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मध्‍य प्रदेश में फर्जी वोटर्स? कांग्रेस ने बनाई अपनी खुफ‍िया टीम, चुनाव आयोग ने हटाए 3.86 लाख नाम

मध्य प्रदेश में फर्जी वोटरों के मामले ने तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस ने बूथ स्तर पर ऐसे मतदाताओं की पहचान करने के लिए खुफिया टीम बनाई है। वहीं, राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा ने भी चुनाव आयोग से मामले की जांच करने की मांग की है।

चुनाव आयोग से फर्जी मतदाताओं के बारे में शिकायत कर निर्वाचन सदन (नई दिल्ली) से बाहर आते ज्योतिरादित्य सिंधिया, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और अन्य कांग्रेसी नेता। (फोटो सोर्स: पीटीआई)

मध्य प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में फर्जी मतदाता पत्रों के सामने आने से राज्य की सियासत गर्मा गई है। कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मामले की जांच कराने की मांग की है। चुनाव आयोग ने मामले की जांच के लिए चार टीम का गठन किया है। इन्हें डोर-टू-डोर जाकर मतदाता पत्रों की जांच-पड़ताल करने और गड़बड़ी पाए जाने पर उचित कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। चुनाव आयोग के अधकारियों ने बताया कि फर्जी मतदाताओं की शिकायत मिलने के बाद मतादाता सूचियों की समीक्षा कर फर्जी नामों को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने 60 लाख फर्जी मतदाताओं की सूची के साथ चुनाव आयोग को शिकायत पत्र सौंपा है। आयोग 60 लाख फर्जी मतदाताओं के कांग्रेस के दावों से इत्तफाक नहीं रखता, लेकिन अधिकारियों ने फर्जी वोटरों के नाम होने की बात जरूर मानी है। मुख्य चुनाव अधिकारी सलीना सिंह ने बताया कि अब तक ऐसे 3.86 लाख लोगों के नाम को मतदाता सूची से हटाया जा चुका है। उनके मुताबिक, सबंधित जिलों के कलेक्टरों से इस मसले पर नियमित रूप से बात होती है और वोटर लिस्ट की समीक्षा भी की जाती है। वहीं, कांग्रेस ने भी फर्जी वोटरों की पहचान के लिए खुफिया टीम बनाई है।

कांग्रेस ने बनाई ‘इंटेलिजेंस टीम’: कांग्रेस ने फर्जी मतदाताओं के बारे में चुनाव आयोग से शिकायत करने के बाद खुद की इंटेलिजेंस टीम भी बनाई है। कांग्रेस की टीम बूथ स्तर पर जाकर काम करेगी। टीम में शामिल लोगों का काम वोटर लिस्ट में शामिल फर्जी मतदाताओं की पहचान करना है। बता दें कि मध्य प्रदेश में 5,07,80,373 रजिस्टर्ड मतदाता हैं। इनके लिए 65,200 पोलिंग बूथ हैं। हर बूथ पर 900 से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करते हैं। आंकड़ों की मानें तो एक बूथ की पोलिंग लिस्ट में लगभग 30 पेज होते हैं और एक पेज पर 30 वोटरों के नाम दर्ज होते हैं। बताया जाता है कि कांग्रेस की टीम पोलिंग लिस्ट की जांच कर रही है, ताकि फर्जी नामों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।

भाजपा ने भी की जांच की मांग: कांग्रेस की ओर से लाखों की तादाद में फर्जी मतदाताओं की शिकायत के बाद मध्य प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा भी सक्रिय हो गई है। मध्य प्रदेश के ग्रामीण विकास मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि फर्जी मतदाताओं से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा, ‘मतदाता पत्रों में फर्जी मतदाताओं के नाम से न तो सरकार और न ही सरकारी अमले का कुछ भी लेना-देना है। चुनाव आयोग के पास अगर ऐसी शिकायत पहुंची है तो मामले की जांच की जानी चाहिए।’ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक बूथ पर एक ही नाम के 23 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में होने की बात सामने आई है।

उपचुनाव के दौरान भी कांग्रेस ने की थी शिकायत: कांग्रेस ने फरवरी में उपचुनावों के दौरान भी फर्जी वोटरों का मसला उठाया था। पार्टी ने चुनाव आयोग को इस बाबत एक ज्ञापन भी सौंपा था। अप्रैल में चुनाव अधिकारियों ने 6 लाख लोगों के नामों को वोटर लिस्ट से हटाने की बात कही थी। फर्जी मतदाताओं का मुद्दा एक बार फिर से सामने आया है।

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