राजधानी दिल्ली में आने वाले महीनों में शराब की कीमतें बढ़ सकती हैं। दिल्ली सरकार नई आबकारी नीति के तहत राजस्व बढ़ाने के लिए आबकारी शुल्क और शराब दुकानों का रिटेल मार्जिन बढ़ाने की योजना बना रही है। नई नीति का मसौदा तैयार है और इसे अक्टूबर में लागू किए जाने की संभावना है। यह जानकारी द इंडियन एक्सप्रेस को मिली है।

दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नई आबकारी नीति का अंतिम मसौदा तैयार हो चुका है। हालांकि, पिछले हफ्ते दिल्ली के आबकारी आयुक्त रवि झा का तबादला अरुणाचल प्रदेश कर दिया गया। अधिकारी ने कहा कि नए अधिकारी की नियुक्ति के बाद अंतिम मसौदा दिल्ली कैबिनेट और उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद सरकार त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले अक्टूबर में नई नीति की घोषणा कर सकती है।

अधिकारी के मुताबिक, नई नीति में निजी कंपनियों के शराब कारोबार में आने की संभावना कम है। इसके बजाय शराब दुकानों का तय रिटेल मार्जिन और आबकारी शुल्क बढ़ाना सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

यह बड़ा बदलाव होगा क्योंकि फिलहाल दिल्ली में सिर्फ सरकार द्वारा संचालित शराब की दुकानें हैं। दुकानदारों को तय मार्जिन के कारण ज्यादा कमाई नहीं होती। सरकार को उम्मीद है कि मार्जिन बढ़ने के बाद दुकानों को बेहतर बनाया जाएगा और वहां ज्यादा ग्राहक आएंगे।

प्रीमियम शराब की दुकानें बढ़ेंगी

दिल्ली में प्रीमियम शराब की दुकानों की संख्या भी बढ़ने की संभावना है। एक अन्य सरकारी अधिकारी ने बताया कि फिलहाल इंडियन मेड फॉरेन लिकर (IMFL) पर प्रति बोतल अधिकतम रिटेल मार्जिन 50 रुपये और विदेशी शराब पर 100 रुपये तय है।

अधिकारी ने कहा कि तय मार्जिन के कारण दिल्ली की शराब दुकानों पर 1000 रुपये से ज्यादा कीमत वाली प्रीमियम विदेशी शराब ज्यादा नहीं रखी जाती। इससे ग्राहक गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे पड़ोसी शहरों का रुख करते हैं जहां दुकानों पर ऐसा तय मार्जिन नहीं है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर दिल्ली में ब्लैक लेबल की कीमत 3500 रुपये है तो गुरुग्राम में यही शराब करीब 2400 रुपये में मिल सकती है। अधिकारी के मुताबिक, तय मार्जिन हटाने से इस अंतर को कम किया जा सकता है।

अधिकारियों के मुताबिक, सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए आबकारी शुल्क भी बढ़ाने की योजना बना रही है। फिलहाल दिल्ली में शराब पर आबकारी शुल्क अलग-अलग थोक कीमत (WSP) के स्लैब के हिसाब से लगाया जाता है और यह शराब के प्रकार पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, भारतीय स्पिरिट्स पर यह शुल्क 30% से 300% तक है।

अधिकारी ने कहा कि अगर इन स्लैब में बढ़ोतरी होती है तो शराब की कीमत में टैक्स का हिस्सा बढ़ जाएगा। यानी आबकारी शुल्क बढ़ने पर शराब की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

इसके अलावा, अधिकारियों ने बताया कि होटल, क्लब और रेस्तरां में शराब परोसने के समय में भी बदलाव किया जा सकता है।

पिछली AAP सरकार की शराब नीति को CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के बाद खत्म किए जाने के बाद दिल्ली सरकार ने पुरानी आबकारी नीति वापस लागू कर दी थी। इसके तहत दिल्ली में सिर्फ सरकारी शराब की दुकानों को संचालन की अनुमति दी गई।

पिछले साल मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के लिए नई आबकारी नीति लाने की योजना की घोषणा की थी। उन्होंने ‘पारदर्शी और सामाजिक रूप से सुरक्षित’ नीति तैयार करने के लिए मंत्री प्रवेश साहिब सिंह की अध्यक्षता में एक मंत्रियों की समिति भी बनाई थी।

फिलहाल दिल्ली में 700 से ज्यादा शराब की दुकानें हैं। इन दुकानों का संचालन चार सरकारी कंपनियां करती हैं- दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम, दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं बुनियादी ढांचा विकास निगम, दिल्ली कंज्यूमर्स कोऑपरेटिव होलसेल स्टोर और दिल्ली राज्य नागरिक आपूर्ति निगम।

प्रस्तावित बदलावों पर ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक विनोद गिरि ने कहा कि अभी शराब की बोतल की कीमत चाहे जितनी हो, दुकानदार का मार्जिन प्रति बोतल के हिसाब से तय होता है। उदाहरण के लिए, स्कॉच व्हिस्की पर यह मार्जिन करीब 100 रुपये प्रति बोतल है और इसके बाद यह 50 रुपये आदि हो जाता है।

उन्होंने कहा कि नई नीति में सरकार कितना मार्जिन तय करती है, यह अहम होगा। आम तौर पर 5%, 10% या 15% मार्जिन देखने को मिलता है। अगर मार्जिन 10% तक रहता है तो इसमें कोई खास आपत्ति नहीं होनी चाहिए। लेकिन इससे काफी ज्यादा मार्जिन होने पर सवाल उठ सकते हैं।

आबकारी शुल्क और शराब की कीमतों को लेकर गिरि ने कहा कि दिल्ली में आबकारी शुल्क देश में सबसे ज्यादा नहीं है। अगर सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए आबकारी शुल्क बढ़ाना चाहती है तो उसके पास इसे बढ़ाने की कुछ गुंजाइश है। फिलहाल बीयर पर करीब 150% आबकारी शुल्क जबकि आयातित शराब पर 85% शुल्क लगता है। इसके अलावा 25% वैट भी लगाया जाता है।

उन्होंने कहा कि आबकारी शुल्क बढ़ने पर शराब की कीमतें बढ़ेंगी। इसका असर एक से ज्यादा स्तर पर पड़ सकता है। आबकारी शुल्क बढ़ने से शराब की बेस कीमत बढ़ेगी और इसी बेस कीमत पर रिटेल मार्जिन की गणना होती है। इसलिए रिटेल मार्जिन और आबकारी शुल्क दोनों बढ़ाए गए तो शराब की खुदरा कीमतों पर इसका ज्यादा असर पड़ सकता है।

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