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यूपीः लखनऊ DM ने इमामबाड़े में प्रवेश को लेकर जारी कराया ड्रेस कोड, कहा- सिर्फ ‘सभ्य कपड़ों’ वालों को ही मिलेगी एंट्री

लखनऊ के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) ने ऐतिहासिक इमारतों में प्रवेश को लेकर ड्रेस कोड जारी किया है। इसके अलावा ऐतिहासिक इमारतों में कैमरे, ट्राइपॉड, वीडियो कैमरा आदि ले जाना प्रतिबंधित किया है।

Author नई दिल्ली | Published on: June 30, 2019 8:46 AM
साल 2015 में शिया समुदाय ने प्रशासन से इमामबाड़े में प्रवेश के लिए ड्रेसकोड की मांग की थी। (फाइल फोटो)

उत्तरप्रदेश की राजधानी में ऐतिहासिक इमारतों में प्रवेश के लिए प्रशासन की तरफ से ड्रेस कोड जारी किया है। ड्रेस कोड जारी होने के बाद यूपी के छोटा और बड़ा इमामबाड़े में ‘भड़काऊ कपड़े’ पहनने वालों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इतना ही छोटा और बड़ा इमामबाड़ा में प्रवेश के समय लोगों को इमारत की दो शताब्दी पुराने ऐतिहासिक इमारत की गरिमा को ध्यान में रखते हुए कपड़े पहनने होंगे।

इसके साथ ही इमारत की परिसर में प्रोफेशनल फोटोग्राफी, वीडियो शूट करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह निर्णय जिला प्रशासन की तरफ से शिया समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग को सम्मान देते हुए शनिवार को मीटिंग के बाद लिया गया। लखनऊ की डीएम कौशल राज शर्मा ने नया ड्रेस कोड जारी किया। उन्होंने कहा कि छोटा और बड़ा इमामबाड़ा में केवल ‘सभ्य कपड़े’ वालों को ही प्रवेश करने की अनुमति होगी।

इससे पहले प्रशासन की साथ हुई बैठक में हुसैनाबाद अलाइड ट्रस्ट के प्रतिनिधि और भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारी भी शामिल हुए।  एएसआई की तरफ से संरक्षित इमारत की देखभाल का जिम्मा इस ट्रस्ट के पास ही है। डीएम शर्मा ने कहा कि गार्ड और गाइड को इस बाद के निर्देश दे दिए गए हैं कि वे असामान्य ढंग के कपड़े पहनने वालों के प्रवेश को बाधित करें। इसके साथ ही इस बात पर नजर रखें कि ‘धार्मिक भावनाएं’ आहत ना हो।

डीएम ने कहा कि इन इमारतों में स्टिल और प्रोफेशनल वीडियो कैमरा, ट्राइपॉड ले जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। इसके अलावा एएसआई ने मौसम से प्रभावित हुए इस इन इमारतों के हिस्से को जीर्णोद्धार करने का भी आदेश दिया है। ‘भड़काऊ कपड़े’ पहन कर पर्यटकों के परिसर में घूमने पर शिया धर्मगुरुओं, इतिहासकारों और सिविल सोसाइटी के सदस्यों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, एएसआई को इस संबंध में कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा था।

इन लोगों की मांग थी कि अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की तर्ज पर क्यों ना इमामबाड़े में आने वाले लोगों के लिए आचार संहिता अनिवार्य कर दी जाए। इससे पहले साल 2015 में भी शिया समुदाय की तरफ से विरोध प्रदर्शन के बाद इमामबाड़ा में प्रवेश करने वालों के लिए ड्रेस कोड के आदेश दिए गए थे। हालांकि, कुछ समय बाद इसका पालन बंद हो गया था।

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