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एंबुलेंस नहीं मिलने से हलकान हुए मरीज, ठेले और रिक्शे से ले जाना पड़ रहा अस्पताल

परबत्ती मोहल्ले की पार्वती के बेटे का पैर टूटने की वजह से डॉक्टर के पास ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली। उन्होंने भी बताया कि काफी प्रयास किया। मगर सफलता नहीं मिली।

ठेले पर गांव से अपने पिता को भागलपुर अस्पताल ले जाते सज्जात।

गिरधारी लाल जोशी

कोरोना संक्रमण की वजह से घरबंदी है। इस दौरान दूसरी बीमारी से परेशान मरीजों के इलाज पर सरकार और प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है। इन्हें अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस तक मुहैया नहीं कराई जा रही है। मरीजों को ठेले रिक्शे या रिक्शे में घोड़ा जोड़ मरीजों को गांव-देहात से इनके रिश्तेदारों को लाना पड़ रहा है। निजी वाहन लॉकडाउन की वजह से सड़कों पर चलना बंद है।

गुरुवार को भागलपुर के लोहिया पुल पर ठेले से अस्पताल ले जाते मोहम्मद सज्जात मिले। ये अपने पिता मो. असलम के पैर का इलाज कराने करीब 15 किलोमीटर दूर गढ़ीहोती गांव से भागलपुर लाए हैं। इनका पैर बिजली का करंट लगने की वजह से काटना पड़ा है। इलाज के लिए भागलपुर अस्पताल लाना जरूरी था। इन्होंने बताया कि एम्बुलेंस के लिए काफी कोशिश की। अस्पताल में फोन किया। स्वास्थ्य महकमा के अधिकारियों को फोन किया। मगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। मजबूरी में ठेले पर लाद लाना पड़ा।

इसी तरह परबत्ती मोहल्ले की पार्वती के बेटे का पैर टूटने की वजह से डॉक्टर के पास ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं मिली। उन्होंने भी बताया कि काफी प्रयास किया। मगर सफलता नहीं मिली। तो ठेले पर इलाज के लिए निजी डॉक्टर के क्लिनिक ले जा रहे है।

परबत्ती से अपने बेटे का इलाज कराने ठेले पर अस्पताल ले जाती पार्वती।

भागलपुर के थाना कोतवाली इलाके के 66 साल के बुजुर्ग दीवान चंद शर्मा की कमर की हड्डी टूट गई। इनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं है। इन्होंने बताया कि इलाज के लिए स्वास्थ्य महकमा से लेकर जिला प्रशासन को फोन और संदेश भेज दरवाजा खटखटाया। इसके बाद एम्बुलेंस आई और सदर अस्पताल ले गई। एक्स-रे करवाया और जवाहरलाल नेहरू भागलपुर मेडिकल कालेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां के प्रशासन ने नालंदा ज़िले के पावापुरी अस्पताल ले जाने का फरमान दिया।

दीवान चंद बताते है कि उनके पास पैसे के नाम पर ढेला नहीं है। और न कोई आदमी। पावापुरी किसके सहारे जाएं। वे लौटकर घर आ गए। और बेतहाशा दर्द से कराहते रहे। इस ओर मारवाड़ी सम्मेलन के अधिकारी का ध्यान गया तो पूर्व महापौर दीपक भुवानिया, श्रवण बाजोरिया, शिव कुमार अग्रवाल, रामगोपाल पोद्दार और प्रो.शिव कुमार सरीखे जिले के उदारमन लोगों ने निजी क्लिनिक में भर्ती करा आज उनका ऑपरेशन कराया। और करीब एक लाख रुपए का सारा खर्च इन लोगों ने वहन किया है। सरकारी इंतजाम की पोल खोलने के वास्ते ये मिसाल काफी है। रोजाना सैकड़ों मरीज जेएलएन मेडिकल कालेज अस्पताल और सदर अस्पताल के बीच पिस रहे है

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