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एमपी में ‘लव जिहाद’ के खिलाफ ‘धर्म स्वातंर्त्य विधेयक-2020’ को मंजूरी, डिटेल में जानिए कानून की बारीकियां

इस विधेयक को विधानसभा के आसन्न सत्र में पेश किया जाएगा और इसके पारित होते ही ‘धर्म स्वातंर्त्य कानून 1968’ समाप्त हो जाएगा।

Author नई दिल्ली | December 26, 2020 9:35 PM
Narottam Mishra national newsशिवराज सिंह सरकार में मंत्री नरोत्तम मिश्रा। (ANI)

‘लव जिहाद’ के खिलाफ सख्त कानून बनाने के लिए मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल ने शनिवार को ‘धर्म स्वातंर्त्य विधेयक-2020’ को मंजूरी दे दी। इस कानून में शादी तथा किसी अन्य कपटपूर्ण तरीके से किए गए धर्मांतण के मामले में अधिकतम 10 साल की कैद एवं एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मध्य प्रदेश के कानून एवं गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने यहां संवाददाताओं को इस संबंध में जानकारी दी और साथ में ट्वीट भी किया कि ‘धर्म स्वातंर्त्य विधेयक-2020’ को शनिवार को मंजूरी दे दी गई।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक को विधानसभा के आसन्न सत्र में पेश किया जाएगा और इसके पारित होते ही ‘धर्म स्वातंर्त्य कानून 1968’ समाप्त हो जाएगा। मिश्रा ने कहा, ‘‘इस विधेयक के कानून बनने पर कोई भी व्यक्ति दूसरे को प्रलोभन, धमकी एवं बलपूर्वक विवाह के नाम पर अथवा अन्य कपटपूर्ण तरीके से प्रत्यक्ष अथवा अन्यथा उसका धर्म परिवर्तन अथवा धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं कर सकेगा।’’ उन्होंने कहा कि इसके बाद कोई भी व्यक्ति धर्म परिवर्तन का षड्यंत्र नहीं कर सकेगा।

मिश्रा ने बताया कि इस कानून का उल्लंघन करने पर एक से 10 साल तक की कैद एवं एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस विधेयक के विभिन्न प्रावधानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अपना धर्म छिपाकर (लव जिहाद) धर्म स्वातंर्त्य अधिनियम का उल्लंघन करने पर तीन साल से 10 साल तक के कारावास और 50,000 रुपये के अर्थदण्ड तथा सामूहिक धर्म परिवर्तन (दो या अधिक व्यक्ति का) का प्रयास करने पर पांच से 10 वर्ष तक के कारावास एवं एक लाख रुपये के अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया है।

मिश्रा ने कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा अधिनियम का उल्लंघन किए जाने पर एक साल से पांच साल तक का कारावास और 25,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। उन्होंने कहा कि नाबालिग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के मामले में दो से 10 साल तक का कारावास और कम से कम 50,000 रुपये का अर्थदंड लगाने का प्रावधान किया गया है। मिश्रा ने बताया कि इस विधेयक में स्वेच्छा से धर्म संपरिवर्तन करने वाले व्यक्ति अथवा उसका धर्म संपरिवर्तन कराने वाले धार्मिक व्यक्ति द्वारा जिला दंडाधिकारी को 60 दिन पहले सूचना दिया जाना अनिवार्य किया गया है।

उन्होंने कहा कि धर्म परिवर्तन कराने वाले धार्मिक व्यक्ति द्वारा जिला दंडाधिकारी को धर्म संपरिवर्तन के 60 दिन पूर्व सूचना नहीं दिए जाने पर कम से कम तीन वर्ष तथा अधिकतम पांच वर्ष के कारावास तथा कम से कम 50,000 रुपये के अर्थदंड का प्रावधान किया गया है। मिश्रा ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक बार इस अधिनियम का उल्लंघन करते हुए पाया गया, तो उसे पांच से 10 साल तक के कारावास का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि इस अधिनियम में कार्रवाई के लिए धर्मांतरण के लिए बाध्य किए गए पीड़ित व्यक्ति अथवा उसके माता-पिता या भाई-बहन अथवा अभिभावक शिकायत कर सकते हैं।

मिश्रा ने कहा कि धर्मांतरण के लिए होने वाली शादियों पर रोक लगाने के लिए प्रस्तावित ‘धर्म स्वातंर्त्य अधिनियम’ को कठोर बनाने के साथ कुछ ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो देश के किसी भी राज्य में अब तक नहीं हैं। उन्होंने बताया कि नए कानून में धर्म संपरिवर्तन (लव जिहाद) के आशय से किया गया विवाह अमान्य घोषित करने के साथ महिला और उसके बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान भी किया गया है। ऐसे विवाह से जन्मे बच्चे माता-पिता की संपत्ति के उत्तराधिकारी होंगे।

मिश्रा ने कहा कि ‘धर्म स्वातंर्त्य अधिनियम’ का उल्लंघन करने वाली संस्था एवं संगठन को भी अपराधी के समान सजा मिलेगी। उन्होंने बताया कि किसी मामले में धर्मांतरण नहीं किया गया है, यह आरोपी को साबित करना होगा। मिश्रा ने कहा कि अपराध को संज्ञेय और गैर जमानती बनाने के साथ उप पुलिस निरीक्षक से कम श्रेणी का अधिकारी इसकी जांच नहीं कर सकेगा। उल्लेखनीय है कि 28 से 30 दिसंबर के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा का तीन दिवसीय सत्र आयोजित किया जाएगा।

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