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मध्य प्रदेश: गोरक्षकों ने बीफ ले जाने के शक में की मारपीट, पुलिस ने दो युवकों को किया गिरफ्तार

गोरक्षकों ने इंदौर में केसरबाग पुल के पास एक वाहन को रुकवा लिया। इसके बाद उन्होंने कथित रूप से बीफ ले जाने के शक में दो लोगों की पिटाई कर दी। वाहन में बैठा तीसरा आदमी वहां से भागने में कामयाब हो गया।

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मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से गोरक्षकों की हिंसा पर लगाम लगाने के लिए पेश किए गए बिल के बाद इंदौर में रविवार को गोरक्षा से जुड़ी हिंसा का एक और मामला सामने आया है। खबर है कि इंदौर में केसरबाग पुल के पास दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं व गोरक्षकों ने एक वाहन को बीफ ले जाने के शक में रुकवा लिया।

इसके बाद गोरक्षकों ने दो लोगों की पिटाई कर दी। वहीं गाड़ी में बैठा तीसरा व्यक्ति वहां से भागने में सफल रहा। घटना के बारे में राजेंद्रनगर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर सुनील शर्मा ने इंडियन एक्स्प्रेस को बताया कि राज्य के गोहत्या कानून के उल्लंघन के मामले में दो युवकों नदीम और इमरान को गिरफ्तार किया है।

पुलिस का कहना है कि इन दोनों युवकों को कोई चोट नहीं आई है। पुलिस इंस्पेक्टर ने बताया कि स्थानीय पशु चिकित्सक ने इस बात की पुष्टि की है कि गाड़ी में बीफ और अन्य मीट ले जाया जा रहा था। इससे पहले गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसा पर नकेल कसने के लिए मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने गोहत्या निरोध कानून के तहत 6 महीने की जेल के साथ ही 25000 से लेकर 50 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान किया था।

इसके लिए सीएम कमल नाथ की सरकार ने मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 में संशोधन को हरी झंडी दी थी। इंडियन एक्सप्रेस से बाचतीत में अतिरिक्त मुख्य सचिव (पशुपालन) मनोज श्रीवास्तव ने कहा था कि यदि भीड़ गाय के नाम पर हिंसा में शामिल पाई जाती है तो सजा को बढ़ाकर कम से कम एक साल और अधिकतम 5 साल किया जा सकता है।

दुबारा यह अपराध करने की सूरत में जेल की सजा की अवधि दुगनी हो सकती है। प्रस्तावित कानून में गोरक्षा के नाम पर हिंसा के लिए उकसाने वालों को भी एक से 3 साल तक की जेल की सजा की बात कही गई थी। इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को भी इस कानून के तहत सजा देने की बात थी।

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