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Ludhiana: जेल में मारे गए कैदी की मां का दावा, ‘मुझसे गले मिल रहा था बेटा, मेरी आंखों के सामने ही DSP ने मार दी गोली’

आरोपों पर जवाब देते हुए डीएसपी धालिवाल ने कहा, 'मैंने एक भी गोली नहीं चलाई। मैं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हालात को नियंत्रित करने में व्यस्त था। मेरी रैंक के हिसाब से मुझे हवा में गोलियां चलाने की कोई जरूरत ही नहीं है।'

Author लुधियाना | June 30, 2019 12:24 PM
अजीत सिंह की मां मीरा रानी (फोटो- गुरमीत सिंह)

लुधियाना सेंट्रल जेल में झड़प के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए 21 वर्षीय एक कैदी की मां ने सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा, ‘डीएसपी इकबाल सिंह धालिवाल ने मेरी आंखों के सामने मेरे बेटे को मार दिया।’ महिला के इस आरोप को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और जेल सुपरिंटेंडेंट ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि घटना वाले दिन महिला थाने आई ही नहीं थी। बुधवार (26 जून) को ड्रग केस में ट्रायल से गुजर रहे एक कैदी की पटियाला के एक अस्पताल में मौत हो गई थी, इसके बाद गुरुवार (27 जून) को उसके साथियों ने जेल स्टाफ पर हमला कर दिया। इसी झड़प के दौरान बाबा अजीत सिंह नाम के एक कैदी की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई।

इंडियन एक्सप्रेस के पास मौजूद लुधियाना पुलिस से की गई शिकायत की एक कॉपी के मुताबिक अजीत की मां मीरा रानी ने दावा किया कि सुबह करीब 11:15 बजे जब वो अपने बेटे से मिलने के लिए जेल पहुंची तो मुख्य दरवाजा खुला हुआ था और माहौल तनावपूर्ण था। उन्होंने बताया कि वहां पत्थरबाजी हो रही थी और जेल अधिकारी कैदियों को गालियां दे रहे थे।

महासिंह नगर की रहने वाली मीरा रानी की तरफ से की गई शिकायत में कहा गया, ‘मैं परिसर में ही थी, मैंने देखा डीएसपी खड़े थे (जिन्हें सभी पुलिसकर्मी धालिवाल सर कह रहे थे), उनके साथ जेल सुपरिंटेंडेंट भी थे। डीएसपी ने सुपरिंटेंडेंट से यह कहते हुए अनुमति मांगी कि हमें सभी कैदियों को सबक सिखाने दीजिए। सुपरिंटेंडेंट का इशारा मिलते ही धालिवाल ने फायरिंग शुरू कर दी। मेरे बेटे ने वहां मुझे देखा और वह मेरी तरफ दौड़ा। उसने मुझे गले लगाया लेकिन जल्द ही धालिवाल के आदेश पर दूसरे पुलिसकर्मियों ने मेरे बेटे को खींच लिया। मैं वहीं खड़ी थी और कुछ कहने की कोशिश कर रही थी तभी धालिवाल ने मेरे ही सामने बेटे को गोली मार दी। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसे पुलिस हिरासत में अवैध तरीके से मार दिया गया। वह झड़प में भी शामिल नहीं था। वह सिर्फ मुझसे मिलने के लिए मेरी तरफ आया था। धालिवाल ने हमारी जिंदगियां तबाह कर दीं।’

पुलिस कमिश्नर के दफ्तर में रानी के साथ लोक इंसाफ पार्टी के नेता और विधायक सिमरजीत सिंह बैंस भी थे। बैंस ने कहा कि अगर इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं हुई तो वे कोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘अगर पुलिस मजिस्ट्रेट जांच जारी रहते हुए पुलिस हत्या के प्रयास के लिए 22 कैदियों को पकड़ सकती है तो अजीत सिंह पर खुले आम गोली चलाने वाले की पहचान करने के लिए एक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं कर सकती।’

