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मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे भीम आर्मी के चंद्रशेखर, बोले- संविधान पर आंच आई तो भीमा-कोरेगांव दोहरा देंगे

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि वह राजनेता नहीं बनना चाहते, केवल मोदी को यह संदेश देना चाहते हैं कि देश में कोई है जो उन्हें वापस गुजरात भेजने की ताकत रखता है।

भीम आर्मी नेता चंद्रशेखर आजाद फोटो सोर्सः इंडियन एक्सप्रेस

Lok Sabha Election 2019 से पहले भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने शुक्रवार (15 मार्च) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ वाराणसी से चुनाव लड़ने का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने बड़ा बयान देते हुए प्रधानमंत्री को दलित विरोधी करार दिया और कहा कि जिस दिन संविधान पर आंच आई उसकी भीमा-कोरेगांव दोहरा देंगे। उन्होंने लोगों बीजेपी से सत्ता छीनने की अपील भी की।

राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर एक हुंकार रैली को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर ने कहा, ‘मैं बनारस जा रहा हूं और मुझे उन्हें (नरेंद्र मोदी) हराने के लिए आपकी मदद की जरुरत है। मैं वहां जा रहा हूं क्योंकि वो दलित विरोधी हैं। उन्हें पता होना चाहिए कि उन्हें इसकी सजा मिलेगी। लोकतंत्र में जनता ही सबकुछ है।’

पीएम मोदी के कुंभ में सफाई के लिए काम करने वालों के पैर धोने पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, ‘जब मैंने उनके खिलाफ बनारस से लड़ने का ऐलान किया तो वे हमारे भाइयों के पैर धोते नजर आए।’ उन्होंने मतदाताओं से वोटिंग से पहले रोहित वेमुला को भी याद करने के लिए कहा। उन्होंने कहा, ‘मैं राजनेता नहीं बनना चाहता। मैं मोदी को यह संदेश देना चाहता हूं कि देश में कोई है जो उन्हें आसानी से जीतने नहीं देगा। मैं बहुजन का बेटा हूं। कोई है जो उन्हें वापस गुजरात जाने के लिए मजबूर कर सकता है।’

 

उल्लेखनीय है कि गुरुवार (14 मार्च) को उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को रोहित वेमुला की हत्या का जिम्मेदार बताते हुए उनके और पीएम मोदी के खिलाफ काम करने का ऐलान किया था।

चंद्रशेखर बोले, भीमा-कोरेगांव दोहरा देंगे: चंद्रशेखर ने दिल्ली में यह भी कहा, ‘वोट देने से पहले रोहित की शहादत याद रखना। अत्याचारी, अत्याचारी होता है, वो कभी तुम्हारा हितैषी नहीं हो सकता। इसलिए मैंने कहा भीमा-कोरेगांव दोहरा देंगे, अभी उसकी जरुरत नहीं है, जिस दिन देश के संविधान पर आंच आई, भीमा-कोरेगांव दोहरा देंगे।’ उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित भीमा-कोरेगांव इलाके में 1 जनवरी 2018 को हिंसा हो गई थी। यह हिंसा महाराष्ट्र के महार समाज के लोगों की मदद से पेशवाओं पर अंग्रेजों की जीत की 200वीं बरसी पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान शुरू हुई थी।

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