ताज़ा खबर
 

उलझन: भाजपा में चल रहा शह और मात का खेल

नामों के एलान के बाद भाजपा के प्रत्याशियों के लिए यह घमासान भी एक बड़ी चुनौती होगा। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी एक-दो दिन में सभी सात सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों का एलान कर सकती है।

Author April 15, 2019 5:02 AM
भारतीय जनता पार्टी का झंडा फोटो सोर्स- जनसत्ता

पंकज रोहिला 

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के चुनावी घमासान के बीच फंसी भाजपा में भी अंदरूनी कलह कम नहीं है। टिकट की दौड़ के लिए भाजपा में भी हर दिन शह और मात का खेल चल रहा है। नामों के एलान के बाद भाजपा के प्रत्याशियों के लिए यह घमासान भी एक बड़ी चुनौती होगा। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी एक-दो दिन में सभी सात सीटों के लिए अपने प्रत्याशियों का एलान कर सकती है। लोकसभा चुनाव के लिए 16 अप्रैल से दिल्ली में नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू होनी है।

कोर टीम से भेजे गए नामों के बाद से ही पार्टी भी अपने स्तर पर नामों को लेकर सर्वे करा रही है। इसके लिए चार विदेशी एजंसियों की मदद ली जा रही है। जो काम व नाम के आधार पर जमीनी हकीकत को तलाश रही हैं। सर्वे का आकलन ही उम्मीदवारों के नाम तय करेगा। अब तक भाजपा इंतजार कर रही थी कि विपक्षी दलों के प्रत्याशियों के नामों को जाना जा सके लेकिन इसी बीच भाजपा में हर दिन शह-मात का खेल चल रहा है। जो वर्तमान सांसदों के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। इसमें पार्टी तक पहुंचाई जा रही शिकायती चिट्ठियां भी शामिल हैं। इससे तय है कि टिकट पाने के बाद भी प्रत्याशियों के लिए चुनाव की घड़ी बड़ी परीक्षा साबित होगी और उन्हें विपक्ष के साथ अपनों के हमले भी झेलने होंगे।

अब तक जिन नामों की सबसे अधिक चर्चा है। उनमें उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लिए मनोज तिवारी व दीपक मिश्रा, पूर्वी दिल्ली में महेश गिरी व ओपी शर्मा, नई दिल्ली में मीनाक्षी लेखी व गौतम गंभीर, उत्तर पश्चिम के लिए उदित राज व अनिता आर्य, चांदनी चौक के लिए डॉ हर्षवर्धन व विजय गोयल, पश्चिमी दिल्ली के लिए प्रवेश वर्मा व कमलजीत सहरावत और दक्षिणी दिल्ली के लिए रमेश बिधूड़ी व ब्रह्म सिंह तंवर का नाम बताया जा रहा है। इसके अलावा कुछ अन्य नाम भी पार्टी के समक्ष भेजे गए हैं।

असमंजस में मौजूदा सांसद
नामों की घोषणा होने की वजह से दिल्ली के मौजूदा सांसदों में असंमजस की स्थिति बनी हुई है। वे समझ नहीं पा रहे हैं कि किस आधार पर जनता के बीच जाकर वोट मांगा जाए। हालांकि कई सांसद दावा कर रहे हैं कि पार्टी ने उन्हें जमीनी स्तर पर काम करने का ग्रीन सिग्नल दिया है। हालांकि इस सिग्नल को भी सांसद नाम तय होने के आखिरी दिन तक सही नहीं मान रहे हैं। डर इस बात का भी है कि अगर सभी सीटों के प्रत्याशियों में बदलाव होता है तो वर्तमान सांसदों को परेशानी हो सकती है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App