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मप्रः बीजेपी चेयरपर्सन और उनकी डिप्टी के पति का धमाल, काउंसिल के 24 सदस्यों को देते दिखे फरमान

Madhya Pradesh: अध्यक्ष पद पर गीता सोनी तो उपाध्यक्ष पद पर शीतल तांब्रकार आसीन हुई लेकिन उनका कार्यभार और कानूनी हक पर पतियों ने कब्जा डालना शुरू कर दिया।

मप्रः बीजेपी चेयरपर्सन और उनकी डिप्टी के पति का धमाल, काउंसिल के 24 सदस्यों को देते दिखे फरमान
मीटिंग में 'हर घर तिरंगा' अभियान पर चर्चा हुई(फोटो सोर्स: Social Media)।

Madhya Pradesh News: ये अक्सर देखा जाता है कि जनता द्वारा चुनी गई महिला जन प्रतिनिधियों की जगह उनके पति, पुत्र या फिर अन्य पुरूष उनसे संबंधी कार्याें को अंजाम देते हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के सतना में निर्वाचित नगर परिषद महिला सदस्यों के पतियों ने काम संभाला। बता दें कि सतना जिले के मैहर में 24 सदस्यीय परिषद की बैठक अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पतियों ने ली।

सतना जिले के मैहर नगर पालिका में अध्यक्ष गीता सोनी और उपाध्यक्ष पद पर शीतल तांब्रकार निर्वाचित हुई हैं। लेकिन जब नगर पालिका की पहली बैठक हुई तो अध्यक्ष के उनके पति संतोष सोनी कुर्सी पर बैठे रहे और मीटिंग का संचालन किया। वहीं महिला उपाध्यक्ष शीतल की जगह उनके पति नितिन ने मोर्चा संभाले रखा। इसमें ‘हर घर तिरंगा’ अभियान पर चर्चा हुई।

बैठक में सीएमओ सहित अन्य कर्मचारी भी मौजूद रहे। मीटिंग में बाकायदा भाषण हुआ और वास्तविक अध्यक्ष गीता सोनी वहां पुतले की तरह बैठी रहीं। वहीं उनके पति ने सभी से सहयोग की अपील की। इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों ने कुछ नहीं कहा लेकिन सामने आईं तस्वीरें सब साफ बयां कर रही हैं कि महिला सशक्तिकरण की बात भले ही हो लेकिन आज भी निर्वाचित पत्नियां रबर स्टाम्प की तरह हो चुकी और पति उनके हकों में डांका डाल रहे है।

दरअसल महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए महिला आरक्षण की बदौलत महिलाओं चुने जाने का मौका दिया जाता है। मैहर में अध्यक्ष का पद इस बार ओबीसी महिलाओं के लिए आरक्षित था। वहीं बैठक में अध्यक्ष गीता सोनी के पति संतोष सोनी नगर पालिका बैठक में निर्देश देते दिखे। वैसे गीता सोनी भी वहां मौजूद थीं लेकिन शीतल ताम्रकर बैठक हॉल में नहीं थी। उनकी जगह उनके पति नितिन ताम्रकर ने हिस्सा लिया।

मध्य प्रदेश में कुछ शहरों में परिषद की सीटों से चुनी गई महिलाओं के स्थान पर परिवार के पुरुष सदस्यों ही “शपथ लेते” देखे गए। हाल ही में मध्य प्रदेश में स्थानीय निकायों के लिए पांच चरणों में चुनाव हुए थे। इन चुनावों में पार्टी चिन्हों का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

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