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भाजपा से पांच सालों का हिसाब मांगते लोग

एटा लोकसभा सीट के 14 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला तीसरे चरण में 23 अप्रैल को यहां के मतदात करेंगे। इस सीट पर भाजपा ने राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के बेटे व सांसद राजवीर सिंह (राजू भइया) को उम्मीदवार बनाया हैं, वहीं सपा-बसपा महागठबंधन के उम्मीदवार कुंवर देवेंद्र सिंह यादव भी दूसरी बार चुनाव मैदान में हैं।

Author एटा | April 19, 2019 1:18 AM
एटा की जनता बीजेपी से मांग रही 5 साल का हिसाब

सुनील मिश्र

एटा लोकसभा सीट के 14 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला तीसरे चरण में 23 अप्रैल को यहां के मतदात करेंगे। इस सीट पर भाजपा ने राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह के बेटे व सांसद राजवीर सिंह (राजू भइया) को उम्मीदवार बनाया हैं, वहीं सपा-बसपा महागठबंधन के उम्मीदवार कुंवर देवेंद्र सिंह यादव भी दूसरी बार चुनाव मैदान में हैं। इनके अलावा कांग्रेस जन अधिकार गठबंधन के उम्मीदवार पूर्व राज्यमंत्री सूरज सिंह शाक्य व प्रसपा उम्मीदवार रश्मि यादव चुनावी रण में है। एटा लोकसभा सीट पर मुकाबला भाजपा व सपा के बीच होता नजर आ रहा है। भाजपा उम्मीदवार क पक्ष में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनावी सभाएं कर चुके हैं।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी अपने पार्टी के उम्मीदवार के लिए यहां वोट मांग चुके हैं। भाजपा के पक्ष में 20 अप्रैल को एटा के रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए भाजपा उम्मीदवार व भाजपा कार्यकर्ता एडी से चोटी तक का जोर लगा रहे हैं। भाजपा उम्मीदवार सांसद राजवीर सिंह मोदी लहर के चलते अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं। किंतु बीते पांच सालों में जनता से दूरी बनाए रखने के कारण क्षेत्र में वोट मांगने जाने पर उनका विरोध दिखाई दे रहा है।

उनसे पांच सालों में किए गए काम का हिसाब भी लोग मांगते दिखाई दे रहे हैं। इस विरोध को शांत करने के लिए भाजपाई जुटे हुए हैं। अपनी जीत को पक्का करने के लिए भाजपा यहां दूसरे दलों के नेताओं को शामिल कर रही है। गठबंधन के सपा उम्मीदवार को यहां के बसपा समर्थक पचा नहीं पा रहे है। बसपा समर्थक उन पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं।

कांग्रेस गठबंधन से चुनाव मैदान में उतरे सूरज सिंह शाक्य जो भाजपा शासन में राज्य मंत्री रह चुके हैं। शाक्य समाज पर खासा प्रभाव है। और वह भाजपा को जीत दिलाने में अगृणी भूमिका निभाने वाले शाक्य वोट को अच्छी संख्या में काटने में सक्षम है। अब अगर शाक्य व अन्य समाज पर वह अपनी मजबूत पकड़ बनाने में कामयाब हो गए तो भाजपा की नैया पार होना मुश्किल है।

सपा उम्मीदवार देवेंद्र सिंह यादव जहां एक ओर भितरघातियों व पार्टी विरोधी यादव मतदाताओं से चिंतित हैं, वही प्रसपा के यादव व महिला उम्मीदवार के मैदान में आने से सपा को उसके मूल यादव वोटों मेंं बंटने का खतरा दिखाई दे रहा है। वहीं सपा की राह में अभी हाल ही में सपा से टिकट न मिलने से नाराज चल रहे सपा के स्टार प्रचारक बनाए गए पूर्व राज्य मंत्री मानपाल सिंह वर्मा भी सपा को चुनाव में बड़ा झटका दे सकते हैं।

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