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‘निर्मल बाबा’ के नाम से फर्जी चेक जारी कर कैश करा लिए एक करोड़ से ज्यादा रुपए, कोर्ट ने भेजा 3 साल के लिए जेल

पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के मैनेजर बलविंदर सिंह की शिकायत पर लुधियाना के बरवाल अवाना शाखा में एफआईआर दर्ज की गई थी, जहां इंद्रजीत आनंद ने अपने खाते में एक चेक जमा किया था, जिस पर मेसर्स निर्मल दरबार की मुहर थी।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

पंजाब के लुधियाना की न्यायिक मजिस्ट्रेट शिवानी गर्ग की अदालत ने साल 2012 में निर्मल बाबा से 1.07 करोड़ का धोखाधड़ी का आरोप साबित होने पर एक व्यक्ति को तीन साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने लुधियाना पुलिस द्वारा 2012 में पीएयू पुलिस स्टेशन में दर्ज धोखाधड़ी की एफआईआर में नामजद तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया। इस चेक को कथित रूप से मेसर्स निर्मल दरबार द्वारा जारी किया गया था।

14 फरवरी 2012 को कैश हुआ था: बता दें कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के मैनेजर बलविंदर सिंह की शिकायत पर लुधियाना के बरवाल अवाना शाखा में एफआईआर दर्ज की गई थी, जहां इंद्रजीत आनंद ने अपने खाते में एक चेक जमा किया था, जिस पर मेसर्स निर्मल दरबार की मुहर थी। आनंद ने अपने बेटे नविल और भाई हरीश कुमार के साथ संयुक्त खाता खोला था। यह चेक 14 फरवरी 2012 को कैश हो गया। आरोपी ने बैंक से विभिन्न तरीको से 1.07 करोड़ रुपए निकाल ली। इसमें से कुछ रुपए उपेश कुमार को भी देने की बात हुई थी। इन रुपयों में से कुछ दिल्ली के धीरज वालिया नाम के शख्स को भी दिए गए थे।

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साथियों को बरी कर दिया: गौरतलब है कि चेक कैश होने के बाद में जब दिल्ली पीएनबी ब्रांच से मैनेजर के पास फोन आया कि चेक जाली है। तब बैंक में हड़कंप मच गया। आनन फानन में बैंक मैनेजर ने पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने पाया कि बड़ी रकम वापस लेने के बाद आनंद ने अपने सहयोगियों के बीच इसे वितरित किया है, जिन्हें बाद में एफआईआर में भी नामित किया गया था, लेकिन अदालत ने सबूतों की कमी के कारण शनिवार (11 जनवरी ) को उसके साथियों को बरी कर दिया।

इन धाराओं के तहत हुई कार्रवाई: 2 मार्च 2012 को इंद्रजीत आनंद और उनके गुर्गों के खिलाफ पीएयू पुलिस स्टेशन में एक प्राथमिकी दर्ज की गई – जीवन प्रीत नगर निवासी सुधीर स्याल, साउथ मॉडल ग्राम निवासी कृष्ण कुमार गुप्ता और बीआरएस नगर निवासी उपेश कुमार गुप्ता के खिलाफ (420) के तहत धोखाधड़ी, 465 (जालसाजी), 467 (बहुमूल्य सुरक्षा का धोखा, आदि), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य के लिए जालसाजी), 471 (एक जाली दस्तावेज को वास्तविक रूप में उपयोग करना), 472 (नकली मुहर बनाने, रखने या रखने का इरादा से) के साथ आइपीसी धारा 120 बी के तहत फैसला सुनाया गया है।

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