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रामदेव की पतंजलि के खिलाफ जनहित याचिका लगाने को भरने होंगे 10 हजार रुपये, कोर्ट ने कहा- वक्त खराब किया

याचिका में दावा किया गया था कि राज्य सरकार ने कम दाम पर पतंजलि को जमीन दे दी। आरोप लगाया गया कि सरकार की नीतियों के दायरे से बाहर यह काम हुआ, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ था।

योग गुरु रामदेव। (एक्सप्रेस फाइल फोटोः गजेंद्र यादव)

मध्य प्रदेश के धार जिला स्थित पीथमपुर में योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद को कारखाना लगाने के लिए 40 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी। हाईकोर्ट में इसी के खिलाफ दोबारा एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल की गई थी, जिसे सोमवार (27 अगस्त) को खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने जमीन आवंटन के इस मामले में कहा, “दूसरी याचिका में ठोस तथ्य नहीं थे, लिहाजा उससे कोर्ट का वक्त खराब हुआ है।” ऐसे में कोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले पर 10 हजार रुपए का हर्जाना लगाया है। यानी याचिकाकर्ता को कोर्ट का वक्त जाया करने के चक्कर में अब यह रकम भरनी पड़ेगी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य सरकार ने इस मामले में अपनी नीतियों के अंतर्गत जमीन आवंटित की, जिस पर पहले भी इसी तरह की याचिका दाखिल की गई थी। जस्टिस पीके जयसवाल और जस्टिस एसके अवस्थी की बेंच के सामने उस पर सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने कुछ दिनों पहले उस पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जबकि 27 अगस्त की तारीख आदेश जारी करने के लिए तय की थी।

सोमवार को कोर्ट ने फैसले में बताया, “पहले की याचिका में हमारी ओर से कहा गया था कि अगर आवंटन सही ढंग से नहीं किया गया, तब याचिका दोबारा दाखिल की जा सकती है। पर दूसरी बाद दायर की गई याचिका बेमतलब की थी। उसमें ठोस तथ्य नहीं थे। सरकार ने पतंजलि को सही तरीके से जमीन आवंटित की है। कैबिनेट से प्रस्ताव पास हुआ था, जिसके बाद जमीन आवंटित हुई।”

सूत्रों के मुताबिक, याचिका में दावा किया गया था कि राज्य सरकार ने कम दाम पर पतंजलि को जमीन दे दी। आरोप लगाया गया कि सरकार की नीतियों के दायरे से बाहर यह काम हुआ, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हुआ था। वहीं, शासन की ओर से इस याचिका पर बताया गया कि जमीन आवंटित करने का फैसला कैबिनेट का था। नीतियों के अनुसार ही उद्योग को जमीन आवंटित की गई।

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