साल 2021 की अगस्त में आई बाढ़ ने मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में भारी तबाही मचाई थी। इस बाढ़ में अपने गांव ललितपुरा में रहने वाले अधिकतर लोगों के मुकाबले जयराम को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था, उनके 40 खरगोश, 15 मुर्गियां, 13 बकरियां, दो भैंस और दो बछड़े मारे गए। इसके अलावा उनके तीन घर भी तबाह हो गए थे। उस समय सरकार ने किसानों के मुआवजे की घोषणा कि जो कभी इनके और अन्य किसानों के हाथ आए ही नहीं।

हालांकि घोटाले के आरोपों में एक तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी के बाद या मामला एक बार फिर से चर्चा में आ गया। इस मामले की मुख्य आरोपी अमिता सिंह तोमर 2019 में अमिताभ बच्चन के शो कौन बनेगा करोड़पति में 50 लाख रुपए जीत चुकी हैं।

तीन बच्चों ने छोड़ दिया स्कूल- जयराम की पत्नी

द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए जयराम की पत्नी उर्मिला ने आरोप लगाया कि उन्हें सिर्फ ₹5000 मिले। आगे उन्होंने कहा, “हमारे परिवारों में सभी को कम करना पड़ा तीन बच्चों ने स्कूल छोड़ दिया हमने रिश्तेदारों से कर्ज लेकर दो कमरों का घर बनवाया है।”

जिले के सरकारी आंकड़े दिखाते हैं कि बड़ौदा तहसील में 960 किसानों को लाभार्थी के तौर पर लिस्ट किया गया था और सर्वे के बाद उनके लिए कुल 2,40,68,720 की रकम मंजूर की गई थी।

पटवारी के रिश्तेदारों के खातों में गई रकम

जांच कर्ताओं का कहना है कि इस रकम का अधिकतर हिस्सा लाभार्थियों तक कभी पहुंचा ही नहीं, इसके बजाय यह पैसा 127 ऐसे बैंक खातों में चला गया जिनका बाढ़ पीड़ितों से कोई लेना-देना नहीं था। ये लोग शिवपुरी और मानपुर जैसे दूर-दराज कस्बे के रहने वाले लोगों के थे और कुछ मामलों में तो उन पटवारी के रिश्तेदार थे जिन्होंने मुआवजे की लिस्ट तैयार की थी।

अमिता तोमर इस मामले में गिरफ्तार किए गए 30 लोगों में से एक हैं, उन्हें मार्च में गिरफ्तार किया गया। पुलिस का आरोप है इस मामले में राजस्व अधिकारियों के एक ऐसे नेटवर्क का हाथ है जो किसानों के लिए तय की गई रकम को हड़प रहा था।

2.4 करोड़ में से किसानों को मिले महज 30 लाख से भी कम

960 किसानों के लिए मंजूर किए गए 2.4 करोड़ रुपए में से 133 किसानों के हिस्से महज 30 लाख रुपए से भी कम रकम आई, बाकी रकम कथित तौर पर इन्हीं फर्जी खातों में डाल दी गई जिनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं था। औसतन 6 किसानों के लिए तय की गई राहत राशि को एक ही अकाउंट में जमा किया गया और फिर पकड़े जाने से बचने के लिए उस राशि को बहुत ही चालाकी से छोटे-छोटे हिस्सों में निकाला गया। आरोप है कि इन लेनदेन को अमिता तोमर के डिजिटल क्रेडेंशियल यानी पहचान पत्रों का इस्तेमाल करके मंजूरी दी गई थी।

पुलिस ने बताया कि मामले में 110 आरोपियों की पहचान कर ली गई है जिनमें से कम से कम 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। तहसीलदार अमिता तोमर और 18 पटवारी के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी मिल गई है। गिरफ्तार किए गए लोगों में से तीन निजी कंप्यूटर ऑपरेटर हैं।

तहसीलदार को मिलने थे 80 लाख रुपये

उप विभागीय पुलिस अधिकारी अवनीत शर्मा ने इस मामले में कहा, “आरोपी पटवारी ने खुलासा किया है कि तहसीलदार को लगभग 75-80 लाख रुपए मिलने थे और बाकी रकम अन्य आरोपों में बांट दी गई थी ज्यादातर आरोपी पटवारी के रिश्तेदार हैं जिन्होंने इस रकम को इधर-उधर करने के लिए अपने खातों का इस्तेमाल करने की पेशकश की थी।”

अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट रुपेश उपाध्याय ने कहा,”अगस्त 2021 में जब बाढ़ के कारण जिला जलमग्न हो गया था तभी मेरा तबादला हो गया, अगर मैं वहां होता तो यह धोखाधड़ी नहीं होती। अमिता तोमर पहले भू अभिलेख कार्यालय से जुड़ी थी और बाढ़ आने के कुछ महीनों बाद उन्हें तहसीलदार के पद पर तैनात किया गया था।” रुपेश उपाध्याय ने तबादला होने से पहले राहत कार्यों की देखरेख की थी।

कैसे होता है काम?

बाढ़ राहत का काम पंचायत सचिव, कृषि विभाग के एक अधिकारी और पटवारी मिलकर सर्वे शुरू करते हैं इसके बाद ग्राम पंचायत लाभार्थियों की सूची जारी करता है और आखिर में इसे मंजूरी के लिए तहसीलदार के पास भेज देता है। मंजूरी मिलने के बाद तहसील पेमेंट के लिए बिल बनाती है और तहसीलदार को एक ओटीपी भेजती है। बिल को ट्रेजरी में भेजने के लिए तहसीलदार के ऑथेंटिकेशन यानी मंजूरी की जरूरत होती है। रुपेश उपाध्याय ने कहा, “कोई भी पटवारी अकेले पैसे भेज नहीं सकता हर पेमेंट को मंजूरी देने के लिए तहसीलदार के पहचान पत्रों की जरूरत होती है।”

किस पटवारी ने कितने गबन किए?

रिकॉर्ड्स की जांच से पता चलता है कि कुछ अधिकारी कथित तौर पर बड़ी रकम के हेरीफेरी में संलिप्त थे। पटवारी लक्ष्मीनारायण गुर्जर ने 312 किसानों के लिए तय करीब 89.6 लाख रुपए का हेरफेर किया। पटवारी इनायत खान ने 213 किसानों के लिए 40 लाख रुपए से अधिक का हेरफेर किया और पटवारी मेवाराम गोर्सिया ने 62 किसानों के लिए तय की गई 15.6 लाख रुपए गबन किए। ये सभी गिरफ्तार किए गए लोगों में शामिल हैं।

चूंकि रकम की गए ट्रांसफर के लिए तहसीलदार की मंजूरी की जरूरत होती है इसलिए जांच कर्ता इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि इन्हें मंजूरी कैसे मिली। 2023 में बनी एक जांच समिति ने पाया कि रिकॉर्ड्स पर कथित तौर पर सिर्फ तहसीलदार और पटवारी के ही 10 हस्ताक्षर थे जबकि नियमों के मुताबिक रेवेन्यू इंस्पेक्टर या क्लर्क स्टाफ द्वारा वेरिफिकेशन यानी सत्यापित होना जरूरी है।

अमिता को हाईकोर्ट से भी मिल चुका झटका

अमिता तोमर 2023 में नायब तहसीलदार के तौर पर मध्य प्रदेश रिवेन्यू सर्विस में शामिल हुई और करीब 2011 में उन्हें प्रमोशन मिला। पिछले दो दशकों में उन्होंने 25 तहसीलों में ट्रांसफर हुआ। इस साल फरवरी में श्योपुर जिला प्रशासन ने उन पर कथित तौर पर आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की मंजूरी दी। साथ ही 11 फरवरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत रद्द कर दी।

तीन कंप्यूटर ऑपरेटर भी थे शामिल

रुपेश उपाध्याय ने कहा, “बैंक खाते की डिटेल चेक करना तहसीलदार का काम होता है। इसके बजाय सारा डिजिटल काम निजी कंप्यूटर ऑपरेटरों ने किया उनमें से तीन राम अवतार धीरज सुमन और योगेश गौतम को एक अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया। जिन पर आरोप है कुछ पैसे उनके खातों में भी ट्रांसफर किए गए थे।

राम अवतार, मानपुर में कंप्यूटर ऑपरेटर के तौर पर काम करता था। उसकी पत्नी ललितेश ने कहा, “वह वहां के पटवारी को जानता था। हमें नहीं पता कि पटवारी ने उसके खाते में पैसे क्यों ट्रांसफर किए? उन्हें गरीब लोगों के पैसे के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए था।”

ललितपुर में धीरज सुमन के पिता ने बताया कि उनके बेटे ने बाढ़ के दौरान तहसील दफ्तर में लगभग एक महीने तक काम किया था। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे को तहसीलदार ने एक महीने के लिए राहत बना संबंधी काम के लिए बुलाया था मैं अभी तक उससे मिल नहीं पाया हूं और उससे पूछ नहीं पाया हूं कि आखिर हुआ क्या था।”

₹3000 महीना कमाने वाले कंप्यूटर ऑपरेटर योगेश गौतम को भी गिरफ्तार कर लिया गया उनके पिता ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि कोई छोटा मोटा ऑपरेटर बड़े अधिकारियों की मदद के बिना कुछ ऐसा कर सकता है।”

पीड़ितों ने क्या कहा?

