उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बिल्डिंग में भीषण आग लग गई। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई है। लखनऊ में लगी आग में बाल-बाल बचने वालों में मेरठ के 29 साल के ग्राफिक आर्टिस्ट गौरव कुमार भी थे। आग और धुएं की वजह से ज़मीन तक जाने के सुरक्षित रास्ते बंद हो जाने के बाद, वे जलती हुई बिल्डिंग के ऊपरी फ्लोर से केबल का इस्तेमाल करके नीचे उतरे। गौरव कुमार बिल्डिंग से बाहर निकलने वाले आखिरी लोगों में से थे।
गौरव कुमार ने कहा, “हमने सबसे पहले निचले फ्लोर से आग की लपटें उठती देखीं। थोड़ी ही देर में, आग दूसरे फ्लोर की तरफ फैल गई, जहां हमारा स्टूडियो है।” गौरव कुमार पिछले 5 सालों से हेड हॉपर स्टूडियो में काम कर रहे हैं, जो 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम डेवलपमेंट करने वाली कंपनी है और बिल्डिंग के दूसरे फ्लोर पर है। उन्होंने कहा, “उस समय स्टूडियो में करीब 24 से 25 लोग मौजूद थे।”
बिजली का केबल पकड़ नीचे उतर रहे थे लोग
गौरव कुमार ने कहा, “एक-एक करके लोग केबल का इस्तेमाल करके नीचे उतरने लगे। मैं उस रास्ते से बिल्डिंग से निकलने वालों में सबसे आखिर में था। आग से मेन एग्ज़िट बंद हो गया था और स्टूडियो में तेज़ी से घना धुआं भर गया था, जिससे सांस लेना और भी मुश्किल हो गया था। हमारी आंखें जल रही थीं और हममें से कई लोगों को चक्कर आने लगे थे और वे बेहोश हो रहे थे। धुआं इतना घना था कि वह हमारे मुंह में जा रहा था और साफ-साफ सोचना मुश्किल हो रहा था।”
आसिफ ने क्या बताया?
लखनऊ के एक और ग्राफिक आर्टिस्ट 29 साल के आसिफ ने भी नीचे आने के लिए केबल का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि आग का पता चलने के बाद शुरुआती पलों में कुछ कर्मचारी सीढ़ियों का इस्तेमाल करके निकलने में कामयाब रहे। लेकिन, जैसे-जैसे आग तेज़ होती गई और ऊपर की ओर फैली, सीढ़ियां और भी खतरनाक होती गईं। उन्होंने कहा, “धुआं और आग पास आने पर हममें से कई लोगों को एहसास हुआ कि बाहर निकलने का आम रास्ता अब शायद सुरक्षित नहीं रहा।”
कम विकल्प होने पर अंदर मौजूद लोग बचने के दूसरे रास्ते खोजने लगे। आसिफ ने कहा कि उन्होंने सुरक्षित रास्ता खोजने और बिल्डिंग के बाहर के हालात का अंदाज़ा लगाने की कोशिश में खिड़कियां खोलीं। तभी उन्होंने छत से नीचे एक मोटा, बिना इस्तेमाल किया हुआ बिजली का केबल देखा।
आसिफ ने आगे कहा कि इसके बाद के तनाव भरे मिनटों में, मज़दूरों ने बिल्डिंग के बाहर चढ़ने के खतरे को अंदर के धुएं और आग से बढ़ते खतरे से तौला। आसिफ ने कहा कि आग तेज होने के कारण बचने के रास्ते के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा केबल भी गर्म हो गया था, जिससे उसे ज़्यादा देर तक पकड़ना मुश्किल हो गया था। उन्होंने कहा, “हममें से कई लोगों को अपनी पकड़ बनाए रखने में मुश्किल हो रही थी। मेरे एक साथी, जयंत गुप्ता, अब गर्मी बर्दाश्त नहीं कर सके और उन्हें काफी ऊंचाई से कूदना पड़ा।” आसिफ के मुताबिक जमीन पर गिरने के बाद जयंत गुप्ता की पीठ में चोटें आईं।
कैसे बचे पंकज?
एक और ग्राफिक आर्टिस्ट, 24 साल के पंकज गोस्वामी ने कहा कि परेशानी के पहले संकेत लंच के तुरंत बाद दिखाई दिए। उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रहने वाले और पिछले एक साल से स्टूडियो में काम कर रहे पंकज गोस्वामी ने कहा, “हमने नीचे के फ्लोर से जलने की तेज गंध महसूस की। यह तुरंत साफ हो गया कि कुछ गड़बड़ है। जब हमने नीचे देखा, तो हमें निचले फ्लोर पर आग की लपटें दिखीं, जिसे पेट शॉप गोदाम के तौर पर इस्तेमाल कर रही थी।”
खतरे को भांपते हुए पंकज गोस्वामी ने अपने साथियों को अलर्ट किया और उनसे खाली करने को कहा। उन्होंने कहा, “मैंने तुरंत ऑफिस में सबको बताया। फिर मैं सीढ़ियों की तरफ भागा और बिल्डिंग से बाहर निकलने में कामयाब रहा। हालात बिगड़ने से पहले कुछ और लोग भी मेरे साथ सीढ़ियों का इस्तेमाल करके भाग निकले।” जब उनसे पूछा गया कि उनके कुछ साथी बिल्डिंग के अंदर कैसे फंस गए, तो उन्होंने कहा, “धुआं बहुत तेज़ी से फैला। मुझे शक है कि उनमें से कुछ बेहोश हो गए और बाहर नहीं निकल पाए। मुझे बताया गया है कि हमारे काम की जगह के 15 लोगों की आग में जान चली गई।”
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