बांकीपुर उपचुनाव की हार ने भाजपा हाईकमान को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। पार्टी की समीक्षा रिपोर्ट में हार की सबसे बड़ी वजह जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के नैरेटिव का जवाब नहीं दे पाना बताया गया है यानी किशोर के नैरेटिव का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में विफल होना। हालांकि, भाजपा ने साफ किया है कि वह इस हार को लेकर किसी पर कोई कार्रवाई नहीं करेगी।
भाजपा का मानना है कि चुनाव में लड़ाई सिर्फ वोटों की नहीं, बल्कि उन कहानी और संदेश की भी थी, जो प्रशांत किशोर लगातार यह मुद्दा उठा रहे थे कि तीन दशक से भाजपा के कब्जे वाले बांकीपुर क्षेत्र को पार्टी ने अपना सुरक्षित गढ़ मानकर जनता को नजरअंदाज किया।
बिहार भाजपा की समीक्षा में यह निष्कर्ष निकला है कि किशोर के इस आरोप का खंडन करने में विफल रहने के कारण पार्टी नैरेटिव की लड़ाई हार गई है कि तीन दशकों से भाजपा का गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर के मतदाताओं को हल्के में लिया गया था। हार के बावजूद, पार्टी ने तत्काल संगठनात्मक बदलाव संभावना से इनकार किया है।
बांकीपुर सीट से भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को प्रशांत किशोर ने 19,324 मतों से मात दी है। इस सीट से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन पांच बार विधायक चुने गए हैं।
समीक्षा बैठक में शामिल हुए एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि हमने बांकीपुर के नतीजों और पार्टी के आगामी कार्यक्रमों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं से मिली प्रतिक्रिया से साफ पता चलता है कि हम प्रशांत किशोर द्वारा गढ़े गए नैरेटिव का मुकाबला करने में नाकाम रहे।
अपने चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने बार-बार यह कहा था कि भाजपा बांकीपुर के मतदाताओं के साथ ” बंधुआ मजदूरी ” जैसा व्यवहार कर रही है, लेकिन भाजपा की समीक्षा में किशोर के इस आरोप को विशेष रूप से नुकसानदेह पाया गया कि भाजपा का मानना था कि “एक बिल्ली या कुत्ता भी पार्टी टिकट पर सीट जीत सकता है”।
भाजपा नेता ने कहा कि हालांकि पटना साहिब के सांसद रवि शंकर प्रसाद समेत वरिष्ठ नेताओं ने प्रशांत किशोर की टिप्पणियों के संदर्भ को स्पष्ट करने की कोशिश की। फिर भी हमारी प्रतिक्रिया कहीं ज्यादा आक्रामक होनी चाहिए थी। इसके अलावा, चूंकि बांकीपुर के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा को हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का पूरा समर्थन प्राप्त था, इसलिए राज्य इकाई ने चुनाव प्रचार के दौरान इस मुद्दे को आक्रामक रूप से उठाने में संकोच किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या उम्मीदवार के खिलाफ कोई आपत्तियां उठीं, तो नेता ने इससे इनकार किया।
नेता ने कहा कि हम ऐसे मामलों पर बहस नहीं करते क्योंकि पार्टी जमीनी स्तर के कार्यकर्ता को टिकट देने के पक्ष में मजबूती से खड़ी रही। हम झूठ पर आधारित एक कहानी के कारण हार गए। हमारे किसी भी नेता ने कभी भी ‘कुत्ता-बिल्ली’ जैसी कोई टिप्पणी नहीं की।
बांकीपुर में मिली हार को भुलाकर भाजपा अब आगामी दो राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियानों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। जिनमें कलश और तिरंगा यात्राएं शामिल हैं।
संत रविदास की 650वीं जयंती के उपलक्ष्य में शुरू की गई कलश यात्रा के तहत अगले सप्ताह से वाराणसी स्थित उनके जन्मस्थान की पवित्र मिट्टी से भरे कलशों को विभिन्न राज्यों में ले जाया जाएगा। इसी बीच, 10 से 15 अगस्त तक चलने वाली तिरंगा यात्रा में पार्टी के युवा विंग के नेतृत्व में साइकिल रैलियां, पदयात्राएं और जनसभाएं शामिल होंगी।
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बिहार के बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में बड़ा उलटफेर हुआ है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बीजेपी के नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों से हरा दिया। वहीं आरजेडी तीसरे नंबर पर रही। प्रशांत किशोर की जीत और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट पर बीजेपी को मिली हार पार्टी के लिए बड़ा झटका है। प्रशांत किशोर काफी समय से बिहार में काम कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर।