जेल सुपरिंटेंडेंट शमशेर सिंह बोपाराई ने पीड़ित की मां के दावों पर सवाल उठाया है। उन्होंने दावा किया कि 27 जून के दिन मीरा रानी के जेल में पहुंचने का न तो कोई लिखित रिकॉर्ड है और न ही कोई सीसीटीवी फुटेज है। उन्होंने कहा, ‘जेल में हर विजिटर की एंट्री होती है और रिकॉर्ड्स के मुताबिक उनकी आखिरी एंट्री 22 अप्रैल को हुई थी। कोई भी लिखित रिकॉर्ड या सीसीटीवी फुटेज यह नहीं बता रहा कि 27 जून को वो जेल में आई थीं। यह सब मनगढ़ंत कहानी है। डीएसपी धालिवाल और अन्य अधिकारी हालात को नियंत्रित करने में लगे थे। हमारे पास प्रवेश द्वार से लेकर मीटिंग एरिया तक सीसीटीवी लगे हुए हैं। जब जेल में दंगों जैसे हालात थे तब यह कैसे संभव है कि अझीत ने हमारे सामने अपनी मां को गले लगाया और फिर उसे मार दिया गया।’

वहीं आरोपों पर जवाब देते हुए डीएसपी धालिवाल ने कहा कि उन्होंने एक भी गोली नहीं चलाई और फायरिंग को निचली रैंक वाले पुलिसकर्मियों ने अंजाम दिया था। उन्होंने कहा, ‘मैं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हालात को नियंत्रित करने में व्यस्त था। मेरी रैंक के हिसाब से मुझे हवा में गोलियां चलाने की कोई जरूरत ही नहीं है। महिला ने यह भी दावा किया कि जब वो पहुंचीं तो जेल के गेट खुले हुए थे। क्या यह संभव है कि जब दंगों जैसे हालात हो और कैदी भागने की कोशिश कर रहे हो तब हम सभी गेट खुले रखेंगे? जब जेल में पत्थरबाजी हो रही हो तो हम क्यों एक महिला को अंदर जाने की इजाजत देंगे। अगर वो घुस भी जाती हैं तो हम उन्हें बेटे से गले मिलने देंगे? और इस सबसे अलग, क्या मैं मूर्ख हूं जो किसी को उसके परिजनों के सामने ही गोली मार दूंगा।? मैं इतना मूर्ख नहीं हूं।’

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बता दें कि शव परीक्षण रिपोर्ट में इस बात के संकेत मिले हैं कि अजीत को सीने पर बाईं तरफ से गोली लगी और दाईं तरफ पीछे से निकल गई। अजीत के पिता हरजिंदर सिंह ने कहा कि शुक्रवार (28 जून) को उनकी जानकारी के बिना ही शव परीक्षण करवा दिया गया। उन्होंने कहा, ‘हम एफआईआर दर्ज होने तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।’ अजीत का शव फिलहाल सरकारी अस्पताल के शव गृह में रखा हुआ है।

हरजिंदर सिंह ने दावा किया कि उनके बेटे को मार्च में एक चोरी के झूठे मुकदमे में फंसाया गया था। उन्होंने कहा, ‘मैं दैनिक वेतनभोगी हूं और मेरे पास बड़े वकीलों को चुकाने के लिए पैसे नहीं है लेकिन इंसाफ नहीं मिला तो मैं सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगा। मैं सबकुछ बेच दूंगा। मेरे बेटे को बिना किसी कारण मार दिया गया। मेरी पत्नी सदमे में थी, इसलिए उसने यह पूरी घटना हमें गुरुवार (27 जून) के दिन ही नहीं बताई। जेल अधिकारियों ने उसे धमकी दी थी कि अगर उसने मुंह खोला तो पूरे परिवार को मार दिया जाएगा, लेकिन अब उसने सारी बात उजागर की है।’

लुधियाना पुलिस कमिश्नर सुखचेन सिंह गिल ने कहा कि कैदी की मौत के मामले में पहले से एक अलग जांच चल रही है। उन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट के हिसाब से कार्रवाई करने की बात भी कही। पुलिस ने शुक्रवार (28 जून) को 22 कैदियों पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया है। इस हंगामे के दौरान एक कैदी भाग निकलने में भी कामयाब हो गया। भागे हुए कैदी की पहचान चोरी के आरोप में पकड़े गए अमन कुमार उर्फ दीपक के रूप में हुई। वहीं इस दौरान मारे गए एक अन्य कैदी सन्नी सूद के परिजनों ने शुक्रवार को ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया।

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