Lucknow News: विपरीत परिस्थितियों को अपने अनुकूल बनाया जाता है और सफलता हासिल करने के लिए प्रयास किए जाते हैं। लखनऊ की 19 साल की छात्रा सारा मोइन ने इस कथन को सार्थक कर दिखाया है, जिन्होंने आईएससी बोर्ड परीक्षा के 12वीं के नतीजों में 98 प्रतिशत से ज्यादा अंक प्राप्त करके अपने कॉलेज में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। इसमें विशेष बात यह है कि सारा सुनने और देखने में पूरी तरह असमर्थ हैं।
सारा मोइन लखनऊ के क्राइस चर्च कॉलेज में 12वीं की छात्रा थीं। उन्होंने 12वीं की परीक्षा में 98.75 प्रतिशत अंकों के साथ अपने कॉलेज के 258 छात्रों में पहला स्थान हासिल किया है, जिसके चलते चारों तरफ उनकी कामयाबी के चर्चे हो रहे हैं।
दुर्लभ बीमारी ने छीनी आंखों की रोशनी
जब सारा महज चार साल की थी, तब उनकी सारकॉइडोसिस नाम की एक दुर्लभ बीमारी का पता चला था। इसके चलते ही धीरे-धीरे उनकी आंखो की रोशनी चली गई। इसके कुछ साल बाद उन्होंने अपने सुनने की शक्ति भी खो दी। वर्तमान स्थिति में न तो वो सुन पाती हैं, और न ही सुन पाती हैं। वहीं उन्हें बोलने भी दिक्कत होती है।
बेटी की सफलता पर गौरवान्वित पिता मोइन अहमद
अपनी बेटी की सफलता और बीमारी को लेकर सारा मोइन के 56 साल के पिता मोइन अहमद ने कहा, “सार्कोइडोसिस एक दुर्लभ बीमारी है जिसने मेरी बेटी की देखने और सुनने की शक्ति को बहुत कम उम्र में ही छीन लिया।” उन्होंने कहा, “उसकी इस स्थिति के कारण, मैंने क्राइस्ट चर्च कॉलेज में उसका एडमिशन कराया था, जो कि दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष सहायता प्रदान करता था। जब सारा ने कक्षा 10 में 95 प्रतिशत अंक प्राप्त किए, तो इससे उसे यह विश्वास मिला कि वह और भी बेहतर कर सकती है और दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकती है।”
2020 में खुद ले लिया था रिटायरमेंट
उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में सहयोग देने के लिए 2020 में अपनी मर्जी से ही रिटायरमेंट ले लिया था। वे लखनऊ के हुसैनगंज इलाके में रहते हैं, और अपनी बेटी को प्रतिदिन क्राइस्ट चर्च कॉलेज ले जाते थे। कॉलेज में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एक विशेष डिपार्टमेंट हैं, जहां विशेष प्रशिक्षण वाले शिक्षक भी हैं।
मोइन अहमद ने कहा, “कॉलेज ने सारा की सुनने और देखने से जुड़ी समस्या के चलते अलग से क्लासेज लगाई थीं। मैंने अपनी नौकरी से रिटायरमेंट इसीलिए ले लिया, जिससे मैं सारा की पूरी देखभाल कर सकूं। ऐसी कठिनाइयों का सामना कर रहे बच्चे को निरंतर ध्यान, धैर्य और असाधारण सहायता की आवश्यकता होती है।”
बेटी की सफलता का शिक्षक को दिया क्रेडिट
सारा के परिवार की बात करें तो उनकी मां जुली हामिद एक सरकारी स्कूल में अध्यापक हैं। सारा का एक बड़ा भाई भी है, जो कि वकील है। उसके पिता अहमद ने कहा कि सारा की सफलता का मार्ग उसके शिक्षक सलमान अली काज़ी के असाधारण समर्पण से भी तय हुआ है। उन्होंने कहा, “मेरी बेटी को कॉलेज में टॉप करने में उन्होंने असाधारण प्रयास किए। उसे सर्वोत्तम संभव शिक्षण सहायता और विशेष ध्यान दिया गया। उसके शिक्षक उसे प्यार से ‘हेलेन केलर’ कहते हैं।”
सारा के शिक्षक सलमान अली ने कहा, “क्राइस्ट चर्च कॉलेज ने 2014 में विशेष जरूरतों वाले बच्चों के लिए अपना अनुभाग शुरू किया था और वह तब से इस विभाग का हिस्सा हैं।” उन्होंने कहा, “हमारे विशेष शिक्षा विभाग में वर्तमान में 33 दृष्टिबाधित छात्र हैं, लेकिन सारा की मुश्किलें काफी ज्यादा है, क्योंकि वह सुन भी नहीं सकती हैं।”
पढ़ाने में हुआ सबसे बेहतरीन तकनीक का इस्तेमाल
सलमान अली ने कहा, “सारा को सीखने और आगे बढ़ने में मदद करने के लिए हमने उपलब्ध सर्वोत्तम तकनीक का इस्तेमाल किया और यह सुनिश्चित किया कि उसे उन बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक सहायता मिले।” सलमान अली ने कहा कहा कि सारा को डिजिटल रूप से पढ़ाई करने में मदद करने के लिए उन्होंने ब्रेल लिपि पर आधारित एक गैजेट, ऑर्बिट रीडर का इस्तेमाल किया।
सलमान ने कहा, “उसकी किताबों को स्कैन करके वर्ड फाइलों में बदला गया और फिर उन्हें उपकरण से जोड़ा गया ताकि वह छूकर पढ़ सके। उसे व्यक्तिगत रूप से पढ़ाया जाता था। मैं संकेतों और सहायक तकनीक का उपयोग करके उसे एक-एक लेसन समझाता था।।” उन्होंने बताया, “परीक्षाओं के लिए, सारा ने लैपटॉप से जुड़े एक रिफ्रेशेबल ब्रेल डिस्प्ले का उपयोग किया। उसके प्रश्न पत्रों को ब्रेल भाषा में बदला गया, जिससे वह स्वतंत्र रूप से पढ़ने में सक्षम भी हो पाई, और उसके उत्तरों को बाद में मूल्यांकन के लिए सामान्य जवाबों में बदला गया।”
प्रधानाचार्य ने बताया सारा को प्रेरणा
बता दें कि सारा कक्षा 1 से ही क्राइस्ट चर्च कॉलेज की छात्रा रही हैं और उसके शिक्षकों के सहयोग ने उसकी सफलता में सबसे अहम भूमिका निभाई है। सारा के स्कूल के प्रधानाचार्य एनोश चट्री ने बताया कि इस वर्ष आईएससी परीक्षा में शामिल हुए 258 छात्रों में से दो छात्र संस्थान के विशेष शिक्षा विभाग से थे। उन्होंने कहा, “सारा सभी छात्रों में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाली छात्रा बनकर उभरी है और उसकी यह उपलब्धि सभी के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है।
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