित दो स्कूलों तक पहुंच सकें। एक शिक्षक का हवा से भरा टायर ट्यूब पर सवार एक वीडियो वायरल हो गया है, जो निवासियों के सामने आने वाले खतरों को उजागर करता है।
मानसून के दौरान 100 छात्रों नहीं पहुंच पाते स्कूल
शिक्षक तो उफनते पानी में किसी तरह स्कूल पहुंच जाते हैं, लेकिन मानसून के दौरान दोनों स्कूलों के 100 छात्रों में से कई छात्र नहीं पहुंच पाते। गांवों तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता बैसाली नदी पार करना है, जिस पर कोई पुल नहीं है और साल के बाकी समय में यह एक उथली, रेत से भरी छोटी नदी में बदल जाती है। मानसून मुसीबतों का सैलाब लेकर आता है। नदी उफान पर आ जाती है और खेतों में पानी भर जाता है, जिससे शिक्षकों को अपने रोज़ाना दोपहिया गाड़ी के सफर के बजाय ट्यूब पर तैरकर यात्रा करनी पड़ती है। मामला इसलिए ही गंभीर है क्योंकि यदि आप देर से पहुंचते हैं, तो जनवरी से जरूरी किए गए अटेंडेंस ऐप के कारण वेतन में कटौती हो सकती है।
एक शिक्षक ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए कहा, “हम पहले पानी उतरने का इंतज़ार करते थे। इसमें चार से पांच घंटे लगते थे और हम थोड़ा देर से आते थे। लेकिन अब ऐप कुछ भी नहीं समझता।” देरी के कारण वेतन कटौती से बचने के लिए पानी में यात्रा करने को मजबूर शिक्षकों ने चिंता व्यक्त की। शिक्षा विभाग का ई-अटेंडेंस अभियान उनकी सुरक्षा के प्रति उदासीनता को भी दर्शाता है।
जिला शिक्षा अधिकारियों ने क्या कहा?
समस्याओं के बारे में पूछे जाने पर जिला शिक्षा अधिकारियों ने दावा किया कि इस स्थिति पर पहले ध्यान नहीं दिया गया था। उन्होंने अब ई-अटेंडेंस सिस्टम में तकनीकी और व्यावहारिक सुधारों पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया है। शिक्षकों से आग्रह किया गया है कि वे मानसून के दौरान होने वाली अपनी परेशानियों को समिति के सामने स्पष्ट करें। उनकी मांगें हैं कि एक पुल या मौसमी रास्ते बनाए जाएं, या प्राकृतिक आपदाओं के कारण लॉग-इन में रुकावट आने पर ई-अटेंडेंस के समय में उचित छूट दी जाए।
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