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फुटपाथ पर घंटों तक पड़ा रहा कोरोना संक्रमित का शव, अस्पताल के खिलाफ होगी कार्यावाही, सरकार ने दिये जांच के आदेश

भोपाल के एक निजी अस्पताल के बाहर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज का शव फुटपाथ पर करीब एक घंटे से अधिक समय तक पड़ा रहा। अस्पताल की लापरवाही को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच की मांग की गई है।

फुटपाथ पर करीब एक घंटे से अधिक समय तक पड़ा रहा मरीज का शव। (indian express photo)

देश में कोरोना वायरस का संक्रमण कम होने का नाम नहीं ले रहा है। रोजाना यहां हजारों की संख्या में लोग संक्रमित पाये जा रहे हैं। ऐसे में कई अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों के साथ लापरवाही देखने को मिल रही है। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सामने आया है। भोपाल के एक निजी अस्पताल के बाहर कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज का शव फुटपाथ पर करीब एक घंटे से अधिक समय तक पड़ा रहा। अस्पताल की लापरवाही को देखते हुए मजिस्ट्रियल जांच की मांग की गई है।

बिजली कंपनी के एक कर्मचारी, वाजिद अली का राजभवन के पास पीपुल्स हॉस्पिटल में किडनी की बीमारी का इलाज चल रहा था। उन्होंने सोमवार को कोरोना पॉज़िटिव पाया गाय था। जिसके बाद उन्हें शहर के बाहरी इलाके में स्थित चिरायु अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस को शाम को बुलाया गया। कुछ दूर तक जाने के बाद एम्बुलेंस चालक मरीज को वापस पीपुल्स हॉस्पिटल ली आया। लेकिन अस्पताल ने यह तर्क देते हुए वाजिद को भर्ती करने से इनकार कर दिया कि अस्पताल सील हो चुका है और आईसीयू को फ्यूमिगेट कर दिया गया है। अस्पताल कहना था कि अब यहां किसी भी कोरोना संक्रमित मरीज का इलाज़ नहीं किया जाएगा।

पीपुल्स अस्पताल के एक प्रवक्ता ने दावा किया कि मरीज को ले जाने के लगभग 100 मिनट बाद एम्बुलेंस वापस आ गई थी और आईसीयू तब तक सील हो चुका था और पहले से ही फ्यूमिगेट हो चुका था। उन्होंने कहा कि एम्बुलेंस कर्मचारी आधे घंटे तक इंतजार करते रहे और स्ट्रेचर का इस्तेमाल करके मरीज को जबरदस्ती भर्ती करने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल ने पुलिस को सूचित किया था, लेकिन बताया गया कि यह कोई मेडिको -कानूनी मामला नहीं है।

चिरायु अस्पताल का कहना है कि ड्राइवर ने सही निर्णय लिया क्योंकि मरीज की हालत पहले से ही खराब हो गई थी और इंटुबेशन नहीं होने की वजह से उसकी मौत हो गई। क्योंकि ट्रैफिक के कारण उसे अस्पताल पहुंचने में काफी समय लगा होगा। घटना के बारे में मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जांच के आदेश दिए हैं।

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