सावन के महीने में मध्य प्रदेश के ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है। इस बीच खंडवा जिला प्रशासन ने तीर्थयात्रियों को मंदिर में शीघ्र दर्शन पास के बदले रक्तदान करने के लिए प्रोत्साहित करने की अनूठी पहल शुरू की है। श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ को जनसेवा का अवसर बनाने के लिए, प्रशासन ने मंदिर परिसर के भीतर एक रक्तदान केंद्र स्थापित किया है। श्रद्धालु स्वेच्छा से इस केंद्र पर रक्तदान कर सकते हैं और आभार व्यक्त करते हुए उन्हें शीघ्र दर्शन का पास दिया जाता है जिससे उन्हें दर्शन के लिए मंदिर में जल्दी एंट्री मिल जाती है।

न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए, ओंकारेश्वर के एसडीएम पंकज वर्मा ने कहा कि रक्तदान दान का एक सर्वोच्च रूप है और प्रशासन मंदिर दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं को इस नेक काम में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना चाहता है। उन्होंने कहा, “रक्तदान एक परोपकार का कार्य है। हमने मंदिर परिसर के भीतर ही एक रक्तदान केंद्र स्थापित किया है जहां व्यक्ति स्वेच्छा से रक्तदान कर सकते हैं। इसे प्रोत्साहित करने के लिए हम शीघ्र दर्शन पास प्रदान करते हैं।” उन्होंने कहा कि प्रशासन इस सुविधा को और बेहतर बनाने और श्रद्धालुओं के लिए रक्तदान प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाने की योजना बना रहा है।

खंडवा प्रशासन की खास पहल

एसडीएम ने कहा, “हम और अधिक काउंटर और सोफे जोड़ने, एक रजिस्ट्रेशन डेस्क स्थापित करने और दान प्रक्रिया के अनुभव को बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।” वर्मा ने कहा कि इस पहल से श्रद्धालुओं के बीच संवाद का अवसर भी मिल सकता है और मंदिर में सकारात्मक और आध्यात्मिक वातावरण बनाने में योगदान मिल सकता है। उन्होंने कहा, “इसके अलावा, लोगों का जमावड़ा आपसी मेलजोल और संवाद को बढ़ावा देगा जिससे हमें एक आध्यात्मिक वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।”

इस पहल के माध्यम से इकट्ठा किया गया रक्त खंडवा में चिकित्सा सुविधाओं में उपयोग के लिए पहुंचाया जाएगा, विशेष रूप से उन रोगियों के लिए जिन्हें आपात स्थिति में रक्त की आवश्यकता होती है और दुर्घटनाओं में घायल हुए लोगों के लिए भी। एसडीएम ने बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) का एक वाहन नियमित रूप से मंदिर में दान किए गए रक्त को एकत्र करने के लिए आता है। प्रशासन का उद्देश्य केवल भीड़भाड़ वाले मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाना ही नहीं है, बल्कि तीर्थयात्रियों को रोगियों की सहायता के लिए सीधे योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करना भी है।

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गुजरात में हिंदू और मुस्लिम महिलाओं ने मिसाल पेश करते हुए एक-दूसरे के पतियों को किडनी दान की। शहर के स्टर्लिंग अस्पताल ने बताया कि अहमदाबाद में एक हिंदू महिला और एक मुस्लिम महिला ने एक-दूसरे के पतियों को किडनी दान की क्योंकि उनके रिश्तेदारों द्वारा दान करना चिकित्सकीय रूप से संभव नहीं था। खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें