मध्य प्रदेश के सतना वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल में जांच में पाया गया कि यहां रक्त एक्सपायर हो चुके और रक्तदाता का अता-पता ही नहीं और रिकॉर्ड रखने में घोर लापरवाही है। यहां थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को रक्त चढ़ाया गया था, जो बाद में एचआईवी पॉजिटिव पाए गए।
इसके बाद राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने ब्लड बैंक के निलंबित प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल और दो लैब टेक्नीशियन के खिलाफ दायर चार्जशीट से पता चला कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली उन बच्चों को सुरक्षित रखने में कैसे विफल रही, जिन्हें हर माह रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। रिपोर्ट में कहा गया कि रक्त देने वालों का सही रिकॉर्ड नहीं रखा गया था, टेस्टिंग किट की कंपनी के विवरण/बैच नंबर गायब थे और खून चढ़ाने से पहले एचआईवी/अन्य जांचों के लिए रक्त की ठीक जांच नहीं की गई थी।”
कब आया था मामला सामने?
यह मामला सबसे पहले पिछले साल दिसंबर में सामने आया था, हालांकि बच्चों में एचआईवी का पता मार्च और अप्रैल 2025 में पाया गया था। डॉ. देवेंद्र पटेल ने आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जो अभी तक निलंबित हैं
जांच में क्या-क्या मिला?
जांच में पाया गया कि प्रश्नावली, जिसमें हर रक्तदाता का पता, पेशा और हीमोग्लोबिन का स्तर की जांच के जमा किया गया था, फिर भी रिकार्ड में गलत तरीके से दिखाया गया था कि सभी रक्तदाताओं का हीमोग्लोबिन>12g/dl। काउंसलर का पद खाली था और उसकी गैर-मौजूदगी में ब्लड सेंटर के अधिकारी या अन्य कर्मचारियों द्वारा रक्तदाताओं की कोई काउंसलिंग या स्क्रीनिंग नहीं की गई।
रक्तदान कक्ष में रोजाना 40 से 50 रक्तदाता आते थे, कथित तौर पर कक्ष में एक समय पर केवल एक ही व्यक्ति रहकर संचालित करता था और वहां अनाधिकृत/संदिग्ध व्यक्ति अक्सर देखे जाते थे। रजिस्टर की प्रविष्टियां खाली पाई गईं और मैहर सिविल अस्पताल में एकत्रित रक्त को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट या राष्ट्रीय दिशानिर्देशों का पालन किए बिना सतना के रिकॉर्ड जारी किया जा रहा था।
टेस्टिंग में कथित तौर पर कुछ कमियां थीं। ट्रांसफ्यूजन से फैलने वाले इन्फेक्शन (TTI) प्रोटोकॉल के तहत दान किए गए सभी रक्त की एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया और सिफिलिस के लिए स्क्रीनिंग करना जरूरी है। एचआईवी टेस्ट चौथी पीढ़ी ELISA या CLIA का इस्तेमाल किया जाना चाहिए- ये ऐसे एडवांस्ड डायग्नोस्टिक तरीके हैं जो इन्फेक्शन को उसके शुरुआती चरणों में ही पकड़ने में काफी संवेदनशील होते हैं, पर जांच में पता चला कि जनवरी 2024 और मार्च 2025 के बीच इन्फेक्टेड बच्चों को दी गई 204 यूनिट्स में से 35 यूनिट्स की जांच को CLIA के बजाय सिर्फ Rapid Card (17%) से की गई थी।” Rapid Card टेस्ट सस्ते, तेज और कम संवेदनशील होते हैं। ब्लड सेंटर के अधिकारी ने सफाई दी कि CLIA रिएजेंट्स लगातार उपलब्ध नहीं थे।
निजी संस्थान का तो लाइसेंस ही खत्म था
जांच का दायरा बिड़ला ब्लड सेंटर तक भी पहुंचा, जो निजी संस्थान है। इसका लाइसेंस कथित तौर पर अगस्त 2024 में ही खत्म हो गया था। यहां रजिस्टरों की जांच में कथित तौर पर यह मिला कि कई एक्सपायर्ड ब्लड यूनिट जारी की गई थीं, जिनमें से एक थैलेसीमिया से पीड़ित एक लड़की को दी गई थी। कथित तौर पर एचआईवी से संक्रमित एक बच्चे को इस सेंटर से 2020 के दौरान तीन यूनिट ब्लड जारी हुआ था और एक अन्य बच्चे को फरवरी 2024 में एक यूनिट ब्लड मिलने की बात कही गई गई है। उन रक्तदाताओं के बारे में पूछे जाने पर, जिनका एचआईवी टेस्ट रिएक्टिव आया था, रिपोर्ट में कहा गया, जिन रक्तदाताओं का एचआईवी टेस्ट रिएक्टिव आया था, उन्हें नियामानुसार आईसीटीसी सेंटरों में नहीं भेजा गया, रेफरल का कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला।
प्रदेश के अपने एचआईवी केयर इंफ्रास्ट्रक्चर में भी इसी तरह खामियां थीं। जनवरी 2024 और मार्च 2025 के बीच जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कथित तौर पर 14 टीटीआई-रिएक्टिव रक्तदाता मिले। एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर के रिकॉर्ड में कथित तौर पर इनमें से केवल पांच का ही पता लगाया जा सका। बाकी नौ का कोई रिकॉर्ड नहीं था-उनके मौजूदा एचआईवी स्टेट्स के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। साथ ही कहां है इसका भी पता नहीं था।
थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों की पिछले साल मार्च और अप्रैल की शुरुआत के बीच सतना के सरदार अस्पताल में एचआईवी जांच पॉजिटिव आई थी।
रिपोर्ट आने के बाद विभाग करेगा कार्रवाई
हालांकि बिरला ब्लड सेंटर ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। सतना जिला अस्पताल के एक अधिकार ने बताया, मामले की जांच कई एजेंसियां साथ मिलकर काम कर रही हैं, जो जवाबदेही तय करेंगे। वह राज्य के स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी, जो आगे की कार्रवाई करेगा।
मैहर सिविल अस्पताल के प्रभारी डॉ.आर.एन पांडे ने कहा कि अस्पताल विभिन्न रक्तदान शिविरों से रक्त के नमूने एकत्र करने के बाद सतना भेजेगा। आगे कहा, हमने रक्तदान शिविरों से रक्त के नमूने लेने के बाद उसे सतना भेजा था। इनकी जांच नहीं की गई क्योंकि यह जिम्मेदारी सतना जिला अस्पताल की थी। जांच के बाद हमने सतना को रक्त के नमूनों की आपूर्ति बंद कर दी है।
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