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हमेशा कटार लेकर चलती हैं शिवराज की नई मंत्री उषा ठाकुर, बाइक चलाने के साथ ही काव्य पाठ में है रुचि

मध्यप्रदेश भाजपा में हिंदुत्व का चेहरा मानी जाने वालीं उषा ठाकुर तीन बार विधायक रह चुकी हैं। इससे पहले वह पार्षद का चुनाव जीत चुकी हैं।

Madhya Pradesh, CM Shivraj Singh Chouhan, Usha Thakurउषा ठाकुर के समर्थक उन्हें प्यार से ‘दीदी’ कह कर ही बुलाते हैं। (फोटोः एएनआई)

मध्यप्रदेश में 2 जुलाई को हुए कैबिनेट विस्तार में महू से विधायक ऊषा ठाकुर ने भी मंत्री पद की शपथ ली। मध्यप्रदेश भाजपा में हिंदुत्व का चेहरा मानी जाने वालीं उषा ठाकुर तीन बार विधायक रह चुकी हैं। इससे पहले वह पार्षद का चुनाव जीत चुकी हैं। इस बार उन्होंने अपना क्षेत्र बदलते हुए महू से चुनाव लड़ा था।

मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही उनके समर्थन उन्हें मंत्री बनाए जाने की मांग कर रहे थे। उनके समर्थक उन्हें प्यार से ‘दीदी’ कह कर ही बुलाते हैं। बता दें कि ऊषा ठाकुर की खास बात है कि वह हमेशा अपने साथ कृपाण लेकर चलती हैं। ऊषा को यह कृपाण भगत सिंह के परिवार से भेंट में मिली थी। भगत सिंह के परिवार ने 1990 में ऊषा को पार्षद बनने से पहले यह कृपाण दी थी।

वह इसे अपनी जिंदगी का बेहद खास क्षण मानती हैं। इस कृपाण से उनका खास लगाव है। यहीं वजह है कि वो हमेशा इसे अपने साथ लेकर चलती हैं। विधानसभा सत्र के दौरान भी यह कटार उनके साथ रहता है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा था कि कटार को अपने साथ रख कर वह खुद को बेहद सुरक्षित और ताकतवर महसूस करती हैं।

उन्हें बाइक चलाने का भी शौक है। ऊषा ठाकुर कुछ खास मौकों पर अपनी कावासाकी बाइक चलाती हैं। इतना ही नहीं, ऊषा ठाकुर को काव्य पाठ का भी शौक है। राजनीतिक करियर में ऊषा भाजपा युवा मोर्चा की प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य भी रह चुकी हैं। वह राष्ट्र सेविका समिति, सांस्कृतिक जागरण मंच, हिन्दू जागरण मंच एवं पहल समग्र क्रांति चेतना मंच से जुड़ी रहीं हैं।

एजुकेशन और इतिहास में मास्टर्स करने के साथ ही एमफिल भी कर चुकी हैं। वह दुर्गा वाहिनी की सक्रिय सदस्य भी रह चुकी हैं। धर्म और देश सेवा के लिए नहीं की शादीः एक इंटरव्यू के दौरान उषा ठाकुर ने बताया था कि बचपन से ही वह चाहती थी कि उनके परिवार का कोई सदस्य धर्म और देशसेवा के लिए अपना जीवन समर्पित करे। इस लिए उन्होंने शादी नहीं की।

ऊषा ठाकुर के माता और पिता दोनों ही शिक्षक थे। उनके पिता को गोसेवा का काफी शौक था। इसलिए नौकरी से रिटायर होने के बाद उन्होंने गोशाला खोली। उषा 2014 में गरबा समारोह में किसी भी मुस्लिम युवकों के प्रवेश नहीं करने संबंधी बयान के लिए चर्चा में आई थीं। वहीं, 2019 में उन्होंने नाथूराम गोडसे को देशभक्त भी बताया था।

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