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MP: यहां जाति के आधार पर बांटे गए कुएं, दूसरी जाति के लोगों ने गलत कुएं से पानी भरा तो मिलती है सजा

अगर इस इलाके में सूखा पड़ता है तो भी गांव के दबंग यह परंपरा टूटने नहीं देते। इसके अलावा अन्य जातियों का भी अलग कुआं है, जो अहिरवार और वंशकार समाज को अपने कुएं से पानी भरने की इजाजत नहीं देते हैं।

प्रतीकात्मक फोटो

भारत में अभी कई ऐसे इलाके हैं, जहां जातियों के नाम पर भेदभाव होता है। ऐसा ही मामला बुदेलखंड स्थित टीकमगढ़ जिले का है, जिसके सुजानपुरा गांव में लोगों ने जाति के आधार पर पानी का बंटवारा कर रखा है। यहां तीन जातियों के लिए तीन अलग-अलग कुएं हैं। हिंदी अखबार दैनिक भास्कर के मुताबिक, एक विशेष जाति वाला व्यक्ति दूसरी जाति के कुएं से पानी नहीं भर सकता। अगर वह ऐसा करता है तो उस शख्स के साथ मारपीट की जाती है।

सुजानपुरा गांव का अहिरवार समाज वंशकार जाति को अछूत मानता है। ऐसे में वे वंशकार जाति के लोगों को अपने कुएं से पानी नहीं भरने देते। गांववालों का कहना है कि इस गांव में यह व्यवस्था कई साल से चली आ रही है। वहीं, अगर इस इलाके में सूखा पड़ता है तो भी गांव के दबंग यह परंपरा टूटने नहीं देते। इसके अलावा अन्य जातियों का भी अलग कुआं है, जो अहिरवार और वंशकार समाज को अपने कुएं से पानी भरने की इजाजत नहीं देते हैं।

गलती करने पर पंचायत सुनाती है सजा-

अगर किसी भी जाति का व्यक्ति इस परंपरा को तोड़ता है तो उसे पंचायत सजा सुनाती है। वहीं, गंगाजल डालकर कुएं को शुद्ध किया जाता है। आदिम जाति कल्याण विभाग की संयोजक सरिता नायक ने बताया, ‘‘मैंने इस तरह का मामला पहली बार सुना है। इससे निपटने के लिए अगर गांव में जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत पड़ी तो हम चलाएंगे, जिससे लोगों के दिल से छुआछूत का भाव खत्म किया जा सके।’’ बता दें कि 21वीं सदी में प्राचीन काल वाली मानसिकता अपनाए हुए लोगों को समझाने की जरूरत है। आज कम्प्यूटर के जमाने में भी लोग इस तरह से छुआछूत को बढ़ावा दे रहे हैं, जो समाज के लिए हानिकारक है।

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