ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के चलते देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों और ईंधन की कमी देखने को मिल रही है। कई हिस्सों में सिलेंडर न मिलने के चलते दुकानों, रेस्टोरेंट्स को बंद करना पड़ा है। वहीं, कई रेस्टोरेंट और ढाबों ने खाने के दाम बढ़ा दिए हैं। महंगे और मुश्किल से मिल रहे एलपीजी सिलेंडरों की कमी का असर अब बिलों में दिखने लगा है।

लोअर परेल स्थित उडुपी श्री कृष्णा के मालिक और इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय शेट्टी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि एलपीजी की कमी के चलते मुंबई के अधिकांश भोजनालयों ने पहले ही कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। उन्होंने कहा, “सब्जियां, खाद्य तेल, डिलीवरी के लिए प्लास्टिक के डिब्बे, इंडक्शन स्टोव जो कई लोगों को रातोंरात खरीदने पड़े, इन सबका खर्च बढ़ गया है।” उन्होंने आगे कहा कि उनके अधिकांश सदस्यों ने कीमतें बढ़ा दी हैं।

रेस्टोरेंट में बढ़ीं फूड आइटम्स की कीमतें

उडुपी श्री कृष्णा में कीमतों में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वेज सैंडविच, जिसकी कीमत पहले 70 रुपये थी, अब 90 रुपये में उपलब्ध है; पाव भाजी की कीमत में 15 रुपये, चीज़ पाव भाजी की कीमत में 20 रुपये और उत्तपम की कीमत में 15 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।

ब्लैक मार्केट में एक सिलेंडर की कीमत 4000 रुपये या उससे अधिक हो गई है। विजय शेट्टी का कहना है कि स्थिति में सुधार हुआ है लेकिन पर्याप्त नहीं। उन्हें प्रतिदिन एक एलपीजी सिलेंडर की जरूरत होती है लेकिन हफ्ते में एक या दो सिलेंडर ही मिलते हैं। शेट्टी ने बताया, “हमारी आवश्यकता का 20 प्रतिशत भी बहुत कम है हमें कर्मचारियों के लिए खाना बनाने में ही इतना सिलेंडर चाहिए होता है। उनके मेन्यू में 30 प्रतिशत की कमी कर दी गई है।” विजय शेट्टी ने कहा, “महामारी के दौरान, रेस्टोरेंट को आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में रखा गया था। इस बार ऐसा नहीं हुआ है जबकि लाखों लोग अपने खाने के लिए हम पर निर्भर हैं।”

रेस्टोरेंट और ढाबों को नहीं मिल रहे सिलेंडर

सीएसएमटी स्थित आराम वड़ा पाव में अभी तक कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया है लेकिन फैसला हो चुका है। 13 अप्रैल से हर चीज़ की कीमत 7 से 10 प्रतिशत बढ़ जाएगी। व्यवसाय को चला रहे 55 वर्षीय कौस्तुभ तांबे ने कहा, “तेल की कीमत एक महीने में 100 से 125 रुपये बढ़ गई है। कोयला, जिसका इस्तेमाल हमने मजबूरी में शुरू किया था, 38 रुपये से बढ़कर 60 रुपये हो गया है।” पिछले हफ्ते उन्हें दो सिलेंडरों की दैनिक आवश्यकता के मुकाबले केवल चार सिलेंडर मिले।

118 साल पुरानी अमेरिकन एक्सप्रेस बेकरी में बिजली और डीजल से चलने वाले ओवन से बेकिंग का काम तो चल रहा है लेकिन पफ और सैंडविच की फिलिंग के लिए गैस की जरूरत होती है। मालिक योहन कार्वाल्हो ने बताया, “यह एक चुनौती है क्योंकि उन्हें हर 20 से 25 दिन में एक सिलेंडर मिलता है। हमने थोक ऑर्डर लेना बंद कर दिया है और उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की कटौती की है। ब्रेड और अन्य मुख्य उत्पादों की कीमतें स्थिर रहेंगी लेकिन हमें पफ और सैंडविच की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी करनी होगी जो संभवतः मई के मध्य से अंत तक होगी।”

रेस्टोरेंट्स के मेन्यू में बदलाव

कालबादेवी स्थित झामा स्वीट्स में विकी लुल्ला ने डीजल से चलने वाली भट्टियों और इंडक्शन ओवन की व्यवस्था करने से पहले कुछ दिनों के लिए उत्पादन पूरी तरह रोक दिया। जलेबियां जिन्हें लगातार तेज आंच पर पकाना पड़ता है अब इंडक्शन ओवन पर पकाई जा रही हैं। उन्होंने कहा, “हमने अभी तक कीमतें नहीं बढ़ाई हैं लेकिन अगर यह सिलसिला नहीं रुका तो हमें बढ़ाना पड़ सकता है।”

हालांकि, जिन लोगों को कुछ हद तक स्थिरता मिली है वे जुगाड़ से काम चला रहे हैं। होटल सदानंद में अभिषेक शेट्टी को पिछले हफ्ते तीन सिलेंडर मिले और इस हफ्ते दो और मिलने की उम्मीद है। उन्होंने एलपीजी के लिए आवेदन भी कर दिया है। उन्होंने कहा, “अभी हमें अपनी एलपीजी खपत का 20 से 30 प्रतिशत मिल रहा है और इससे हमें आगे बढ़ने में मदद मिल रही है।”

संकट से जूझते ढाबे और रेस्टोरेंट्स, लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर

देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की कमी देखने को मिल रही है। कई हिस्सों में सिलेंडर न मिलने के चलते दुकानों, रेस्टोरेंट्स को बंद करना पड़ा है। ऐसे ही उत्तराखंड में भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की कमी से ढाबों और सड़क किनारे के छोटे भोजनालयों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनके कामकाज में दिक्कत हो रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें