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रिटायर होकर लौटा फौजी तो लोगों ने बिछा दी हथेलियां, कुछ इस तरह किया गया स्वागत

एमपी के नीमच का है जहां नायक विजय बहादुर सिंह नाम का एक फौजी 17 साल की सेवा पूरी कर बुधवार को अपने गांव वापस लौटा। जैसे ही विजय गांव में पहुंचे तो लोगों ने उनके पांव जमीन पर नहीं पड़ने दिए और अपनी हथेलियां बिछाकर उनका स्वागत किया।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: February 5, 2021 2:34 PM
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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में लोग एक फौजी का स्वागत करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो एमपी के नीमच का है जहां नायक विजय बहादुर सिंह नाम का एक फौजी 17 साल की सेवा पूरी कर बुधवार को अपने गांव वापस लौटा। जैसे ही विजय गांव में पहुंचे तो लोगों ने उनके पांव जमीन पर नहीं पड़ने दिए और अपनी हथेलियां बिछाकर उनका स्वागत किया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि गांव वाले फौजी के सामने हाथ बिछा कर बैठे हैं। फौजी उनके हाथों पर चलकर मंदिर के अंदर जाता है। लोगों ने फौजी को माला पहनाकर गांव में स्थित गणेश मंदिर के दर्शन करवाए। समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए फौजी ने कहा कि यह मेरे लिए बहुत गर्व का क्षण है। विजय बहादुर सिंह ने कहा “आज, मैं सेना को 17 साल और 26 दिनों तक सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हो गया। जब मैं यहां आया, तो उन्होंने मुझे अपना पैर जमीन पर भी रखने नहीं दिया। वे मुझे आशीर्वाद दिलाने के लिए मंदिर भी ले गए।

विजय अब सहयोगियों के साथ मिलकर गाँव में ‘सैनिक पाठशाला’ पर काम कर रहे हैं। इस गाँव से करीब 60 लोग सेना में हैं। ऐसे में वे और लोगों को सेना में जाने के लिए प्ररेरित करेंगे। उन्होंने कहा, ‘ मैं जीरन के युवाओं को प्रशिक्षित करना चाहता हूं, जो भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और सीमा सुरक्षा बल में शामिल होना चाहते हैं। मैंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर इस उद्देश्य के लिए एक ‘सैनिक पाठशाला’ शुरू की है।

विजय बहादुर सिंह 3 जनवरी 2004 को भारतीय सेना में शामिल हुए थे और बैंगलोर में प्रशिक्षित हुए। उनकी पोस्टिंग जम्मू और कश्मीर, कारगिल, लेह लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, जयपुर और बीकानेर में रही है। रिटायर विजय बहादुर के पिता ने कहा कि उनका सीना आज गर्व से और चौड़ा हो गया है और वो चाहते हैं कि सेना में अधिक से अधिक लोग जाएं तथा देश की सेवा करें। उन्होंने कहा, ‘आज जो स्वागत हुआ मेरे बच्चे का, ये बहुत बड़ी उपलब्धि है जीरन गांव के लिए जो मैंने जिंदंगी में पहली बार देखा है।’

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