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यूपी: कर्ज नहीं चुका सका तो दलित किसान को ट्रैक्‍टर के नीचे कुचला, फायनेंस कंपनी के 5 एजेंट्स पर FIR

पुलिस ने बताया है कि फायनेंस कंपनी के लोन रिकवरी एजेंट्स पर दलित किसान को ट्रैक्टर से कुचल कर मार डालने का आरोप लगा है। यह आरोप मृत किसान के भाई ने लगाया है। पांच एजेंट्स के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

यह तस्वीर प्रतीक के तौर पर इस्तेमाल की गई है।

उत्तर प्रदेश के सीतापुर से दिल दहला देने वाली एक घटना सामने आई है। यहां भउरी गांव के एक दलित किसान की ट्रैक्टर के नीचे कुचल कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया है कि फायनेंस कंपनी के लोन रिकवरी एजेंट्स पर दलित किसान को ट्रैक्टर से कुचल कर मार डालने का आरोप लगा है। यह आरोप मृत किसान के भाई ने लगाया है। सीतापुर के सहायक पुलिस अधीक्षक मारतंड प्रकाश सिंह ने जानकारी दी है कि पांच एजेंट्स के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक पुलिस ने बताया कि भउरी गांव के 45 वर्षीय ज्ञान चंद्र ने साल 2015 में फायनेंस कंपनी से 5 लाख रुपए का लोन लिया था, उसने 4 लाख रुपए दिसंबर 2017 तक चुका दिए थे और बाकी पैसे भी जल्द ही चुकाने की बात कही थी। ज्ञान चंद्र की पत्नी ज्ञानवती ने बताया कि उसके पति ने इस साल जनवरी की शुरुआत में भी 35,000 रुपए कंपनी को दिए थे, लेकिन फिर भी कंपनी ने रिकवरी नोटिस जारी कर दिया। पुलिस ने बताया कि फायनेंस कंपनी के एजेंट्स बाकी रकम लेने के लिए शनिवार को ज्ञान के घर पहुंचे थे।

मृत किसान के भाई ने बताया कि उस वक्त ज्ञान खेत में काम कर रहा था और ट्रैक्टर भी उसके पास था। एजेंट्स सीधा खेत पहुंच गए और ज्ञान से बाकी पैसे मांगने लगे। एजेंट्स ने किसान से कहा कि या तो वह पैसे दे नहीं तो वे लोग ट्रैक्टर जब्त कर लेंगे। इस पर ज्ञान ने कहा कि वह जनवरी के आखिरी तक 65,000 रुपए दे देगा, लेकिन फिर भी एजेंट्स नहीं माने और ट्रैक्टर की चाबी छीन ली।

एजेंट्स को ट्रैक्टर ले जाने से रोकने के लिए ज्ञान बोनट से लटक गया, लेकिन फिर भी उन्होंने ट्रैक्टर चालू कर दिया। तभी अचानक उसका हाथ बोनट से फिसल गया और वह ट्रैक्टर के नीचे आ गया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। वहीं इस घटना से गुस्साए गांववाले धरना पर बैठ गए और पोस्टमार्टम के लिए शव भी पुलिस को सौंपने से मना कर दिया। जब जिला और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी गांव पहुंचे और मामले की जांच करने का आश्वसन दिया तब कहीं जाकर गांववालों ने धरना खत्म किया।

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