उपचुनाव में हारे, अब आरोपों का दौर

हिमाचल के उपचुनावों में भाजपा के चारों सीटों पर बुरी तरह से हार जाने के बाद अब मंथन का दौर शुरू होने वाला है।

जय राम ठाकुर।

ओमप्रकाश ठाकुर

हिमाचल के उपचुनावों में भाजपा के चारों सीटों पर बुरी तरह से हार जाने के बाद अब मंथन का दौर शुरू होने वाला है। हालांकि हार कारणों का तो प्रदेश से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक भाजपा व आरएसएस में सभी को पता है लेकिन अब औपचारिकताओं का दौर तो पूरा करना ही है। इन चुनावों में भाजपा के बड़े-बड़े रणनीतिकार विफल हो गए। अर्की विधानसभा हलके का प्रभारी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष राजीव बिंदल को बनाया गया था।

उन्हें लेकर भाजपा में यह भ्रम है कि वे कोई चुनाव नहीं हारते हैं। वे जोड़-तोड़ के माहिर माने जाते हैं। लेकिन अर्की में वे बुरी तरह विफल हुए हैं। अब वे इल्जामों के घेरे में आ जाएं तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इससे पहले उनकी कमान में भाजपा सोलन नगर निगम का चुनाव भी हार चुकी है। सबसे ज्यादा फजीहत भाजपा की हुई जुब्बल कोटखाई में। यहां पर भाजपा ही नहीं प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा की प्रतिष्ठा पर आंच आई। यहां भाजपा प्रत्याशी की जमानत ही जब्त हो गई। यहां पर भाजपा की प्रत्याशी नीलम सरैक तीन हजार मत भी हासिल नहीं कर पाई।

मंडी संसदीय हलके का प्रभारी जयराम ठाकुर ने बड़े सोच विचार के बाद अपने सबसे ताकतवर मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर को बनाया था। उनको लेकर भी भाजपा में भ्रम था कि वह कोई भी अंसभव काम करने का माद्दा रखते हैं। लेकिन मंडी संसदीय हलके में महेंद्र सिंह ही नहीं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी बुरी तरह से विफल हो गए। यह सीट तो उनकी प्रतिष्ठा से जुड़ी हुई थी। जयराम व महेंद्र सिंह ठाकुर अपने गृह जिले में हार गए।

उधर, प्रदेश के सबसे बड़े जिले कांगड़ा के फतेहपुर हलके में जिले के सबसे ताकतवर दो मंत्रियों वन मंत्री राकेश पठानिया व बिक्रम सिंह पठानिया को सीट निकालने की जिममेदारी दी गई थी। ये दोनों मंत्री भी विफल हो गए। इन उपचुनावों में मुख्यमंत्री ही नहीं, उनकी पूरी केबिनेट नाकाम रही। मुख्यमंत्री कार्यालय में बिठाए गए आरएसएस के तमाम नेता व उनकी रणनीति को कांग्रेस ने विफल कर दिया। 2017 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती नजर नहीं आने लगी तो सिरमौर की एक जनसभा में अमित शाह ने धूमल को मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। तब तक मोदी व शाह बहुत कुछ समझ चुके थे।

लेकिन न जाने यह बात मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, आरएसएस में उनके शुभचिंतकों व अन्य मित्रमंडली को अब तक समझ क्यों नहीं आई। प्रदेश का एकछत्र नेता बनने की ललक ने जयराम ठाकुर की कुर्सी को ही खतरे में डाल दिया। अगर धूमल को इन चुनावों का प्रभार दे दिया होता तो क्या जुब्बल कोटखाई में भाजपा प्रत्याशी की जमानत जब्त होती? आलाकमान को अब तो यह बात समझ आ ही जानी चाहिए।

अब भाजपा में अटकलों का बाजार गर्म है कि आलाकमान गुजरात की तरह मुख्यमंत्री समेत पूरे मंत्रिमंडल को बदल डालेगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, उनकी पूरी मित्रमंडली, आरएसएस का बड़ा खेमा जिन धूमल को चार सालों से ठिकाने लगाने में जुटा हुआ था, इन उपचुनावों में वे खुद ही ठिकाने लग गए। सबसे ज्यादा फजीहत भाजपा की हुई जुब्बल कोटखाई में। यहां भाजपा प्रत्याशी की जमानत ही जब्त हो गई। जुब्बल कोटखाई हलके के प्रभारी शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज बनाए गए थे। वे एक अरसे से मुख्यमंत्री बनने का सपना भी पाले हुए हैं।

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