जिन लोगों को पूरा मुआवजा नहीं मिला उनमें 29 साल के हेमंत कुशवाहा का भी नाम है। उन्होंने अपने नुकसान के मामले में चार बार जनसुनवाई में शिकायत की थी। उनका दावा है कि उन्हें सिर्फ ₹5000 मिले जबकि बाकी पैसा किसी और के खाते में चला गया थे। इंडियन एक्सप्रेस ने जिन परिवारों से बात की उन्होंने भी ऐसी परेशानी बताई।

एक और निवासी दिनेश ने दावा किया कि जमीन के नुकसान के लिए उन्हें 48000 मिलने थे, लेकिन उनके पैसे गांव में एक कंप्यूटर कियोस्क चलने वाले के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए गए, जो किसानों को मुआवजे के कागजात तैयार करने में मदद करता था। हालांकि कियोस्क चलाने वाले ने इस बात से इनकार किया और कहा कि ना तो मेरे परिवार को, ना ही मुझे ऐसा कोई मुआवजा मिला है जो हमारा नहीं था। मेरे परिवार को भी नुकसान हुआ था और मुझे जो मुआवजा मिला वह पूरी तरह से कानूनी था।

बाढ़ में हरिमोहन की दीवारें गिर गई और दो कमरे तबाह हो गए उनके 10 लोगों का परिवार अब उन पक्के कमरों में सोता है जो बच गए थे उनका नाम भी लिस्ट में था लेकिन उन्हें सिर्फ ₹5000 मिले। उन्होंने कहा, “हमें नहीं पता कि आप ऐसा किसके खाते में चला गया।”

रमेश प्रजापति और उनके 10 लोगों का परिवार अभी भी एक अधूरे घर में रहता है। उन्होंने दावा किया कि उनके कच्चे घर तबाह हो गए, एक गाय मर गई, पास का एक मंदिर बह गया और मुझे करीब ₹40000 का मुआवजा पाने के लिए ₹5000 रिश्वत भी देनी पड़ी।

छोटू लाल का पांच बीघा प्याज, डेढ़ कुंटल गेहूं, 1 कुंतल चना और दो कच्चे घर तबाह हो गए। उन्होंने कहा कि सरकार ने मुझे आटे की एक बोरी दी। हम अपने लिए कपड़े भी नहीं खरीद पाए।

रामचंद्र सुमन का भी घर तबाह हो गया था, उन्हें फसल के नुकसान के मुआवजे के तौर पर ₹5000 मिले। उन्होंने कहा कि मेरा पैसा किसी और के खाते में चला गया पुलिस पता लग रही है कि वह कौन है।

रामकिशन केवट बाढ़ में जिनके पांच जानवर और दो घर गिर गए थे। उन्होंने कहा कि उन्हें भी ₹5000 मिले। उन्होंने कहा मुझे अपने बिस्तर पर पड़े बेटे की देखभाल के लिए पैसों की जरूरत है।

पीड़ितों को यह पैसा वापस मिल पाएगा या नहीं

एडीएम रुपेश उपाध्याय ने कहा, “राज्य सरकार ने पटवारी से ब्याज सहित 1 करोड़ रुपए की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है लेकिन उन्होंने यह भी माना कि प्रक्रिया मुश्किल है। उन्होंने कहा, “यह कहना मुश्किल है कि पीड़ितों को यह पैसा वापस मिल पाएगा या नहीं क्योंकि इस मामले में सरकार की ओर से कोई आदेश नहीं आया है।”

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मध्य प्रदेश के जबलपुर स्थित बरगी डैम में गुरुवार को बड़ा हादसा हुआ। यहां एक क्रूज नाव पलट गई। इस घटना में अब तक नौ लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 15 लोगों को रेस्क्यू किया गया है। बाकी लोग जो हादसे के बाद से लापता हैं, उनकी तलाश के लिए सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तेज हवाओं के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें